विज्ञापन

कहीं दीवार ढही, कहीं गड्ढे पड़े... 4 साल में 67 हाईवे-एक्सप्रेसवे में खामियां; सरकार ने क्या एक्शन लिया?

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर गड्ढों का वीडियो सामने आने के बाद NHAI ने इंजीनियर और प्रोजेक्ट मैनेजर को सस्पेंड कर दिया है.

कहीं दीवार ढही, कहीं गड्ढे पड़े... 4 साल में 67 हाईवे-एक्सप्रेसवे में खामियां; सरकार ने क्या एक्शन लिया?
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर गड्डों का वीडियो वायरल हुआ था.
नई दिल्ली:

दिल्ली से देहरादून तक 6 घंटे की बजाय सिर्फ 2.5 घंटे में ही पहुंचा जा सके, इसके लिए 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था. लेकिन महज दो महीनों के भीतर ही एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के धंसने का मामला सामने आया. 

इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसके बाद जमकर बवाल हुआ. मामले को लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सफाई देते हुए कहा कि 30 जून की रात को ज्यादा बारिश होने के कारण पानी जम गया था और स्थानीय लोगों के विरोध के कारण अब तक ड्रेनेज सिस्टम शुरू नहीं हो पाया, जिस कारण एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंस गया.

इस घटना के बाद NHAI ने कार्रवाई करते हुए एक इंजीनियर और ठेकेदार के प्रोजेक्ट मैनेजर को सस्पेंड कर दिया है. इन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं.

एक्सप्रेसवे का हिस्सा धंसने के बाद उसकी मरम्मत कर दी गई है. NHAI ने बताया कि मरम्मत के बाद एक्सप्रेसवे को सामान्य ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया है.

पूरा मामला क्या है?

  • हुआ क्या था: 30 जून की रात को जमकर बारिश हुई, जिस कारण 1 जुलाई को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा धंस गया था.

  • लेकिन धंसा कैसे: NHAI ने बताया कि बारिश के पानी को ले जाने के लिए क्रॉस ड्रेनेज सिस्टन बनाया है, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण चालू नहीं किया जा सका. इस कारण पानी जम गया और एक हिस्सा धंस गया.
  • विरोध क्यों: NHAI के मुताबिक, स्थानीय लोग ड्रेनेज सिस्टम जोड़ने नहीं दे रहे हैं और गाड़ियों से आने-जाने में कर रहे हैं. जमीन से जुड़ा एक विवाद भी कोर्ट में है, जिस कारण नाली नहीं बन पाई है.
  • इसका उपाय क्या: NHAI का कहना है कि 1.5 KM लंबी अस्थाई नाली बना रहे हैं, ताकि पानी निकल सके. NHAI लगातार निगरानी कर रहा है.

ये पहला मामला तो नहीं है...!

जिस समय दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का मामला सामने आया, उसी वक्त मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर भी एक बड़ा गड्ढा होने की खबर सामने आई. 

महाराष्ट्र के पालघर में मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर बारिश के कारण एक बड़ा गड्ढा बन गया. गड्ढा इतना बड़ा था कि इससे गुजरने वाली गाड़ियों के टायर फट गए. 10-12 गाड़ियों के टायर फटने की खबर है. वहीं, 10 मिनट के अंदर 15 से ज्यादा गाड़ियों का एक्सीडेंट हो गया.

ये दो तो ऐसे मामले हैं, जो दो-तीन दिन के अंदर ही चर्चा में आए हैं. लेकिन सरकार ने खुद संसद में माना है कि 4 साल के दौरान 60 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जब नए-नए बने हाईवे प्रोजेक्ट पर फ्लाईओवर या ब्रिज के ढहने, सड़क धंसने या टूटने या फिर कंस्ट्रक्शन जुड़ी खामियां सामने आई हैं.

इसी साल 1 अप्रैल को केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया था कि '4 साल के दौरान 67 प्रोजेक्ट के लिए फ्लाईओवर और पुलों सहित NH स्ट्रेच पर ढहने या बड़ी कमियों या सड़क में खराबी की सूचना मिली है.'

Latest and Breaking News on NDTV

इसका मतलब, सरकार ने खुद इस बात को माना था कि हाईवे और एक्सप्रेसवे पर पुल के गर्डर गिर गए तो कहीं रिटेनिंग वॉल ढह गई, कहीं कंक्रीट में दरारें पड़ीं तो कहीं सुरंग का हिस्सा ढह गया और कुछ मामलों में डिजाइन की खामी भी मिली.

सरकार ने उन 67 खामियों के बारे में डिटेल में बताया था. इसके मुताबिक, कई जगहों पर खराब कंस्ट्रक्शन के मामले सामने आए. उदाहरण के तौर पर, राजस्थान के नागौर में जोधपुर-अजमेर रोड पर खराब काम के कारण आरओबी के डेक स्लैब में हनी कॉम्बिंग की वजह से स्ट्रक्चरल खराबी देखी गई. इसी तरह, इसी साल पश्चिम बंगाल में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे हाईवे के एक हिस्से पर RE दीवार ढह गई थी.

तो सरकार ने क्या एक्शन लिया?

नए-नए बने इन हाईवे और एक्सप्रेसवे पर आई इन खराबियों के कारण सरकार ने ठेकेदारों पर कार्रवाई की. 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के जवाब के मुताबिक, कुछ मामलों में ठेकेदारों पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया गया तो कुछ ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. कुछ ठेकेदारों को डिबारमेंट यानी भविष्य में बोली लगाने से रोक दिया गया तो किसी का ठेका ही खत्म कर दिया गया. कई मामलों में करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया गया.

गुजरात के सांचोर-सांतलपुर प्रोजेक्ट पर कई जगहों पर गड्ढे और दरारें आने के बाद सरकार ने 2.8 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. साथ ही NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया था.

_annex_270_AU4246_iGdIIH (1) by priyank.kumar.dwivedi

इसी तरह भोपाल-बियोरा हाईवे पर समय से पहले सड़क खराब होने पर सरकार ने ठेकेदार पर 119 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. साथ ही ठेकेदार को ही अपने खर्चे पर उसे ठीक करवाया गया.

इसके अलावा, लापरवाही और सही ढंग से काम न कर पाने के कारण 11 अफसरों को नौकरी से बर्खास्त किया गया है और 11 के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है.

क्यों जरूरी है अच्छे हाईवे?

मोदी सरकार में सड़कों का जाल अच्छा-खासा बढ़ा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014 तक देश में हाई स्पीड कॉरिडोर या एक्सप्रेसवे की लंबाई सिर्फ 93 किलोमीटर थी. अब यह बढ़कर 3,052 किलोमीटर हो गई है. 

इसी तरह 2014 तक 4 लेन या उससे ज्यादा के नेशनल हाईवे की लंबाई 18,371 किमी थी जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर 48,568 किमी हो गई है. 

हाईवे और एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की चलने की रफ्तार काफी तेज होती है. इस कारण सड़क हादसों का भी खतरा बना रहता है. आंकड़ों की मानें तो हाईवे पर हर साल औसनत 1.50 लाख सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 60 हजार लोगों की जान चली जाती है. 2024 में ही हाईवे पर 1.50 लाख से ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 64,772 लोगों की मौत हो गई थी.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Delhi Dehradun Expressway, Delhi Dehradun Expressway Accident, Highway, National Highway Projects, Expressways Construction
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com