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दिनभर मोबाइल से चिपका रहता है बच्चा? पढ़ाई में ध्यान बढ़ाने के लिए करें ये 3 काम, खुद खोल लेगा किताब

Bachon se Mobile Kaise Chudaye: डांटने या मोबाइल छीनने से ज्यादा जरूरी है सही आदतें बनाना. अगर कुछ आसान ट्रिक्स रोजाना अपनाई जाएं, तो बच्चे का ध्यान पढ़ाई में बढ़ सकता है.

दिनभर मोबाइल से चिपका रहता है बच्चा? पढ़ाई में ध्यान बढ़ाने के लिए करें ये 3 काम, खुद खोल लेगा किताब
Bachon se Mobile Kaise Chudaye: लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों का फोकस कमजोर हो सकता है. (AI Image)

Bacho Ko Phone Se Kaise Hataye: आज के समय में मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं. ऑनलाइन क्लास, गेम्स, कार्टून और सोशल मीडिया की वजह से बच्चे घंटों स्क्रीन से चिपके रहते हैं. शुरुआत में यह सिर्फ मनोरंजन लगता है, लेकिन धीरे-धीरे इसका असर उनकी पढ़ाई, याददाश्त और व्यवहार पर दिखने लगता है. कई माता-पिता शिकायत करते हैं कि बच्चा पढ़ाई में मन नहीं लगाता, जल्दी बोर हो जाता है या हर थोड़ी देर में मोबाइल मांगने लगता है. लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों का फोकस कमजोर हो सकता है और दिमाग जल्दी थकने लगता है. ऐसे में डांटने या मोबाइल छीनने से ज्यादा जरूरी है सही आदतें बनाना. अगर कुछ आसान ट्रिक्स रोजाना अपनाई जाएं, तो बच्चे का ध्यान पढ़ाई में बढ़ सकता है और स्क्रीन की लत भी धीरे-धीरे कम हो सकती है.

बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से कैसे दूर रखें? | How to Keep Children Away From Mobile Screens? 

1. नो स्क्रीन टाइम का नियम बनाएं

बच्चों को अचानक मोबाइल से दूर करना आसान नहीं होता. इसलिए सबसे पहले घर में नो स्क्रीन टाइम तय करें. जैसे खाने के समय, सोने से एक घंटा पहले और पढ़ाई के दौरान मोबाइल या टीवी पूरी तरह बंद रखें.

जब बच्चा पढ़ाई कर रहा हो, तब आसपास टीवी चलाना या खुद मोबाइल इस्तेमाल करना भी उसकी एकाग्रता बिगाड़ सकता है. इसलिए माता-पिता को भी थोड़ा अनुशासन दिखाना जरूरी है.

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आप चाहें तो बच्चे के लिए दिनभर का एक छोटा टाइमटेबल बना सकते हैं, जिसमें पढ़ाई, खेल, स्क्रीन टाइम और आराम का समय अलग-अलग हो. इससे बच्चे का दिमाग एक रूटीन में काम करना सीखता है और पढ़ाई पर फोकस बढ़ने लगता है.

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2. पढ़ाई को मजेदार बनाएं, बोझ नहीं

कई बार बच्चे पढ़ाई से इसलिए दूर भागते हैं क्योंकि उन्हें यह बहुत बोरिंग लगती है. अगर पढ़ाई को थोड़ा मजेदार बनाया जाए, तो बच्चा खुद रुचि लेने लगता है.

  • उदाहरण के लिए छोटे-छोटे ब्रेक के साथ पढ़ाई करवाएं.
  • रंगीन चार्ट, फ्लैश कार्ड या स्टोरी के जरिए समझाएं
  • हर टॉपिक पूरा होने पर छोटी तारीफ या रिवॉर्ड दें

जब बच्चे को लगेगा कि पढ़ाई सिर्फ डांट या दबाव नहीं बल्कि मजेदार एक्टिविटी भी हो सकती है, तो उसका ध्यान अपने आप बढ़ने लगेगा.

विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों को लगातार लंबे समय तक बैठाकर पढ़ाने की बजाय 25-30 मिनट के छोटे सेशन ज्यादा असरदार होते हैं.

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3. आउटडोर खेल और फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं

अगर बच्चा पूरा दिन घर में मोबाइल लेकर बैठा रहता है, तो उसका दिमाग जल्दी थक सकता है. इसलिए रोजाना कम से कम एक घंटा आउटडोर खेल बहुत जरूरी है.

साइकिल चलाना, दौड़ना, क्रिकेट, बैडमिंटन या पार्क में खेलने जैसी एक्टिविटी बच्चों के दिमाग को एक्टिव रखती हैं. इससे उनकी ऊर्जा सही दिशा में इस्तेमाल होती है और स्क्रीन पर निर्भरता कम होने लगती है.

फिजिकल एक्टिविटी से बच्चों की नींद भी बेहतर होती है. अच्छी नींद लेने वाले बच्चों का फोकस और याददाश्त दोनों मजबूत रहते हैं.

सिर्फ रोकना नहीं, सही दिशा देना जरूरी

बच्चों को मोबाइल से पूरी तरह दूर रखना आज के समय में संभव नहीं है, लेकिन उसका सही इस्तेमाल सिखाना बहुत जरूरी है. अगर माता-पिता प्यार और समझदारी से छोटी-छोटी आदतें बदलें, तो बच्चा धीरे-धीरे स्क्रीन से बाहर की दुनिया में भी रुचि लेने लगेगा.

याद रखें, बच्चों का फोकस बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है, उन्हें समय देना, उनके साथ खेलना और पढ़ाई को तनाव नहीं बल्कि सीखने का मजेदार हिस्सा बनाना.

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