- निठारी कांड में बच्चों की हत्या के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या की
- सुरेंद्र कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में चाय बेचने का काम करता था
- उसे अदालत ने 2025 में ही निठारी कांड में बरी किया था, तब से वह हरिद्वार में रह रहा था.
निठारी कांड में बच्चों की हत्या के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या कर ली है. जानकारी के मुताबिक उसने हरिद्वार में फांसी लगाकर जान दी थी. वह पिछले कुछ समय से हरिद्वार में चाय बेचा करता था. उसे बीते साल ही सुप्रीम कोर्ट ने बरी किया था. 2006 में नोएडा के निठारी में बच्चों की हत्याओं का मामला चर्चित रहे था और सुरेंद्र कोली भी इस केस में आरोपी था. वह उस कुख्यात कोठी में घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था, जिसके मालिन मोनिंदर सिंह पंढेर पर भी आरोप लगा था. मोनिंदर सिंह पंढेर को इस मामले में अदालत ने पहले ही बरी कर दिया था. करीब 20 साल तक यह मामला लगातार चला था और उसके बाद बीते साल नवंबर में सुरेंद्र कोली को बरी किया था.
इस मामले में 19 महिलाओं और बच्चों के कंकाल कोठी के पास से पाए गए थे. इस मामले ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं और निठारी कुख्यात हो गया था. सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर में सुनवाई के दौरान सुरेंद्र कोली के इस दावे को स्वीकार कर लिया था कि उसने पुलिस के दबाव में स्वीकार कर लिया था कि वह हत्याओं में शामिल था और उसने उनके शवों के टुकड़े खाए थे. आरोप यहां तक था कि कुछ महिलाओं और बच्चों के साथ बलात्कार भी हुआ था. बड़ी संख्या में नरकंकाल पाए जाने के बाद जांच तेज हुई थी तो पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली के घर पर जांच की थी. पुलिस का दावा था कि कुछ प्रमाण पाए गए हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में कंकार पंढेर की कोठी के पास ही बरामद हुए थे.
यह मामला चर्चा में तो खूब रहा, लेकिन करीब 20 साल बाद कहानी का कानूनी अंत बिल्कुल अलग हुआ. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में कोली को 12 मामलों में बरी कर दिया और नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित मामले में भी उसकी सजा रद्द कर उसे बरी कर दिया. इसके साथ निठारी कांड से जुड़े उसके खिलाफ सभी आपराधिक मामले खत्म हो गए. सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के मंगलू खाल गांव का रहने वाला था. वह बेहद गरीब परिवार से आता था और आर्थिक तंगी की वजह से उसकी पढ़ाई ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाई और उसने स्कूल छोड़ दिया.
रोजगार के लिए दिल्ली आया कोली कैसे पंढेर तक पहुंचा
रोजगार की तलाश में वह दिल्ली-एनसीआर आया और मजदूरी तथा घरेलू काम करने लगा. साल 2004 में वह नोएडा के सेक्टर-31 के निठारी इलाके में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर काम करने लगा था. उस समय कोली की उम्र करीब 20 साल थी। उसके पीछे उसका परिवार भी था, उसकी मां बीमार थी, पत्नी गर्भवती थी और उसकी एक छोटी बेटी भी थी. निठारी के D-5 मकान में सुरेंद्र कोली घरेलू नौकर के तौर पर काम करता था. इसी मकान के पीछे दिसंबर 2006 में एक नाले और खुले इलाके से बच्चों के नरकंकाल और दूसरी हड्डियां मिलने लगीं. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और 29 दिसंबर 2006 को सुरेंद्र कोली और मकान मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को हिरासत में लिया गया. बाद में मामले की जांच CBI को सौंप दी गई.
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