जिला बैंकों में बड़ी मात्रा में नोट जमा होने पर सरकार ने उनके नोट बदलने पर रोक लगा दी थी
- नोटबंदी में महाराष्ट्र के 32 ज़िला बैंकों में 2,771 करोड़ रुपए जमा हुए
- बैंकों में नकदी नहीं होने से किसानों को कर्ज माफी का लाभ नहीं मिल रहा
- ज़िला बैंकों के पास जमा पुराने नोट RBI में 19 जुलाई तक बदले जाएंगे
मुंबई:
देशभर के 371 ज़िला बैंकों में नोटबंदी के बाद जमा पुराने नोट बदलने के लिए अनुमति मिल गई है. महाराष्ट्र के 32 ज़िला बैंकों में सबसे ज्यादा 2,771 करोड़ रुपए जमा हुए थे. इस नोट बदली से किसान को बुआई के लिए दी जाने वाली 10 हज़ार रुपये की नगद मदद देने के लिए बैंकों के पास राशि उपलब्ध होगी.
एनडीटीवी लगातार इस तरह की ख़बरें दिखा रहा था जिनमें नगदी की किल्लत की वजह से ज़िला बैंक परेशान हैं और इसकी वजह से किसान कर्ज़माफ़ी को अमल में नहीं लाया जा रहा है.
वैसे इस फैसले के राजनीतिक आयाम बहुत साफ़ हैं. अब महाराष्ट्र सरकार को उम्मीद है कि इससे किसान आंदोलन की धधक कम होगी. उधर, इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री से कई बार मुलाक़ात कर चुके राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) मुखिया शरद पवार के लिए भी राहत कम नहीं है. शरद पवार के गढ़ पश्चिम महाराष्ट्र के दो ज़िला बैंकों पुणे और सातारा बैंक में ही 1200 करोड़ रुपए फंसे पड़े हैं.
महाराष्ट्र में हाल ही में हुए किसान आंदोलन की अगुवाई करने वाले स्वाभिमानी पक्ष के सांसद राजू शेट्टी ने केंद्र के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इस से किसानों को बुआई के कामों के लिए जरूरी राशि नगद मिलने के लिए मदद होगी.
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आदेश कहता है कि ज़िला बैंकों के पास जमा पुराने नोट 19 जुलाई तक बदले जाएंगे. यह रकम बिना ब्याज पिछले 6 महीने तक बैंकों के पास पड़ी हुई थी. अब यह रक़म जमाकर्ता के खातों में चढ़ा दी जाएगी, जिसे वे इस्तेमाल में ला सकेगा. साथ ही ग्रामीण इलाके में इस आदेश को अमल में लाने के लिए जो नए नोट जारी होंगे, जिससे नगदी की किल्लत कम होगी.
महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक प्रमोद कर्नाड ने बताया कि ग्रामीण बैंकिंग के लिहाज से यह बहुत सकारात्मक फ़ैसला है. इससे उन बैंकों को फायदा होगा जिनकी नकदी नहीं होने के चलते हालत खराब है. दूसरी तरफ, इस फैसले से ख़रीफ की फसल के लिए कर्ज़ वितरण आसान होगा.
एनडीटीवी लगातार इस तरह की ख़बरें दिखा रहा था जिनमें नगदी की किल्लत की वजह से ज़िला बैंक परेशान हैं और इसकी वजह से किसान कर्ज़माफ़ी को अमल में नहीं लाया जा रहा है.
वैसे इस फैसले के राजनीतिक आयाम बहुत साफ़ हैं. अब महाराष्ट्र सरकार को उम्मीद है कि इससे किसान आंदोलन की धधक कम होगी. उधर, इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री से कई बार मुलाक़ात कर चुके राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) मुखिया शरद पवार के लिए भी राहत कम नहीं है. शरद पवार के गढ़ पश्चिम महाराष्ट्र के दो ज़िला बैंकों पुणे और सातारा बैंक में ही 1200 करोड़ रुपए फंसे पड़े हैं.
महाराष्ट्र में हाल ही में हुए किसान आंदोलन की अगुवाई करने वाले स्वाभिमानी पक्ष के सांसद राजू शेट्टी ने केंद्र के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इस से किसानों को बुआई के कामों के लिए जरूरी राशि नगद मिलने के लिए मदद होगी.
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आदेश कहता है कि ज़िला बैंकों के पास जमा पुराने नोट 19 जुलाई तक बदले जाएंगे. यह रकम बिना ब्याज पिछले 6 महीने तक बैंकों के पास पड़ी हुई थी. अब यह रक़म जमाकर्ता के खातों में चढ़ा दी जाएगी, जिसे वे इस्तेमाल में ला सकेगा. साथ ही ग्रामीण इलाके में इस आदेश को अमल में लाने के लिए जो नए नोट जारी होंगे, जिससे नगदी की किल्लत कम होगी.
महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक प्रमोद कर्नाड ने बताया कि ग्रामीण बैंकिंग के लिहाज से यह बहुत सकारात्मक फ़ैसला है. इससे उन बैंकों को फायदा होगा जिनकी नकदी नहीं होने के चलते हालत खराब है. दूसरी तरफ, इस फैसले से ख़रीफ की फसल के लिए कर्ज़ वितरण आसान होगा.
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