- दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे में एशिया का सबसे लंबा बारह किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा बनाया गया है.
- वन्यजीव गलियारे में आठ पशु मार्ग, दो हाथी अंडरपास और तीन सौ सत्तर मीटर लंबी सुरंग शामिल की गई है.
- परियोजना के दौरान प्रारंभिक अनुमान से कम पेड़ कटे और लगभग तैंतीस हजार आठ सौ चालीस पेड़ सुरक्षित बचाए गए हैं.
- दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के निर्माण में समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिकी संरक्षण पर विशेष ध्यान रखते हुए एशिया का सबसे लंबा 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वन्यजीव गलियारा बनाया गया है. करीब 34 हजार पेड़ों को कटने से बचाने के साथ ही 1.95 लाख पेड़ भी लगाए गए हैं.
- 6 लेन वाले 213 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का अंतिम 20 किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग औक उत्तराखंड के राजाजी बाघ अभयारण्य, देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्र में आता है और इस हिस्से में बनाए गए वन्यजीव गलियारे से जानवरों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी, साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष में भी कमी आएगी.
- गलियारे में आठ पशु मार्ग, हाथियों के लिए दो अंडरपास और डाट काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है. वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ‘साउंड बैरियर' और ‘लाइट बैरियर' जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि शोर और प्रकाश का उन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े.
- परियोजना के निर्माण के दौरान प्रारंभ में 45 हजार पेड़ों की कटाई का अनुमान था, लेकिन वैज्ञानिक तकनीकों के बेहतर उपयोग से केवल 11,160 पेड़ों को ही काटना पड़ा, जबकि 33,840 पेड़ सुरक्षित बचाए गए.
- उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में इस परियोजना के तहत वन भूमि के हस्तांतरण के बदले व्यापक स्तर पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया गया है. कुल 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में 1.95 लाख पौधे लगाए गए हैं.
- उच्चतम न्यायालय की निगरानी समिति के निर्देश पर 40 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि से वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा पारिस्थितिकी बहाली के विभिन्न कार्य भी किए जा रहे हैं. इस संबंध में प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि यह परियोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण है.
- एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय घटकर करीब ढाई घंटे रह जाएगा, जो पहले लगभग पांच से छह घंटे था.
- इस एक्सप्रेसवे में 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), चार प्रमुख पुल और सड़क किनारे 12 जनसुविधाएं विकसित की गई हैं. यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए इसे उन्नत यातायात प्रबंधन प्रणाली (एटीएमएस) से भी सुसज्जित किया गया है.
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आलोक कुमार ठाकुर
Senior Sub Editor
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