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दिल्ली में प्रदूषण खत्म करने वाला उपाय ही बढ़ा रहा मुसीबत, हवा भी खराब और ट्रैफिक में हालत भी

दिल्ली में प्रदूषण के बाद अब लोगों के लिए एक और नई परेशानी बन रही है. बॉर्डर पर सख्त जांच के चलते लंबा जाम लग रहा है और रोजाना सफर करने वाले हजारों लोग घंटों फंस रहे हैं.

दिल्ली में प्रदूषण खत्म करने वाला उपाय ही बढ़ा रहा मुसीबत, हवा भी खराब और ट्रैफिक में हालत भी
दिल्ली में भयंकर ट्रैफिक जाम लग गया है.
  • दिल्ली सरकार ने विंटर एक्शन प्लान के तहत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई है
  • गाजीपुर बॉर्डर समेत कई प्रवेश बिंदुओं पर वाहनों की जांच के कारण लंबी कतारें और ट्रैफिक जाम बन रहे हैं
  • 57 फीसदी लोगों ने वाहन पाबंदी व्यवस्था को खराब बताया और ट्रैफिक प्रबंधन पर असंतोष जताया

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू की गई वाहन पाबंदियों का असर अब सड़कों पर साफ दिखाई देने लगा है. दिल्ली सरकार के विंटर एक्शन प्लान के तहत 1 नवंबर से गैर-BS-VI पेट्रोल और डीजल वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. इस कदम का मकसद वायु प्रदूषण कम करना है लेकिन दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में इससे ट्रैफिक की नई समस्या खड़ी हो गई है.

बॉर्डर पर लंबी कतारों में फंस रहे लोग

दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच के कारण चिल्ला बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर, डीएनडी फ्लाईवे और दूसरे एंट्री पॉइंट्स पर कई किलोमीटर लंबा जाम देखने को मिल रहा है. मंगलवार सुबह भी चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर पर गाड़ियां रेंगती नजर आईं. जांच के दौरान नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहनों को वापस लौटाया गया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं.

इससे पहले मंगलवार सुबह भी ये देखने को मिला, जहां चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर जहां से दिल्ली में एंट्री होती है, यहां से NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में वहां के हालात और लोगों की राय सामने आई है. ट्रैफिक पुलिस की तरफ से वाहनों की BS6 अनुपालन जांच की जा रही थी, जिसके चलते कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया और गाड़ियां रेंगने लगीं. जो वाहन तय मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे, उन्हें वापस लौटा दिया गया. जिसमें 40 मिनट का सफर 80 मिनट में हो रहा था. 

57 फीसदी लोगों ने व्यवस्था को बताया खराब

लोकलसर्किल्स के एक सर्वे में 18,243 लोगों की राय ली गई. सर्वे के अनुसार 57 फीसदी लोगों ने गैर-BS-VI वाहनों की एंट्री रोकने की व्यवस्था को "खराब" या "बहुत खराब" बताया. इनमें 43 फीसदी लोगों का कहना था कि बिना पर्याप्त तैयारी के नियम लागू किए गए, जिससे भारी ट्रैफिक जाम और असुविधा हुई. वहीं 14 फीसदी लोगों ने खराब ट्रैफिक प्रबंधन और पहले से पर्याप्त जानकारी नहीं मिलने को समस्या की वजह बताया.

लाखों वाहन हो रहे प्रभावित

परिवहन विभाग के अनुमान के मुताबिक गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से आने वाले 10 लाख से ज्यादा वाहन इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं. पाबंदी BS-III और BS-IV निजी व व्यावसायिक वाहनों पर लागू है. हालांकि सीएनजी, इलेक्ट्रिक और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को छूट दी गई है.

जाम से बढ़ रहा सफर का समय

दिल्ली आने वाले कई यात्रियों का कहना है कि उनके रोजाना सफर का समय काफी बढ़ गया है. काम पर आने-जाने वाले लोगों को घंटों जाम में खड़ा रहना पड़ रहा है. कुछ लोगों का कहना है कि इससे ईंधन की खपत भी बढ़ रही है और प्रदूषण कम होने के बजाय वाहन लंबे समय तक सड़क पर खड़े रहने से दूसरी तरह की परेशानी पैदा हो रही है.

पहले दिन हुई बड़ी कार्रवाई

दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार पहले दिन 14,930 वाहनों की जांच की गई. इनमें 1,539 वाहनों को बॉर्डर से वापस भेजा गया. नियमों के उल्लंघन पर 127 चालान काटे गए और 62 वाहन जब्त किए गए. इसके अलावा 566 वाहनों पर वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र न होने पर 56.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. पहले दिन कुल 68.4 लाख रुपये की पेनाल्टी वसूली गई.

लोगों का समर्थन लेकिन अमल पर सवाल

सर्वे में सामने आया कि अधिकांश लोग प्रदूषण कम करने के उपायों के खिलाफ नहीं हैं. हालांकि उनका मानना है कि नियमों को लागू करने के तरीके में खामियां हैं. लोगों ने लंबी कतारों, छूट को लेकर भ्रम और ट्रैफिक अव्यवस्था पर चिंता जताई है. कई यात्रियों ने दावा किया कि अब उन्हें दफ्तर पहुंचने के लिए कैब और अन्य विकल्पों पर रोज 500 से 1000 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है.

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