- दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे दिसंबर में वाहनों के लिए खोलने की संभावना है, पांचवें चरण का निर्माण कार्य तेज है
- चिपियाना रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण में देरी की वजह से एक्सप्रेस-वे का काम अब तक लटका हुआ है
- एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर नजीबाबाद, बिजनौर और पौड़ी तक बेहतर कनेक्टिविटी देगा
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे दिसंबर में वाहनों के लिए खोले जाने की उम्मीद जताई जा रही है, वैसे तो यह पहले ही शुरू हो चुका है लेकिन इसके पांचवें चरण का निर्माण कार्य साढ़े चार साल से अटका हुआ है. साल के अंत कर इसके पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके शुरू होने से आसपास के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी. इसके निर्माण कार्य का एनएचएआई के अधिकारी लगातार जायजा ले रहे हैं. अथॉरिटी का पूरा फोकस नरहेड़ा में चिपियाना रेलवे ओवर ब्रिज का काम जल्द पूरा करने पर है. इसकी वजह से ही एक्सप्रेसवे के काम में देरी हो रही है. ओवरब्रिज के लिए 2 हजार मीट्रिक टन स्टील प्लेट्स खरीदी गई हैं.
रेलवे ओवर ब्रिज साउथ साइड इंडस्ट्रियल एरिया को एनएच-9 को जोड़ेगा. रेलवे क्रॉसिंग पर ये रेलवे ओवर ब्रिज बनाया जा रहा है. इसके लिए पिलर का काम पूरा हो चुका है. गार्डर डालने का काम जल्द शुरू होने को है. इसके लिए पहले रेल मंत्रालय से रेलवे ट्रैक बंद करने की परमिशन ली जाएगी. इसी की वजह से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के काम में देरी हो रही है. यह एक्सप्रेसवे मेरठ-बुलंदशहर हाईवे से जुड़ेगा.
दिल्ली से नजीबाबाद, बिजनौर, पौड़ी जाना होगा आसान
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का पांचवां चरण 14.4 किलोमीटर लंबा है. यह मेरठ के बिजौली गांव, जहां गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होता है, वहां से 9 किमी की दूरी पर ही उतर रहा है. इसके पूरा होने से मेरठ के साथ ही दिल्ली से नजीबाबाद, बिजनौर, उत्तराखंड के पौड़ी की ओर जाना बहुत आसान हो जाएगा. दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे 85 किलोमीटर लंबा होगा. एक्सप्रेस-वे शुरू होने से इस पर दिल्ली-मेरठ आने-जाने वाले हर दिन करीब 1 लाख वाहनों के दौड़ने का अनुमान जताया गया है.
प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का काम 87 प्रतिशत और चौथे चरण का 78 प्रतिशत पूरा हो चुका है. चिपियाना ओवरब्रिज के साथ ही यूपी गेट से डासना तक के प्रोजेक्ट का काम 95 प्रतिशत पूरा हो गया है. वहीं टोल प्लाजा का काम अंतिम चरण में है. इसके लिए 31 दिसंबर तक की डेडलाइन रखी गई है.
चिपियाना रेलवे ओवरब्रिज
चिपियाना रेलवे ओवरब्रिज की मांग लंबे समय से उठ रही थी. दरअसल इस क्रॉसिंग पर दिल्ली-हावड़ा लाइन पर करीब 200 ट्रेनें गुजरती हैं.इसके शुरू होते होते ही ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक बिना रोकटोक जाया जा सकेगा.
- रेलवे ओवर ब्रिज की लंबाई 600 मीटर और चौढ़ाई 9.5 मीटर
- इनबाउंड और आउटबाउंड ट्रैफिक के लिए दो लेन की सुविधा
- रेलवे ओवर ब्रिज बनाने में 32 करोड़ रुपये हो रहे खर्च
- इसे बनाने का खर्च सरकार और रेलवे आधा-आधा वहन करेंगे
ओवर ब्रिज से क्रॉसिंग रिपब्लिक को सबसे ज्यादा फायदा
इस ओवर ब्रिज के बनने से क्रॉसिंग रिपब्लिक में रहने वालों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. इसके बनने के बाद लोगों को जीटी रोड से एनएच-9 पर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. एक बार यह ओवरब्रिज खुल गया तो लोग सिल्वर सिटी के पीछे से ब्रिज पर बढ़ते हुए चिपियाना फाटक से ऊपर से होते हुए कॉन्टिनेंटल कार्बन फैक्ट्री के सामने पहुंच सकेंगे. फिर यहां से अंडरपास से होकर एबीईएस कॉलेज के सामने सर्विस लेन से होते हुए क्रॉसिंग की तरफ के रोड पर जा सकेंगे. वहीं जो वाहन क्रॉसिंग की तरफ से आते हैं डूंडाहेडा अंडरपास से होकर सीधे कॉब्रन फैक्ट्री के सामने से होते हुए ओवरब्रिज पर चढ़कर जीटी रोड पहुंच जाएंगे.
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