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DUSU Election: टॉम अंकल अड्डा से हॉस्टल तक, ‘DU के बाबा’ और महंगी गाड़ियां के बीच कैसी है चुनावी तस्वीर?

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के लिए ABVP, NSUI और अन्य संगठनों के बीच कड़ा मुकाबला है. टॉम अंकल मैगी पॉइंट से लेकर हॉस्टलों तक जमकर प्रचार किया गया है. चुनाव में लग्जरी गाड़ियों, सोशल मीडिया रील्स और 'DU के बाबा' कहे जाने वाले पुराने नेताओं का भी दबदबा है.

DUSU Election: टॉम अंकल अड्डा से हॉस्टल तक, ‘DU के बाबा’ और महंगी गाड़ियां के बीच कैसी है चुनावी तस्वीर?

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के लिए शुक्रवार 18 सितंबर को मतदान होना है. मतदान से पहले सभी छात्र संगठनों ने ज्यादा से ज्यादा समर्थन के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. चुनाव के बीच छात्र संगठनों के बीच हुई झड़प ने माहौल और भी ज्यादा गर्म कर दिया. इन घटनाओं के बीच सवाल यह भी है कि आखिर DU के छात्र चुनाव को किस नजर से देख रहे हैं और कैंपस में इस समय क्या-क्या देखने को मिल रहा है. NDTV ने मतदान से ठीक पहले नॉर्थ और साउथ कैंपस का जायजा लिया और चुनावी माहौल को करीब से समझने की कोशिश की. 

महंगी गाड़ियों की चुनाव में भरमार.

महंगी गाड़ियों की चुनाव में भरमार.

टॉम अंकल अड्डा: जहां बनती हैं चुनावी रणनीतियां

DUSU चुनाव के दौरान नॉर्थ कैंपस का टॉम अंकल मैगी पॉइंट छात्र संगठनों के लिए पुराने और अहम मीटिंग पॉइंट में से एक है. यहां ABVP से लेकर NSUI और लेफ्ट छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहता है. दिलचस्प बात यह है कि चुनावी प्रतिस्पर्धा और झड़पों की खबरों के बीच यह जगह काफी शांत दिखाई देती है. अलग-अलग संगठनों के छात्र यहां एक-दूसरे से बातचीत करते हैं. इतना ही नहीं, एक दूसरे के विरोधी दोनों सगंठन के लोग एक दूसरे का सम्‍मान भी करते हैं. अगर, कोई ABVP का वरिष्ठ कार्यकर्ता है तो NSUI के छात्र आगे बढ़कर पैर छूकर उसे प्रणाम करते दिखाई देते हैं. यही तस्वीर अन्य छात्र संगठनों के बीच भी देखने को मिलती है. 

चुनाव के लिए प्रचार करते ABVP के कार्यकर्ता.

चुनाव के लिए प्रचार करते ABVP के कार्यकर्ता.

चाय-मैगी के साथ चुनावी प्लानिंग

टॉम अंकल मैगी पॉइंट सिर्फ मिलने-जुलने की जगह नहीं है, बल्कि यहां आंदोलन, एजेंडा और प्रचारकों से जुड़ी कई योजनाओं पर चर्चा होती है. चाय की चुस्कियों और मैगी-स्नैक्स के बीच छात्र संगठन चुनावी रणनीति तैयार करते हैं. कैंपस की राजनीति में यह जगह लंबे समय से छात्रों की बैठकों और चर्चाओं का हिस्सा रही है.
दिल्ली विश्वविद्यालय में जगह-जगह लगे पोस्‍टर.

दिल्ली विश्वविद्यालय में जगह-जगह लगे पोस्‍टर.

