राजधानी में गिरते भूजल स्तर के बीच दिल्ली सरकार ने सरकारी संस्थानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग यानी वर्षा जल संचयन से जुड़े काम तेज करने का दावा किया है. लोक निर्माण और जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने गुरुवार को त्यागराज स्टेडियम में दोबारा चालू की गई वर्षा जल संचयन प्रणाली का निरीक्षण किया. सरकार के मुताबिक, अलग-अलग सरकारी परिसरों में 750 से ज्यादा नई और पुनर्स्थापित वर्षा जल संचयन परियोजनाएं या तो पूरी हो चुकी हैं या उन पर काम चल रहा है.
निरीक्षण के बाद प्रवेश वर्मा ने कहा कि दिल्ली के गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ‘कैच द रेन' का मंत्र दिया है. वर्षा जल संचयन के माध्यम से बारिश का पानी जमीन में समाहित होकर भूजल स्तर को बढ़ाता है, जिससे पूरे वर्ष जल उपलब्धता सुनिश्चित होती है. आज भूजल का दोहन उसकी पुनर्भरण क्षमता से अधिक हो रहा है, जिसके कारण बोरवेल सूख रहे हैं. दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री के इस विजन को मिशन के रूप में अपनाया है और प्रत्येक सरकारी संस्थान को जल संरक्षण का मॉडल बनाने की दिशा में कार्य कर रही है.
1,000 पुरानी प्रणालियों को दोबारा चालू करने का लक्ष्य
दिल्ली सरकार ने सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, अस्पतालों, स्टेडियमों और दूसरे सार्वजनिक संस्थानों में मौजूद 1,000 वर्षा जल संचयन प्रणालियों को दोबारा चालू करने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा 500 नई संरचनाएं बनाने की योजना है.
सरकार का कहना है कि करीब 400 पुरानी प्रणालियों को पुनर्स्थापित किया जा चुका है, जबकि 400 से ज्यादा जगहों पर काम जारी है. इस हिसाब से पुरानी प्रणालियों से जुड़े 800 से अधिक काम पूरे हो चुके हैं या निर्माणाधीन हैं. नई संरचनाओं के मामले में सरकार ने बताया कि करीब 100 का निर्माण पूरा हो चुका है और 250 से ज्यादा जगहों पर काम चल रहा है.
हालांकि, सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में कुल परियोजनाओं की संख्या को लेकर अंतर दिखाई देता है. एक ओर 800 से ज्यादा पुनर्स्थापन कार्य और करीब 350 नई संरचनाओं का उल्लेख है, वहीं कुल नई और पुनर्स्थापित परियोजनाओं की संख्या 750 से अधिक बताई गई है.
दिल्ली जल बोर्ड ने भी शुरू किया काम
दिल्ली जल बोर्ड ने अलग से 611 मौजूदा वर्षा जल संचयन प्रणालियों को दोबारा चालू करने का काम शुरू किया है. सरकार के अनुसार, इनमें से 330 काम पूरे हो चुके हैं और 120 जगहों पर काम जारी है. बाकी परियोजनाओं पर चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा. दिल्ली जल बोर्ड और लोक निर्माण विभाग की टीमें सरकारी परिसरों का निरीक्षण भी कर रही हैं. इसका मकसद खराब या बंद पड़ी प्रणालियों की पहचान करना और जरूरत के अनुसार नई संरचनाएं बनाना है.
बोरवेल की अनुमति से जुड़ सकता है नया नियम
सरकार नए बोरवेल की अनुमति को वर्षा जल संचयन प्रणाली से अनिवार्य रूप से जोड़ने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है. प्रस्ताव लागू होने पर बोरवेल लगाने वाले परिसर को भूजल निकालने के साथ उसके पुनर्भरण की व्यवस्था भी करनी पड़ सकती है. प्रवेश वर्मा ने कहा, 'हर पुनर्स्थापित वर्षा जल संचयन प्रणाली और हर नई संरचना दिल्ली की जल सुरक्षा को मजबूत करती है. यह केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य में किया गया एक महत्वपूर्ण निवेश है."
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