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ज्यूडिशियरी के खिलाफ की 'तानाशाही' वाली टिप्पणी, दिल्ली HC ने यूट्यूबर को 6 महीने के लिए जेल भेजा

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने कहा कि यूट्यूबर गुलशन पाहूजा ने अपने व्यवहार से न तो कोई पछतावा दिखाया और न ही उनमें किसी सुधार की उम्मीद नजर आ रही है. अगर उन्हें दंडित नहीं किया गया तो उनका हौसला और बढ़ सकता है.

ज्यूडिशियरी के खिलाफ की 'तानाशाही' वाली टिप्पणी, दिल्ली HC ने यूट्यूबर को 6 महीने के लिए जेल भेजा
दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर को 6 महीने के लिए जेल भेजा.
  • दिल्ली HC ने यूट्यूबर और वकील गुलशन पाहुजा को ज्यूडिशियरी को बदनाम करने के आरोप में 6 महीन जेल की सजा सुनाई है
  • कोर्ट ने पाया कि उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को निशाना बनाकर अपमानजनक वीडियो बनाकर कोर्ट के अधिकार को कम आंका
  • यूट्यूबर ने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रणाली से न्याय की कोई उम्मीद नहीं, अदालतों की मनमर्जी तानाशाही है
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नई दिल्ली:

दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूबर और वकील गुलशन पाहुजा को ज्यूडिशियरी को बदनाम करने के आरोप में  छह महीने की जेल की सजा सुनाई है. उन पर न्यायिक अधिकारियों को निशाना बनाकर वीडियो बनाने और अदालतों के अधिकार को कम करने का आरोप है. उनको अवमानना के मामलों में दोषी पाया गया है.

कोर्ट ने आदेश में कहा कि उन्होंने पाया है कि अपनी मौखिक दलीलों के दौरान यूट्यूबर ने फिर से अपमानजनक टिप्पणियां कीं, जैसे कि उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय न्यायिक प्रणाली से न्याय की कोई उम्मीद नहीं है और कहा कि अदालतों की मनमर्ज़ी बढ़ती जा रही है और वह कोई न्याय की उम्मीद नहीं कर रहे. यह भी कहा, मनमर्ज़ी का दूसरा अर्थ? तानाशाही होता है.

दंडित नहीं किया तो हौसला और बढ़ेगा

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने कहा कि यूट्यूबर गुलशन पाहूजा ने अपने व्यवहार से न तो कोई पछतावा दिखाया और न ही उनमें किसी ‘सुधार' की उम्मीद नजर आ रही है. अगर उन्हें दंडित नहीं किया जाता है तो उनका हौसला बढ़ सकता है. वह न्यायालय के सामने और भी अपमानजनक बयान देकर अपनी अवमानना ​​को और बढ़ा रहे हैं. 

न कोई पछतावा, न ही दया के पात्र

पीठ ने पाया कि वास्तव में, पाहूजा का मानना है कि उन्होंने जो कुछ भी किया वह न्यायिक प्रणाली को सुधारने के इरादे से किया था. वह इस अदालत के समक्ष और अधिक अपमानजनक दलीलें पेश करके अपनी अवमानना को और बढ़ा रहे हैं और  इस प्रकार, स्पष्ट रूप से, न तो उन्हें कोई पछतावा है और न ही वह किसी दया के पात्र हैं.

गुलशन पाहूजा को 6 महीने का साधारण कारावास

अदालत ने 16 मई को दिए गए अपने आदेश में कहा, "हमारा मानना है कि ये मामले अवमाननाकर्ता पर अधिकतम सजा लगाने के लायक हैं. इसलिए, हम अवमाननाकर्ता यानी गुलशन पाहूजा पर इनमें से प्रत्येक मामले में छह-छह महीने की अवधि के लिए साधारण कारावास के साथ 2000 रुपये का जुर्माना लगाते हैं. हालांकि, यह सजा साथ-साथ चलेगी."

सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खरटखटा सकते हैं

चूंकि अवमाननाकर्ता इस फैसले को चुनौती देना चाहते हैं इसलिए अदालत उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने में सक्षम बनाने के लिए 60 दिनों के लिए सजा निलंबित करती है. अदालत ने पाहूजा से कहा कि अगर सर्वोच्च न्यायालय उसके फैसले पर रोक नहीं लगाता है तो पाहूजा 60 दिनों के बाद महापंजीयक के समक्ष आत्मसमर्पण कर दें. 

आपराधिक अवमानना के दोषी यूट्यूबर गुलशन पाहुजा

पीठ ने यूट्यूबर को अदालत की आपराधिक अवमानना का दोषी पाते हुए 21 अप्रैल को कहा था कि उनके चैनल ‘‘फाइट 4 ज्यूडिशियल रिफॉर्म्स'' की विषय-वस्तु संविधान के तहत ‘अभिव्यक्ति की आजादी' के रूप में संरक्षित नहीं थी. बता दें कि  यूट्यूबर्स ने अदालत में पेशी के दौरान फिर से कहा कि अदालतों की मनमर्जी बढ़ती जा रही है और मैं कोई न्याय की उम्मीद नहीं कर रहा' और यह भी कहा कि 'मनमर्जी का दूसरा मतलब तानाशाही होता है.

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