- दिल्ली पुलिस ने CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान वकीलों के साथ हुई बदसलूकी पर लिखित माफी मांगी है
- हेड कॉन्स्टेबल विक्रांत ने लोधी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में वकीलों के साथ अनुचित व्यवहार पर बिना शर्त माफी मांगी
- वकील प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस स्टेशन में उनसे मिलने और उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों के मामले में वकीलों के साथ बदसलूकी पर दिल्ली पुलिस ने माफी मांगी है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को लिखित में माफी मांगी. वायरल वीडियो में वकील आरोप लगा रहे थे कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की मदद करने की कोशिश के दौरान लोधी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में उनके साथ बदसलूकी की गई.
दिल्ली पुलिस ने वकीलों से मांगी माफी
दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल विक्रांत ने शुक्रवार को जारी एक लिखित बयान में वकीलों के उस गुट से बिना शर्त माफी मांगी जो गुरुवार शाम पुलिस स्टेशन पहुंचे थे. ये वकील CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए तीन छात्रों का पक्ष रखने के लिए वहां गए थे.
NDTV को एक माफीनामा मिला है, इस लिखित माफीनामे में कहा गया है, "मैं, हेड कॉन्स्टेबल विक्रांत, 23 जुलाई को लोधी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में हुई घटना के दौरान वकीलों के साथ किए गए अपने दुर्व्यवहार और अनुचित आचरण के लिए बिना शर्त और दिल से माफी मांगता हूं." इसके साथ ही उन्होंने न्याय दिलाने की व्यवस्था में कानून से जुड़े लोगों की अहम भूमिका को भी स्वीकार किया.
'मेरा व्यवहार अनुचित, अयोग्य था'
उन्होंने पत्र में आगे कहा कि इस घटना के बाद जब मैंने आत्म-मंथन किया तो मुझे ये एहसास हुआ कि मेरा व्यवहार गरिमा, कर्तव्यों और अनुशासन के अनुरूप वैसा नहीं था, जैसे कि एक पुलिस अधिकारी से अपेक्षा की जाती है. मेरा व्यवहार अनुचित, अयोग्य और बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण था, जिसके लिए मुझे बहुत दुख है.
वकीलों और पुलिस के टकराव का वीडियो
बता दें कि वकीलों और पुलिस के टकराव के कई वीडियो गुरुवार रात सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुए थे. एक वीडियो में कुछ वकील प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर पुलिसकर्मियों से उलझते हुए दिखे. बाद में एक अन्य वीडियो में हेड कांस्टेबल वकीलों से माफी मांगते हुए दिखाई दिए.
NDTV ने उन वकीलों से बात की, जो घटना के समय वहां मौजूद थे. वकील उमेश कुमार ने कहा कि 23 जुलाई को शाम करीब 4 बजे उनको पता चला कि तीन छात्रों को लोधी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया है. वे वकील रजनीश कुमार, एक महिला वकील और तीन अन्य वकीलों के साथ कानूनी मदद देने के लिए वहां पहुंचे. शाम करीब 6.30 बजे उन्होंने ड्यूटी ऑफिसर से छात्रों के बारे में पूछा. उन्होंने PSI राकेश से संपर्क करने को कहा, लेकिन उन्होंने कॉल का जवाब नहीं दिया. हमने बार-बार दूसरे पुलिस अधिकारियों से SHO से मिलने देने की अपील की लेकिन करीब डेढ़ घंटे इंतजार करने के बाद, हमें SHO रविंदर कुमार त्यागी से मिलने का मौका मिला. उन्होंने कैमरे पर छात्रों को हिरासत में लिए जाने की बात से इनकार किया और हमसे पुलिस स्टेशन से जाने को कहा.
प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लिया
थोड़ी देर बाद, तीन महिला वकीलों ने बताया कि वे पुलिस स्टेशन के अंदर तीनों छात्रों से मिली थीं और उन्हें वाकई हिरासत में रखा गया था. ये सुनकर हम हैरान रह गए. वकीलों ने पुलिस से छात्रों को रिहा करने की अपील की और तर्क दिया कि न तो उनके परिवारों को सूचना दी गई थी और न ही वकीलों को उनसे मिलने दिया गया था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को उनकी हिरासत की वजहों के बारे में नहीं बताया गया था.
पुलिसकर्मियों ने वकीलों से की बदसलूकी
उमेश कुमार ने कहा कि रात करीब 9 बजे उन्होंने फिर से छात्रों को रिहा करने की अपील की, तब SHO ने हेड कॉन्स्टेबल और अन्य अधिकारियों को हमें पुलिस स्टेशन से हटाने का निर्देश दे दिया. पुलिसकर्मियों ने वकीलों और मौके पर मौजूद एक महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की. उन्होंने कहा कि बाद में तीन छात्रों समेत हिरासत में लिए गए 21 लोगों को रिहा कर दिया गया. वकीलों का कहना है कि घटना के वीडियो वायरल होने के बाद कानूनी बिरादरी के वरिष्ठ सदस्यों ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद हेड कॉन्स्टेबल ने लिखित माफीनामा जारी किया.
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