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नक्सलबाड़ी जनसभा में ममता बनर्जी के बयान पर विवाद, चुनाव आयोग ने तलब की रिपोर्ट

चुनाव आयोग के अनुसार, मुख्यमंत्री ने महिलाओं और लड़कियों से मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में मौजूद रहने की अपील की और जरूरत पड़ने पर घरेलू रसोई के उपकरणों के इस्तेमाल की बात कही है. इसी संदर्भ में आयोग ने पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की है. 

नक्सलबाड़ी जनसभा में ममता बनर्जी के बयान पर विवाद, चुनाव आयोग ने तलब की रिपोर्ट
  • चुनाव आयोग ने बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के एक हालिया भाषण को लेकर सख्‍त रुख अपनाया है.
  • आयोग का आरोप है कि ममता ने सीआरपीएफ कर्मियों को धमकी देने वाले शब्दों का उपयोग किया है.
  • आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से जनसभा के दौरान CM के भाषण की रिपोर्ट मांगी है.
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नई दिल्ली:

बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के एक हालिया भाषण को लेकर सख्‍त रुख अपनाया है. आयोग ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से दार्जिलिंग जिले में हुई जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री के भाषण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. यह जनसभा नक्सलबाड़ी के नंदप्रसाद गर्ल्स हाई स्कूल ग्राउंड में आयोजित की गई थी. चुनाव आयोग का दावा कि ममता बनर्जी के भाषण के वीडियो में ऐसे बयान सामने आए हैं, जिनमें उन्होंने कथित तौर पर सीआरपीएफ कर्मियों को धमकी देने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है.

आयोग के अनुसार, मुख्यमंत्री ने महिलाओं और लड़कियों से मतदान केंद्रों पर बड़ी संख्या में मौजूद रहने की अपील की और जरूरत पड़ने पर घरेलू रसोई के उपकरणों के इस्तेमाल की बात कही है. इसी संदर्भ में आयोग ने पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की है. 

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ममता बनर्जी के भाषण के बाद उठ रहे सवाल 

इस मामले को लेकर यह सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि क्या ग्रामीण इलाकों में मतदान के दौरान महिलाओं के जरिए किसी तरह की हिंसक घटनाएं हो सकती हैं. साथ ही यह आशंका भी जताई गई है कि यदि सीआरपीएफ के पुरुषकर्मी किसी स्थिति में हस्तक्षेप करते हैं तो उन्हें कानूनी या आपराधिक मामलों में फंसाया जा सकता है.

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बसंती पुलिस स्‍टेशन के प्रभारी इंस्‍पेक्‍टर निलंबित

इससे पहले निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था से जुड़े एक अन्य मामले में भी सख्त कदम उठाया. आयोग ने बसंती पुलिस स्टेशन के प्रभारी इंस्पेक्टर अविजित पॉल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. यह कार्रवाई 26 मार्च को बसंती बाजार इलाके में हुई हिंसक घटना के बाद की गई, जिसमें पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए थे. 

चुनाव आयोग ने अपने आदेश में कहा कि इंस्पेक्टर अविजित पॉल को दो राजनीतिक दलों के सार्वजनिक कार्यक्रमों की पूर्व सूचना होने के बावजूद पर्याप्त पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई. आयोग के मुताबिक, क्षेत्र में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की उपलब्धता के बावजूद उनकी मांग नहीं की गई, जो गंभीर लापरवाही और कर्तव्य की अवहेलना को दर्शाता है. 

बिप्‍लब देब की तीखी प्रतिक्रिया

यह हिंसा दक्षिण 24 परगना जिले के बसंती विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार बिकाश सरदार के चुनाव प्रचार के दौरान भड़की थी. इस घटना को लेकर भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में पहचाने गए हमलावरों ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया और जब पुलिस ने हस्तक्षेप किया तो उन पर भी हमला किया गया. 

बिप्लब कुमार देब ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस पर हिंसा का माहौल बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राज्य में गुंडों और कथित जिहादियों का प्रभाव बढ़ा है, जिसकी वजह से बसंती बाजार जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं. 

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने हैं. राज्य में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि दोनों चरणों के वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी. 
 

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