- दिल्ली में सड़क पर शराब पीने वालों पर अब पुलिस की कार्रवाई दिखने वाली है.
- सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हुए दुष्कर्म की घटनाओं पर सुनवाई में सख्त हिदायत दी है.
- सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से कहा कि अपराध पर लगाम लागने के लिए कार्रवाई करनी होगी.
दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों और असुरक्षित माहौल पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. 5 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में दिल्ली पुलिस को सु्प्रीम कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि आखिर राजधानी में अपराध कैसे रुकेंगे?. पिछले 2 महीनों में दिल्ली-NCR में हुए दुष्कर्म के 3 मामलों के बाद सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अपराधियों के मन में पुलिस का डर होना चाहिए. सुनवाई के दौरान अदालत ने साल 2012 के'निर्भया केस' का भी जिक्र किया. सर्वोच्च न्यायलय ने चिंता जताई कि इतने सालों बाद भी दिल्ली की सड़कों पर बसों और मेट्रो स्टेशनों को प्रशासनिक लापरवाही या ढीली गश्त के कारण हाई-रिस्क जोन बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती. कोर्ट की इस सख्त हिदायत के बाद दिल्ली पुलिस की सख्ती अब दिख सकती है. दरअसल, दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर शराब पीना एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है. जिसके आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं. जिससे यह पता चलता है कि दिल्ली में होने वाले अपराधों में शराब पीना एक बड़ी समस्या है.
सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्भया केस का उदाहरण
सुप्रीम कोर्ट में निर्भया पारदीवाला की बैंच ने दिल्ली पुलिस को 012 के निर्भया मामले का उदाहरण देते हुए कहा 'इस घटना में भी आरोपियों ने बर्बर अपराध को अंजाम देने से पहले खाना खाया था और शराब पी थी. उसके बाद ही उन्होंने दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था. इसलिए दिल्ली पुलिस को सबसे पहले सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने की घटनाओं पर सख्ती दिखानी होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस को इस मामले में सख्त और कठोर होने में जरा भी नहीं हिचकिचाना चाहिए, भले ही उन्हें लोगों के विरोध का सामना करना पड़े फिर भी उन्हें यौन अपराधों को रोकने के लिए अपना कर्तव्य निभाना चाहिए. क्योंकि दिल्ली में लड़कियों की सुरक्षा के लिए यह करना जरूरी है.
दिल्ली के यह आंकड़े चौंका रहे हैं.
दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने का आंकड़ें चौंकाने वाले हैं. 'द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट' के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने जनवरी 2026 से सिंतबर 2026 में 54 हजार 531 सार्वजनिक रूप से शराब पीने के मामले दर्ज किए हैं. पिछले साल यह मामले 9 महीने में 42 हजार 231 थे. यानि इस तरह की घटनाओं में 29 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.
दिल्ली के यह आंकड़े चौंका रहे हैं
दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर शराब पीने का आंकड़ें चौंकाने वाले हैं. 'द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट' के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने जनवरी 2026 से सिंतबर 2026 में 54 हजार 531 सार्वजनिक रूप से शराब पीने के मामले दर्ज किए हैं. पिछले साल यह मामले 9 महीने में 42 हजार 231 थे. यानि इस तरह की घटनाओं में 29 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.
67084 लोगों की गिरफ्तारी
दिल्ली आबकारी अधिनियम ने धारा-40 के तहत पुलिस ने 67 हजार 084 लोगों को गिरफ्तार किया. जो पिछले साल से 26 प्रतिशत ज्यादा है. इसमें भी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में शराब पीने को लेकर गिरफ्तारियों में भी अंतर दिखता है. जिसमें चार जगह हॉटस्पाट बनकर सामने आई हैं, क्योंकि यहां सबसे ज्यादा गिरप्तारियां हुई हैं.
- साउथ दिल्ली में 12,549 मामले (सबसे ज्यादा)
- साउथ-ईस्ट दिल्ली में 12420
- द्वारका में 5764 मामले
- वेस्ट दिल्ली में 6,116 मामले.

दिल्ली पुलिस को सुरक्षा संबंधी निर्देश
दिल्ली पुलिस को सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा संबंधी कुछ अहम निर्देश दिए हैं. जिसमें संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करना होगी. जिसमें हर जिले उन स्थानों का चयन करना होगा, जहां अपराध होते हैं, इन स्थानों में पार्क, बाजार, परिवहन केंद्र और स्कूल-कॉलेज शामिल होंगे.
संवेदनशील इलाकों का मैप बनाना
दिल्ली पुलिस को सभी जिलों में संवेदनशील इलाकों का मैप बनाने की बात कही है. जिसमें आपसास के पुलिस स्टेशन में दर्ज होने वाले अपराधों की पूरी जानकारी होनी चाहिए. ताकि उस इलाके में अपराध का पैटर्न समझा जा सके. इसी के आधार पर अपराधियों पर नजर रखी जानी चाहिए. इसके अलावा महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित और संवेदनशील इलाकों पर सबसे ज्यादा नजर रखी जाए.
दिल्ली में गश्त बढ़ानी होगी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए हैं कि रात में गश्ती बढ़ानी होगी. खास तौर पर दुर्गा पूजा, दीवाली जैसे आयोजनों के दौरान सख्ती दिखानी होगी. सुबह और शाम के वक्त सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की निगरानी बढ़नी चाहिए. यहां के लिए सीनियर अधिकारी नियुक्त होने चाहिए. जिनके पास उस इलाके की जानकारी भी होनी चाहिए. गश्त के दौरान शराब पीने की जांच, मोबाइल चेक पोस्ट भी होने चाहिए. जबकि कारों में ब्लैक मार्कों की भी जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि केवल कागजों पर 'सब ठीक है' दिखाना बंद करेंय. पुलिस को जमीन पर उतरकर ऐसा माहौल बनाना होगा कि अपराधियों में कानून का डर पैदा हो और महिलाएं देर रात भी सुरक्षित महसूस कर सकें.
सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी बढ़ाने होंगे.
दिल्ली के सभी पार्कों और संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी की निगरानी मजबूत होनी चाहिए. साथ ही खराब स्ट्रीट लाइट भी रात के वक्त बिल्कुल ठीक होनी चाहिए. जरुरत के हिसाब से सार्वजनिक स्थानों पर लाइट और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए. इसके अलावा लोगों की शिकायतों पर भी खख्ती दिखानी होगी. अगले 4 हफ्तों में दिल्ली के सभी पार्कों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर स्ट्रीट लाइट्स और सीसीटीवी कैमरों का फुल ऑडिट कर उन्हें दुरुस्त करना होगा.
हर लड़की और महिला हमारी बहन
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि छेड़छाड़ या दुष्कर्म से पीड़ित हर लड़की और महिला हमारी और आपकी मां या बहन है. निर्भया कांड के सालों बाद भी अगर देश की राजधानी की सड़कों पर महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं. तो यह दिल्ली पुलिस के लिए बड़ा सवाल है. ऐसे में खाने-पीने की दुकानों और सड़कों पर सरेआम शराब पीकर हुड़दंग मचाने वाले तत्वों पर पुलिस का डंडा चलाना ही होगा. सुपीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल कागजी कार्रवाई नहीं चाहिए, दिल्ली पुलिस का एक्शन चाहिए. इस मामले में 16 नवंबर को अगली सुनवाई होगी. जिसमें दिल्ली पुलिस को अपनी रिपोर्ट देनी होगी.
ये भी पढ़ेंः रेप किया तो मारे जाएंगे, गुंडों के मन में कैसे पैदा होगा ये डर, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को समझाया
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं