दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है. हवा की गुणवत्ता 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का दूसरा चरण लागू कर दिया है. इसके तहत धूल प्रदूषण रोकने के उपाय तेज किए जाएंगे, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा और पार्किंग शुल्क भी बढ़ाए जाएंगे.
सीएक्यूएम की ओर से 2 नवंबर को जारी आदेश में कहा गया है कि पिछले कुछ दिनों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है. 31 अक्टूबर को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 117 था, जो 1 नवंबर को बढ़कर 261 हो गया. इसके बाद सोमवार को प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियों के कारण AQI और बढ़कर 324 पर पहुंच गया. AQI का यह स्तर 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है.
ग्रैप-2 में किन चीजों पर रहेगी पाबंदी?
ग्रैप-2 के तहत प्राइवेट गाड़ियों के इस्तेमाल को कम करने के लिए पार्किंग फीस में बढ़ोतरी, सीएनजी-इलेक्ट्रिक बसों और मेट्रो की सर्विस को बढ़ा दिया गया है. इसके साथ प्रदूषण कम हो इसके लिए रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन अपने सोसाइटी में कूड़ा और किसी भी प्रकार की लकड़ी जलाने पर नजर रखना होगा और डीजल जनरेटर पर पाबंदी होगी. इस दौरान केवल नेचुरल गैस, बायो गैस, एलपीजी से चलने वाले जनरेटर ही चला सकते हैं. 800 किलोवॉट से ज्यादा क्षमता वाले जनरेटर को केवल रेट्रोफिटिंग के दौरान ही चलाए जाएंगे. चिन्हित सड़कों डेली बेसिस पर मैकेनिकल/वैक्यूम स्वीपिंग और पानी का छिड़काव आवश्यक है .
प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए लिया गया फैसला
आयोग ने बताया कि मौसम विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रदूषण के और बढ़ने की आशंका है. इसी वजह से GRAP के दूसरे चरण को पूरे एनसीआर में तत्काल प्रभाव से लागू करने का फैसला लिया गया है.
GRAP-II लागू होने के बाद संबंधित एजेंसियों को सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल पर सख्ती से नियंत्रण करने, सफाई और पानी के छिड़काव को बढ़ाने, खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने पर नजर रखने तथा सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाने होंगे. इसके अलावा लोगों को निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
सीएक्यूएम ने कहा है कि वह दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता की लगातार निगरानी करेगा और हालात के मुताबिक आगे के कदमों पर फैसला लिया जाएगा. यदि प्रदूषण का स्तर और बढ़ता है तो GRAP के अगले चरणों को भी लागू किया जा सकता है.
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