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This Article is From Mar 25, 2020

ई-रिटेलर्स का आरोप- 'पुलिस के हमलों के चलते 15,000 लीटर दूध और 10,000 किलो सब्जी हुई बर्बाद'

कोरोनावायरस लॉकडाउन  की स्थिति में कंपनियों ने सरकार से आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की है.

ई-रिटेलर्स का आरोप- 'पुलिस के हमलों के चलते 15,000 लीटर दूध और 10,000 किलो सब्जी हुई बर्बाद'
ई-कॉमर्स कंपनियां का आरोप है कि कथित तौर पर पुलिस द्वारा उन पर हमले किए जा रहे हैं.
  • ई रिटेलर्स ने पुलिस पर आरोप लगाया है
  • पुुलिस द्वारा डिलीवरी करने वालों पर किए जा रहे हमले
  • सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है
नई दिल्ली:

ई-कॉमर्स कंपनियां जो कि किराने का सामान, दवाइयां, खाने पीने की चीजें डिलीवर करती हैं उनका आरोप है कि कथित तौर पर पुलिस द्वारा उन पर हमले किए जा रहे हैं और उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है. कोरोनावायरस लॉकडाउन  की स्थिति में कंपनियों ने सरकार से आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की है. ई-कॉमर्स कंपनियों का कहना है कि इस तरह रोके जाने और पुलिस प्रशासन द्वारा परेशान किए जाने से खाने-पीने की ताजा चीजों को फेंकना पड़ा और कई चीजों की बर्बादी हुई.

बिग बास्केट, फ्रेस मैन्यू और पोरटी मेडिकल के प्रमोटर के. गणेश ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पुलिस द्वारा गाली-गलौज, मारपीट और  यहां तक कि गिरफ्तारी भी की गई जिससे कि उनका कामकाज प्रभावित हुआ. एनडीटीवी से बातचीत में के. गणेश ने बताया कि जहां तक कि सरकार के कोरोनावायरस को लेकर लॉकडाउन के फैसले की बात है तो यह बिल्कुल सही फैसला है. हमारा काम आवश्यक सेवाओं में आता है. हम खाने पीने के सामान ,दवाई जैसी चीजों की डिलीवरी करते हैं लेकिन सरकार का जरूरी चीजों की डिलीवरी की अनुमति देने का निर्देश शायद जमीन तक पुलिस अधिकारियों या प्रशासन तक नहीं पहुंच सका है.

के. गणेश ने कहा कि पुलिस वालों को यह नहीं मालूम है कि यह भी एक अनिवार्य सेवा है.कई मौके पर पुलिस वाले बहुत बुरा व्यवहार करते हैं वह डिलीवरी करने वालों से मारपीट करते हैं. यहां तक कि हमारे हेल्थ वर्कर को गिरफ्तार कर लिया गया. के गणेश ने कहा कि लोग अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं तो ऐसे में उनकी पिटाई ना करें. हालांकि चालान किया जा सकता है. अगर लोग डरकर सेवा करने से भाग जाएंगे तो हम काम कैसे करेंगे? जो लोग जरूरी सामान की डिलीवरी कर रहे हैं या सामान पहुंचा रहे  हैं उनके साथ मारपीट नहीं की जानी चाहिए.

ऑनलाइन ग्रॉसरी रिटेलर ग्रोफर्स और फ्रेश टू होम ने कहा कि इसी तरह का हस्तक्षेप का सामना उन्हें भी करना पड़ रहा है. पुलिस आम लोगों में और डिलीवरी करने वालों में फर्क नहीं समझ पा रही है. इस तरह के हस्तक्षेप की वजह से खाने-पीने के सामान की बर्बादी हुई है. ग्राहकों को संदेश देते हुए ग्रॉसरी और मिल्क डिलीवरी वेबसाइट मिल्क बास्केट ने बताया कि उनको मजबूरन 15,000 लीटर दूध फेंकना पड़ा और 10,000 किलो की सब्जी भी बर्बाद हुई. 

उन्होंने बताया कि वे गुड़गांव, नोएडा, हैदराबाद में दूध की डिलीवरी नहीं कर सकते. टेक अवे रेस्टोरेंट्स भी इसी तरह की समस्या का सामना कर रहे हैं. बेकिंग बैड के फाउंडर अरुण जायसवाल ने भी कुछ इसी तरह के आरोप पुलिस पर लगाए. जयसवाल ने कहा कि ईस्ट ऑफ कैलाश , दक्षिण दिल्ली में तो बाइक पर जा रहे डिलीवरी करने वालों को लाठीचार्ज तक का सामना करना पड़ा. नोएडा में फोन तक छीने जा रहे हैं और उनको प्रूफ दिखाना पड़ रहा है.

कैप्टन ग्रब के करन नांबियार ने भी इन आरोपों को दोहराते हुए बताया कि नोएडा पुलिस ने हमको नहीं बताया कि हमें डिलीवर क्यों नहीं करने दिया जा रहा है. पुलिस को खुद कानून की जानकारी नहीं है.हमारे डिलीवरी बॉय स्वास्थ्य और वक्त को जोखिम में डालकर खाने पीने के सामान की डिलीवरी कर रहे हैं और जरूरतमंदों तक खाना पहुंचा रहे हैं. 

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