दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं क्लास के वेरिफिकेशन पोर्टल को फिर से खोलने के लिए तुरंत निर्देश जारी करने से इनकार कर दिया है. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन की वेकेशन बेंच ने एनएसयूआई (NSUI) की ओर से दायर PIL पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया है. SGI तुषार मेहता ने कहा कि ऐसे निर्देश जारी करने से परीक्षा में शामिल हुए 17.8 लाख छात्रों पर असर पड़ेगा क्योंकि उनके नतीजे में देरी हो सकती है. दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा, छात्र व्यक्तिगत रूप से आएं. हम नहीं चाहते कि नतीजों में देरी हो. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए इसे रोस्टर बेंच के सामने सूचीबद्ध किया है.
क्या है पूरा मामला
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की है. जिसमें 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के नए शुरू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर चिंता जताई गई है. छात्र संगठन ने वेरिफिकेशन प्रोसेस को फिर से शुरू करने, विवादित मामलों में आंसर शीट की मैनुअल चेकिंग और डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम के कामकाज की स्वतंत्र जांच की मांग की है.
केंद्र सरकार और CBSE से मांगा गया था जवाब
हाल ही में इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और सीबीएसई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम में आई तकनीकी खामियों और गड़बड़ियों के कारण हजारों छात्रों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई छात्रों की आंसर स्क्रिप्ट गायब बताई जा रही हैं, कुछ धुंधली हैं, तो कुछ की गलत तरीके से जांच की गई है. एनएसयूआई ने याचिका में मांग की है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में हुई सभी गड़बड़ियों की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए. साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा उपाय, प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देश तैयार किए जाएं.
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