कर्नाटक के होम मिनिस्टर प्रियांक खरगे का कहना है कि हमारी सरकार आरएसएस के इतिहास का अध्ययन कर रही है. इसके बाद कानून के दायरे में रहते हुए जो भी कदम RSS को लेकर हमें उठाने होंगे, हम उठाएंगे. उन्होंने कहा कि हम आरएसएस को कानूनी परिभाषा के तहत लाना चाहते हैं ताकि उसकी जवाबदेही तय हो सके. आरएसएस चीफ मोहन भागवत को लिखे पत्र क्या जवाब आया है? यह पूछे जाने पर प्रियांक खरगे ने हंसते हुए कहा कि ऐसी तो उम्मीद नहीं है. उन्होंने कहा कि मैं आप लोगों से पहले ही बता चुका हूं कि जवाब नहीं आएगा. हमने यह भी बताया था कि हम इनसे ढंग से निपटेंगे. हम जो कुछ भी करेंगे, वह कानून के दायरे में होगा.
प्रियांक खरगे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे हैं और कर्नाटक सरकार में अहम मंत्रालय संभाल रहे हैं. प्रियांक ने कहा कि फिलहाल आरएसएस कानूनी दायरे से ही बाहर रहकर काम कर रहा है. हम उसे इस दायरे में लाने की कोशिश में हैं. उन्होंने कहा कि हमें कम से कम एक से डेढ़ महीना लगेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि हम आरएसएस का इतिहास जानने की कोशिश कर रहे हैं. हम उनके बारे में अध्ययन कर रहे हैं. एक बार उनके कामकाज को अच्छे से समझने के बाद हम एक्शन लेंगे. प्रियांक ने कहा कि हमें आरएसएस के 100 सालों के इतिहास के बारे में जानना होगा. वे खुद भी अपने इतिहास के बारे में नहीं जानते.
आरएसएस चीफ मोहन भागवत पर तंज कसते हुए खरगे ने कहा कि अब उन्होंने जेन जी के लोगों से मुलाकात की है. पहले उनकी पिटाई की गई और अब उनसे मुलाकात करने का क्या अर्थ है. उन्होंने कहा कि आखिर आरएसएस कौन है, जो यह सर्टिफिकेट जारी करे कि कौन कितना देश भक्त है और कौन नहीं है. खरगे ने कहा कि आरएसएस तो खुद ही पंजीकृत संगठन नहीं है. आज वे दूसरों को सर्टिफिकेट देना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि क्या मैं तय कर सकता हूं कि कौन देशभक्त है और कौन गद्दार है? इस संबंध में फैसला लेने वाले वह कौन हैं? आखिर वह किस हैसियत से किसी को सर्टिफिकेट देना चाहते हैं.
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