‘DU के बाबा' भी मैदान में

DUSU चुनाव में मुकाबला सिर्फ मौजूदा उम्मीदवारों और छात्र संगठनों के बीच नहीं है. DU में कुछ ऐसे छात्र नेता भी हैं जिन्हें छात्र राजनीति में ‘DU के बाबा' कहा जाता है. ABVP, NSUI और लेफ्ट छात्र संगठनों में ऐसे 3-4 व्यक्ति हैं, जिन्होंने 2011-12 में चुनाव लड़ा था और तब से अपना छात्र आधार बनाए रखा है. चुनाव में ये अपने उम्मीदवार उतारकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं.

इन नेताओं की भूमिका का असर छात्र राजनीति के साथ-साथ राज्य और केंद्र के चुनावों में भी दिखाई देता है. चुनावों के दौरान छात्र इनके नेताओं के लिए प्रचार करते हैं. इस तरह इनकी पकड़ छात्र राजनीति और व्यापक राजनीति, दोनों में बनी रहती है.
18 स‍ितंबर को मतदात, 19 को आएगा चुनाव पर‍िणाम.

18 स‍ितंबर को मतदात, 19 को आएगा चुनाव पर‍िणाम.

महंगी गाड़ियों का दिखता है अलग असर

DUSU चुनाव की चर्चा महंगी गाड़ियों के बिना भी अधूरी रहती है. इस साल ऐसी गाड़ियों की संख्या में कुछ कमी जरूर दिखाई दी है, लेकिन डिफेंडर से लेकर BMW और फॉर्च्यूनर जैसी गाड़ियां कैंपस में आम दृश्य हैं. दूसरे राज्यों और अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों से आने वाले छात्रों के लिए यह आकर्षण का विषय भी बनता है. नॉर्थ कैंपस से लेकर साउथ कैंपस तक जगह-जगह महंगी गाड़ियों के साथ अलग-अलग छात्र संगठनों के युवा नेता नजर आते हैं.

साउथ कैंपस के छात्र आयुष रघुवंशी ने NDTV से बात करते हुए कहा- महंगी गाड़ियां केवल वर्चस्व का प्रदर्शन नहीं करतीं, बल्कि छात्रों के बीच उम्मीदवार की ताकत और प्रभाव का संदेश भी देती हैं. 

इंस्टाग्राम पर भी शक्ति प्रदर्शन

चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता. अलग-अलग छात्र संगठनों ने इंस्टाग्राम पर अपने पेज और अकाउंट बना रखे हैं. ABVP के 3 लाख 85 हजार, NSUI के 8 लाख 12 हजार, SFI के 87 हजार  और AISA दिल्ली के 22 हजार 400 फॉलोअर्स हैं. उम्मीदवार लगातार वीडियो और रील्स के जरिए छात्रों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. 

ABVP के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डबास के इंस्टाग्राम पर 52 हजार 700, जबकि NSUI के विजय शंकर मीणा के 1 लाख 19 हजार फॉलोअर्स हैं. इनके अलावा अलग-अलग उम्मीदवारों के फैन पेज भी मौजूद हैं. ऐसे में चुनावी प्रचार का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रहा है.
लग्‍जरी गाड़ियों से किया गया चुनाव प्रचार.

लग्‍जरी गाड़ियों से किया गया चुनाव प्रचार.

आखिरी रात तक हॉस्टलों में पहुंच रहे उम्मीदवार

18 स‍ितंबर को मतदान होना है. ऐसे में छात्र संगठन अपनी आखिरी ताकत झोंक रहे हैं. रात में भी उम्मीदवार और उनके समर्थक हॉस्टलों में जाकर छात्रों से समर्थन मांग रहे हैं. इससे पहले प्रचार अभियान के दौरान अलग-अलग छात्र संगठनों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भी छात्रों को जोड़ने की कोशिश की. 

चुनाव मैदान में NSUI के बागी, NSUI उम्मीदवार, ABVP और लेफ्ट छात्र संगठन हैं. इनके अलावा ASAP के दृष्टिबाधित उम्मीदवार भी मुकाबले का हिस्सा हैं. जिनकी किस्‍मत का फैसला 19 सितंबर को पर‍िणाम घोषित होने पर होगा. 

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