- सरकार क्या परिसीमन बिल भी अगले हफ्ते ला रही है, इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने कुछ भी पक्का नहीं कहा है.
- परिसीमन बिल को लेकर डीएमके ने सरकार के पास तीन शर्तें रखी हैं.
- सरकार अभी सदन में आम राय बनाने के लिए लगातार कोशिश में लगी है.
संसद के मानसून सत्र में अब सिर्फ चार दिन ही बचे हुए हैं. सरकार इन चार दिनों में एफसीआए यानी विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक लाने वाली है. मगर अभी भी इस पर आम राय नहीं बन पाई है. सरकार इस बिल से संबंधित कई संस्थाओं और उत्तर पूर्व के राज्यों के नेताओं से बातचीत भी कर रही है और उम्मीद है कि सरकार यह बिल अगले हफ्ते ले कर आएगी. वहीं, बहुचर्चित परिसीमन बिल पर संस्पेंस बरकरार है. सरकार क्या परिसीमन बिल भी अगले हफ्ते ला रही है, इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने कुछ भी पक्का नहीं कहा है. क्या परिसीमन बिल पर संसद का विशेष सत्र भी बुलाया जाएगा, यह भी तय नहीं है, मगर कयास यह लगाए जा रहे हैं कि सरकार इस बिल के लिए दो तिहाई बहुमत जुटाने में लगी है और जैसे ही वो जादुई आंकड़ा सरकार को मिल जाएगा यह बिल संसद में लाया जाएगा.
परिसीमन बिल के लिए सबसे अहम है डीएमके का समर्थन, क्योंकि उनके सहयोग के बिना यह बिल पास नहीं हो सकता. डीएमके अभी तक आधिकारिक तौर पर यही कह रही है कि सरकार से इस मुद्दे पर उनकी कोई बातचीत नहीं हुई है और एक बार बिल की प्रति वो देखेंगे तभी कुछ भी कह सकते हैं.
परिसीमन के मुद्दे पर मीटिंग में 25 सांसद...
परिसीमन के मुद्दे पर शनिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसका डीएमके, एआईएडीएमके और पीएमके जैसी पार्टियों ने बहिष्कार किया. यही वजह है कि तमिलनाडु के लोकसभा और राज्यसभा के 57 सांसदों में से 25 सांसद ही इस बैठक में शामिल हुए. इस बैठक में यह प्रस्ताव पास हुआ कि कोई परिसीमन या कोई दूसरी चीज विकल्प नहीं हो सकता और इसलिए केंद्र सरकार लोकसभा की 543 की संख्या को फ्रीज करे.
इस बैठक में कांग्रेस, वीसीके, सीपीआई, सीपीएम, एमडीएमके और आईयूएमएल जैसे दल शामिल हुए थे. कांग्रेस यह चाहती है कि इस प्रस्ताव को तमिलनाडु के विधानसभा से पारित कराया जाए, जिससे डीएमके और एआईएडीएमके पर दबाव बनाया जा सके. अगर ऐसा होता है. तो डीएमके पर दबाव बढ़ेगा क्योंकि जब पिछली बार यही बिल लाया गया था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री स्टालिन ने इस बिल की प्रति को जलाया था.
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कांग्रेस के तरफ से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे खुद इस मामले को देख रहे हैं. वहीं, सरकार का अगला कदम डीएमके के अगले फैसले पर ही निर्भर करेगा. इस सबके बीच कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों को सदन के बाकी बचे दिनों की कार्यवाही में शामिल होने के लिए व्हिप जारी कर दिया है. जबकि एनडीए ने भी अपने सभी सांसदों को उपस्थित रहने के लिए कहा है.
सरकार अभी सदन में आम राय बनाने के लिए लगातार कोशिश में लगी है. संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने तीन बार लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष से संर्पक किया है, मगर अभी भी बात नहीं बनी है. विपक्ष जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाने के मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री का बयान और अयोध्या में राम मंदिर में चंदा चोरी पर बहस कराने पर अड़ा हुआ है. इसकी वजह से सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होती रही है.
अगले बचे चार दिनों में निश्चित रूप से सरकार के एजेंडे पर एफसीआरए और परिसीमन बिल है. एफसीआरए संसदीय समिति को भेजा जा सकता है लेकिन परिसीमन बिल की चाबी डीएमके के हाथों में हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस पर कैसे आगे बढ़ती है और क्या एक और विशेष सत्र देखने को मिलेगा.
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