दिल्ली-NCR में तीन दिन यानी 21,22 और 23 मई को ट्रक और माल ढुलाई की गाड़ियों ने चक्का जाम करने का ऐलान कर दिया है. ग्रीन सेस में लगातार बढोत्तरी के खिलाफ ट्रांसपोर्टर्स का चक्का जाम गुरुवार से शुरु हो चुका है. दिल्ली-NCR की करीब 16 लाख से ज्यादा गाड़ियां फल,सब्जी,दूध और जरूरी सामान लेकर दिल्ली में आते हैं. आल इंडिया गुड्स ट्रांसपोर्टर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाक्टर हरीश सभरवाल ने बताया कि हमारी अलग अलग टीमें दिल्ली के कई जगहों पर तैनात हैं जहां हड़ताल को हम सुनिश्चित करा रहे हैं.
दिल्ली की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी पर असर
दिल्ली की सबसे बड़ी सब्जी और फल मंडी में रोजाना करीब 7000 गाड़ियां आती है. डाक्टर हरीश सभरवाल का कहना है कि बुधवार-गुरुवार रात को जो गाड़ियां आ गईं उनसे हो सकता है कि गुरुवार को इतना असर न दिखे. लेकिन शुक्रवार और शनिवार इसका असर दिखेगा, क्योंकि गुरुवार से पूरी तरह ट्रकों का दिल्ली में घुसना बंद होगा जिससे जरूरी चीजों की किल्लत हो सकती है. आजादपुर मंडी में फल के कारोबारी विनय कुमार दुआ बताते हैं कि आमतौर पर इतना सन्नाटा आजादपुर में नहीं रहता है. ट्रांसपोर्टर के हड़ताल का असर दिख रहा है गुरुवार को कम गाड़ियां आई हैं.

ग्रीन सेंस के नाम पर 1753 करोड़ इकट्ठा किया
दिल्ली में किसी भी कमर्शियल गुड्स गाड़ी अगर आती है तो उसे ग्रीन टैक्स देना पड़ता है ये अलग-अलग गाड़ियों पर अलग-अलग लगता है.ऑल इंडिया गुड्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ हरीश सभरवाल का कहना है कि ग्रीन सेंस के नाम पर सरकार ने 1753 करोड़ रुपये इकट्ठा किए. लेकिन खर्च महज 715 करोड़ किया. सरकार 900 करोड़ रुपये भी खर्च कर नहीं पाई. इसके बाद भी ट्रकों पर ग्रीन सेंस इस साल फिर लगा दिया गया. ऐसे तो ट्रांसपोर्टर तबाह हो जाएगा. सरकार बताए कि ग्रीन सेस उन्होंने कहां कहां खर्च किया और उससे क्या प्रदूषण में कमी आई. ट्रांसपोर्टर का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ाने से हम नाराज नहीं हैं लेकिन जो टोल और ग्रीन सेस के नाम पर हमसे अतिरिक्त पांच से छह हजार रुपये वसूला जा रहा है वो गलत है.

क्या है ग्रीन सेस?
ग्रीन सेस (Green Cess), जिसे दिल्ली में आधिकारिक तौर पर इन्वायरमेंट कंपनसेशन चार्ज (Environment Compensation Charge - ECC) या पर्यावरण मुआवजा शुल्क कहा जाता है, एक प्रकार का पर्यावरण टैक्स है. इसमें हल्के वाहनों पर 1400 से ग्रीन टैक्स बढ़ाकर इस साल 2000 कर दिया गया जबकि भारी वाहन पर 2600 रुपये से बढ़ाकर 4000 कर दिया गया. इसी के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों में नाराजगी है.
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