विज्ञापन

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उद्घाटन से पहले 100 किलो फूल से सजा डाटकाली मंदिर, पीएम मोदी करेंगे दर्शन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अप्रैल को दिल्ली‑देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे. इस दौरान पीएम डाटकाली सिद्धिपीठ मंदिर में विशेष पूजा करेंगे, जिसके लिए वृंदावन और पश्चिम बंगाल से 100 किलो फूल मंगाए गए हैं.

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उद्घाटन से पहले 100 किलो फूल से सजा डाटकाली मंदिर, पीएम मोदी करेंगे दर्शन
दिल्ली से देहरादून का सफर जल्द सुहाना
  • पीएम मोदी 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे जो दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड को जोड़ेगा
  • एक्सप्रेसवे पर एशिया का सबसे लंबा 12 किलोमीटर लंबा ग्रीन एलिवेटेड कॉरिडोर राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर बनाया गया
  • एक्सप्रेसवे से दिल्ली से देहरादून का सफर ढाई से तीन घंटे में पूरा होगा और यातायात और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

पीएम मोदी 14 अप्रैल को दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे. दिल्ली से यूपी और उत्तराकंड को कनेक्ट करने वाला यह एक्सप्रेसवे देश की बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल है. प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ने वाला एक अहम अवसर माना जा रहा है. उद्घाटन के साथ ही यह एक्सप्रेसवे आम जनता को समर्पित किया जाएगा. इससे राजधानी दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा सुगम होगी. कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां चल रही हैं.

ग्रीन एलिवेटेड कॉरिडोर से मंदिर तक यात्रा

पीएम मोदी अपने प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत हेलीकॉप्टर से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के गणेशपुर पहुंचेंगे. इसके बाद वह सड़क मार्ग से एशिया के सबसे लंबे ग्रीन एलिवेटेड कॉरिडोर से होते हुए देहरादून सीमा पर स्थित मां डाटकाली सिद्धिपीठ मंदिर जाएंगे. इस ग्रीन एलिवेटेड कॉरिडोर की लंबाई करीब 12 किलोमीटर है. प्रधानमंत्री मंदिर में 15 से 20 मिनट पूजा‑अर्चना और दर्शन करेंगे. इसके बाद वह देहरादून के घड़ी कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड में जनसभा को संबोधित करेंगे.

Latest and Breaking News on NDTV

ये भी पढ़ें : दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन की तारीख का ऐलान, PM मोदी करेंगे आगाज

इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे को भारत की इंजीनियरिंग का खूबसूरत नमूना बताया जा रहा है. इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद दिल्ली से देहरादून का सफर ढाई से तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा. पूरे प्रोजेक्ट में आधुनिक सुविधाओं का ध्यान रखा गया है. एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है. यह परियोजना यातायात के साथ‑साथ पर्यटन को भी बढ़ावा देगी. आम लोगों के लिए यह एक्सप्रेसवे बड़ी राहत साबित होगा.

राजाजी पार्क के ऊपर ग्रीन कॉरिडोर

इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत एशिया का सबसे लंबा ग्रीन एलिवेटेड कॉरिडोर है. यह करीब 12 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर राजाजी टाइगर नेशनल पार्क के ऊपर से गुजरता है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों की आवाजाही में कोई बाधा न आए. कॉरिडोर के नीचे हाथी, बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्यजीव आसानी से आ‑जा सकते हैं. पूरे एक्सप्रेसवे पर सीसीटीवी कैमरे, सोलर लाइट और हरियाली का विशेष ध्यान रखा गया है.

मंदिर में विशेष पूजा और तैयारियां

प्रधानमंत्री मोदी मां डाटकाली सिद्धिपीठ मंदिर में विशेष ‘आव्हान पूजा' करेंगे. इस दौरान मंदिर के महंत और पुजारी भी मौजूद रहेंगे. मंदिर प्रबंधन पर्यवेक्षक शुभम गोस्वामी ने बताया कि पीएम का कार्यक्रम प्रस्तावित है, लेकिन समय की औपचारिक जानकारी अभी नहीं दी गई है. पीएम मंदिर में 15 से 20 मिनट रुकेंगे. मंदिर और आसपास के क्षेत्र में विशेष सजावट की जा रही है. देवी‑देवताओं और फूलों की चित्रकारी भी की गई है.

100 किलो फूलों से सजी डाटकाली

प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए मां डाटकाली सिद्धिपीठ मंदिर को भव्य रूप से सजाया जा रहा है. मंदिर की बाहरी और अंदरूनी सजावट के लिए करीब 100 किलो फूल मंगाए गए हैं. ये फूल वृंदावन और पश्चिम बंगाल से लाए गए हैं। गेंदे, गुलाब और जैस्मीन के फूलों से मंदिर को सजाया जा रहा है. फिलहाल पीएम मोदी के आने का सटीक समय तय नहीं हुआ है, लेकिन प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर मंदिर प्रशासन पूरी तैयारी में जुटा हुआ है.

Latest and Breaking News on NDTV

मनोकामना सिद्धपीठ की मान्यता

मां डाटकाली सिद्धिपीठ मंदिर को मनोकामना मंदिर भी कहा जाता है. देहरादून ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं, यह एक सिद्धपीठ माना जाता है. नया वाहन खरीदने वाले लोग मंदिर में वाहन पूजा कराने जरूर आते हैं. मंदिर में अखंड ज्योति लगातार जलती रहती है. ऐसी मान्यता है कि मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व काफी पुराना है.

मंदिर से जुड़ा ऐतिहासिक प्रसंग

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, 1804 में जब अंग्रेज देहरादून से दिल्ली तक सड़क बना रहे थे, तब यहां सुरंग बनाने में परेशानी आ रही थी. रात में बनाई गई सुरंग बार‑बार ढह जाती थी. इसी दौरान अंग्रेज इंजीनियर के सपने में मां काली आईं और पिंडी होने की बात कही. इसके बाद पिंडी निकालकर मंदिर स्थापित किया गया. मंदिर बनने के बाद सुरंग का काम पूरा हो सका, यह सुरंग आज भी मौजूद है.

ये भी पढ़ें ; दिल्ली- देहरादून हाईवे बनकर तैयार, 6-7 घंटे का सफर सिर्फ 2.5 घटे में होगा पूरा, जानें कब खुलेगा

210 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे करीब 210 किलोमीटर लंबा है. इस परियोजना पर करीब 11,970 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. एक्सप्रेसवे से सोनीपत, पानीपत, मानेसर, गुरुग्राम, पलवल, बागपत, गाजियाबाद, कुंडली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा जैसे शहर जुड़ेंगे. इसके अलावा चंडीगढ़, अंबाला और यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा तक सीधा कनेक्शन मिलेगा. इस एक्सप्रेसवे में दो प्रमुख नेशनल हाईवे और 10 से ज्यादा स्टेट हाईवे भी जुड़ेंगे.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com