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लगातार ड्यूटी, अनियमित रोस्टर, FDTL नियम... पायलट सगंठन ने DGCA को गिनाईं दिक्कतें, की यें मांगें

पायलट संगठन ने बताया कि कैडेट पायलटों पर भारी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है. ट्रेनिंग के बाद भी उन्हें उचित नौकरी शर्तें नहीं मिलतीं. निजी रूप से प्रशिक्षित पायलट बेरोज़गार हैं, जबकि एयरलाइंस पायलटों की कमी बता रही हैं. इस असंतुलन पर नियामक कार्रवाई जरूरी है.

लगातार ड्यूटी, अनियमित रोस्टर, FDTL नियम... पायलट सगंठन ने DGCA को गिनाईं दिक्कतें, की यें मांगें
कॉकपिट में पायलट.
नई दिल्ली:

लगातार ड्यूटी, वीक ऑफ, थकान, नाइट शिफ्ट, रोस्टर सहित अन्य दिक्कतों को लेकर पायलटों ने फिर से अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू की है. एयरलाइन्स पायलट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने DGCA को एक पत्र लिखकर इन सभी मुद्दों पर उचित व्यवस्था और निगरानी की मांग की है. डीजीसीए को लिखे पत्र में पायलटों की थकान, ड्यूटी समय नियम और हाल में हुई पायलट मौतों से जुड़े सुरक्षा मुद्दों का जिक्र किया गया है. साथ ही कोर्ट द्वारा तय किए गए FDTL नियम को भी पूरी तरह से लागू किए जाने की मांग की है. 

एयरलाइन्स पायलट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने DGCA को लिखे पत्र को कोर्ट द्वारा तय FDTL नियम अभी तक पूरी तरह लागू नहीं किए गए हैं. एयरलाइंस को दिए गए अस्थायी छूट स्थायी जैसी बन गई हैं, जिससे नियम कमजोर पड़ रहे हैं.कई मामलों में साप्ताहिक आराम की जगह छुट्टी दी जा रही है, जो गलत है. इससे पायलटों की थकान और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है.

पायलटों के संगठन ने DGCA से की ये मांगें

  • FDTL नियम पूरी तरह लागू करने के लिए तय समयसीमा घोषित की जाए.
  • एयरलाइंस को दी गई सभी अस्थायी छूट धीरे-धीरे खत्म की जाए.
  • साप्ताहिक आराम की जगह छुट्टी देने की व्यवस्था बंद की जाए.
  • पायलटों की थकान रिपोर्ट हर तीन महीने में सार्वजनिक की जाए.
  • एयरलाइंस को थकान रिपोर्ट का डेटा DGCA को देना अनिवार्य किया जाए.
  • DGCA इन रिपोर्टों की जांच और ऑडिट करें.
  • दिसंबर 2025 की इंडिगो डिसरप्शन जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई, इसे तत्काल जारी किया जाए.
  • पायलटों की मेडिकल फिटनेस से जुड़ा डेटा जैसे परमानेंट मेडिकल अनफिटनेस, टेम्पररी मेडिकल अनफिटनेस और इनके रुझान नियमित रूप से प्रकाशित किया जाए.
  • ड्यूटी शेड्यूल बनाते समय अधिकतम सीमा से नीचे सुरक्षा मार्जिन रखा जाए.
  • लगातार नाइट ड्यूटी के प्रभाव की जांच की जाए.
  • रोस्टर में अचानक बदलाव का थकान पर असर विश्लेषित किया जाए.
  • रोस्टर स्थिरता को सुरक्षा मानक बनाया जाए.

पायलट संगठन ने बताया कि कैडेट पायलटों पर भारी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है. ट्रेनिंग के बाद भी उन्हें उचित नौकरी शर्तें नहीं मिलतीं. निजी रूप से प्रशिक्षित पायलट बेरोज़गार हैं, जबकि एयरलाइंस पायलटों की कमी बता रही हैं. इस असंतुलन पर नियामक कार्रवाई जरूरी है.

FDTL नियमों को कमजोर करने का कोई भी प्रस्ताव स्वीकार न किया जाए. सुरक्षा को व्यावसायिक हितों से ऊपर रखा जाए. पायलटों की मौतों और स्वास्थ्य समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए. विमानन सुरक्षा में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए.

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