- दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में चार साल पहले भी इसी तरह का एक हादसा हुआ था.
- तब एक निर्माणाधीन इमारत गिर गई थी. इस हादसे में 2 मजदूरों की मौत हुई थी.
- दिल्ली में इस तरह के कई इमारत हादसे हो चुकी है. जिनकी फेहरिस्त लंबी है.
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक बहुमंजिला इमारत के अचानक ढह जाने के बाद कई लापरवाहियां सामने आई हैं. खास बात यह है कि दिल्ली में यह कोई पहला मौका नहीं है, जब किसी रिहायशी इलाके में इस तरह से बिल्डिंग गिरने से इतना बड़ा हादसा हुआ है. चार साल पहले सत्य निकेतन इलाके में ही एक इमारत गिरी थी, लेकिन उससे कोई सबक नहीं लिया गया. इसके अलावा दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में भी पिछले कुछ सालों में कई इमारतें गिरी हैं, जिसमें लोगों की जान भी गई है. लेकिन जर्जर और अवैध रूप से बनाई गई इमारतें सालों तक खड़ी रहती हैं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया जाता है. दिल्ली में इस तरह से हादसे कब-कब हुए हैं, इसकी लंबी फेहरिस्त है.
चार साल पहले यही गिरी थी इमारत
दिल्ली के जिस सत्य निकेतन इलाके में यह इमारत गिरी है, चार साल पहले 25 अप्रैल 2022 में इसी तरह का हादसा हुआ था. तब एक पुरानी तीन मंजिला इमारत अवैध मरम्मत के दौरान गिर गई थी. जिसमें दो मजदूरों की जान गई थी. उस समय भी नगर निगम की तरफ से नोटिस दिए जाने बाद भी काम नहीं रोकने का मामला सामने आया था. ऐसे में चार साल बाद उसी इलाके में फिर इमारत का गिरना बताता है कि पुराने हादसे से कोई सबक नहीं लिया गया.
रोहिणी में गिरी थी इमारत
8 जुलाई 2026 को दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 में भी ऐसा ही हादसा हुआ था. भारी बारिश के बीच एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत ढह गई. मलबे में दबकर तीन मजदूरों की मौत हो गई. शुरुआती तौर पर लगातार हुई भारी बारिश को भी हादसे की वजहों में शामिल किया गया. मजदूरों को अस्पताल भी पहुंचाया गया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका.
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साकेत में हादसा
30 मई 2026 को दिल्ली के साकेत जो सैदुलाजाब इलाके में एक पांच मंजिला इमारत पास बनी कैंटीन पर जा गिरी. इस हादसे में छह लोगों की मौत हुई. जांच में अवैध निर्माण का मुद्दा सामने आया था. हादसे के समय शनिवार होने के कारण संबंधित कार्यालय बंद थे, लेकिन कैंटीन में काफी लोग थे. इस घटना में कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. जांच में इमारत में कथित अनधिकृत निर्माण और अतिरिक्त निर्माण से जुड़े सवाल भी सामने आए.
पहाड़गंज में धंस गया था बेसमेंट
दिल्ली के पहाड़गंज में 17 मई 2025 को एक निर्माणाधीन इमारत का बेसमेंट धंस गया था. इस हादसे में भी तीन मजदूरों की मौत हुई थी. तेज आंधी और बारिश की वजह से ढही इस इमारत में भी कई लापरवाही सामने आई थी. भारी बारिश ने दीवार को कमजोर कर दिया था और फिर वह ढह गई
मुस्तफाबाद में 11 लोगों की मौत
इसके अलावा अप्रैल 2025 में दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके में चार मंजिला इमारत ढहने से 11 लोगों की मौत हो गई थी. यह हादसा दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा और अनधिकृत निर्माण पर सबसे गंभीर सवालों में से एक बनकर सामने आया. हादसे के बाद अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की बातें हुईं, लेकिन सवाल फिर वही था. जब कोई इमारत अवैध तरीके से बन रही होती है, जब उसकी मंजिलें बढ़ाई जा रही होती हैं. लेकिन तब ध्यान नहीं दिया जाता.
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2021 में भी हुई थी बड़ी घटना
दिल्ली में सितंबर 2021 में भी इसी तरह की घटना सामने आ चुकी है. सब्जी मंडी-मलका गंज में पुरानी जर्जर इमारत गिरने से दो बच्चों की मौत हुई थी. इस घटना में भी लापरवाही का मामला ही सामने आया था. इसी तरह 2011 में पुरानी दिल्ली के चांदनी महल इलाके में पास के प्लॉट में बेसमेंट की खुदाई के दौरान सटी हुई चार मंजिला इमारत गिर गई थी, जिसमें सात लोगों की मौत हुई. नवंबर 2010 में लक्ष्मी नगर के ललिता पार्क में पांच मंजिला अवैध इमारत गिरने से 71 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे.
दिल्ली के हादसों से क्यों नहीं लिया जाता सबक
दिल्ली में लगातार हो रहे हादसों सबक क्यों नहीं लिया जाता है. क्योंकि इन घटनाओं को केवल प्राकृतिक आपदा, बारिश या पुरानी इमारत की कमजोरी बताकर खत्म कर देना पर्याप्त नहीं होगा. सत्य निकेतन में हुई इस घटना ने एक बार फिर सवालियां निशान खड़े कर दिए हैं.
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