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'डिजिटल एडिक्शन’ हर साल ले लेता है 20 हजार बच्‍चों की जान, TMC सांसद का राज्‍यसभा में बड़ा दावा

TMC सांसद डेरेक ओ' ब्रायन ने समस्या के जैविक पहलू को समझाते हुए कहा कि स्क्रीन के उपयोग से डोपामाइन में वृद्धि होती है, जिससे मस्तिष्क को त्वरित ‘रिवार्ड सिग्नल’ मिलता है और यह व्यवहार मजबूत होकर डिजिटल लत का रूप ले लेता है. 

'डिजिटल एडिक्शन’ हर साल ले लेता है 20 हजार बच्‍चों की जान, TMC सांसद का राज्‍यसभा में बड़ा दावा
TMC सांसद डेरेक ओ' ब्रायन ने राज्‍यसभा में डिजिटल एडिक्शन का मुद्दा उठाया. (AI इमेज)
  • तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओब्रायन ने राज्यसभा में बच्चों और युवाओं में बढ़ती डिजिटल लत पर गंभीर चिंता जताई.
  • डिजिटल लत के कारण हर साल करीब 20 हजार बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं, जिसका समाधान आवश्यक है.
  • उन्होंने कहा कि अध्ययनों से पता चलता है कि बच्चे और युवा रोजाना 8 घंटे स्क्रीन और मोबाइल फोन पर बिता रहे हैं.
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नई दिल्ली :

तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने शुक्रवार को राज्यसभा में बच्चों और युवाओं में बढ़ती डिजिटल लत का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि इसके चलते हर साल करीब 20 हजार बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं. उन्होंने सरकार से इस संकट समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई करने की मांग की. उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न अध्ययनों से संकेत मिलता है कि बच्चे और युवा प्रतिदिन करीब आठ घंटे का समय स्क्रीन और मोबाइल फोन पर बिता रहे हैं, जो साल में 100 दिनों से अधिक के बराबर है. तृणमूल सदस्य ने यह भी उल्लेख किया कि 68 देशों ने स्कूलों में मोबाइल फोन पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है. 

ओ'ब्रायन ने कहा कि अत्यधिक स्क्रीन समय नींद को बाधित करता है, चिंता के खतरे को बढ़ाता है और मूड में जल्दी बदलाव का कारण बनता है.

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TMC सांसद ने समस्‍या को लेकर दिए सुझाव 

उन्होंने समस्या के जैविक पहलू को समझाते हुए कहा कि स्क्रीन के उपयोग से डोपामाइन में वृद्धि होती है, जिससे मस्तिष्क को त्वरित ‘रिवार्ड सिग्नल' मिलता है और यह व्यवहार मजबूत होकर डिजिटल लत का रूप ले लेता है. 

ओ'ब्रायन ने व्यक्तिगत स्तर पर भी कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए. इन सुझावों में फोन उठाने से पहले ‘क्यों' पूछना, उसे छूने से पहले दस तक गिनती करना, उपकरणों को अलग कमरे में चार्ज करना, सोने से कम से कम दो घंटे पहले स्क्रीन से दूर रहना और ‘साउंड ऑफ साइलेंस' यानी एक तय समय तक स्क्रीन या फोन का इस्तेमाल न करना आदि शामिल हैं. 

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सरकार से मुद्दे को गंभीरता से लेने की अपील

उन्होंने सरकार से मांग की कि मोबाइल फोन या स्क्रीन के जरूरत के अनुसार उपयोग को बढ़ावा देना, ऑफलाइन गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य तथा डिजिटल ‘एडिक्शन' से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर व्यापक संवाद शुरू करना शामिल है. 

तृणमूल सदस्य ने कहा, “मैं सरकार से अपील करता हूं कि डिजिटल ‘एडिक्शन' के इस मुद्दे को गंभीरता से ले और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के साथ मिलकर इसका समाधान करे.”

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