चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बीजेपी हेडक्वार्टर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर जमकर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के आरोप बेबुनियाद हैं. चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष रहा है. ईसी ने हमेशा ईमानदारी से काम किया है. गोयल ने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में चुनाव आयोग के दफ्तर को निचले स्तर तक गिराया. देश इनका बचकाना रवैया देख रहा है. इन्होंने दो मुख्य चुनाव आयुक्त को राज्यपाल बनाया, वहीं एक सीईसी को कैबिनेट में लिया.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने काम को, अपने ट्रैक रिकॉर्ड को पूरी तरह नजरअंदाज करती है. पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र तरीके से देशहित और जनहित में काम करने के लिए पूरी तरह से स्वायत्तता दी है. चुनाव आयोग के अधिकारियों को राजनीतिक लाभ देने का प्रयास नहीं किया गया. उन्हें ईमानदारी से काम करने दिया गया.
LIVE: Shri @PiyushGoyal & Shri @LalanSingh_1 jointly address a press conference at party headquarters in New Delhi. https://t.co/0KFnbEhjoN
— BJP (@BJP4India) October 13, 2026
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो एक चीफ इलेक्शन कमिश्नर को पार्टी टिकट पर उम्मीदवार बनाया गया, एक को यूनियन कैबिनेट में लिया गया, दो चीफ इलेक्शन कमिश्नरों को गवर्नर बनाया गया, और एक बार चीफ इलेक्शन कमिश्नर के यह कहने पर कि उनके नीचे काम करने वाला इलेक्शन कमिश्नर कांग्रेस के एजेंट की तरह काम कर रहा है, उसे निकालने से इनकार कर दिया गया. ऐसा पक्षपात हमने शायद ही किसी सरकार में देखा होगा.
पीयूष गोयल ने कहा कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर टीएन शेषन की ईमानदारी का कांग्रेस बड़ा गुणगान करती थी, लेकिन 1999 में उन्हें आडवाणी जी के सामने कांग्रेस के टिकट पर खड़ा होने का मौका दिया गया. क्या यह उन्हें रिवार्ड करने का काम नहीं था? एम एस गिल 1996 से 2001 तक चीफ इलेक्शन कमिश्नर थे. 2000 में सिटिंग चीफ इलेक्शन कमिश्नर को पद्म विभूषण से नवाजा गया. क्या यह उनकी चापलूसी और कारनामों को रिवार्ड देना नहीं था? रिटायरमेंट के 3 साल बाद वे कांग्रेस ज्वाइन करते हैं, 2004 में राज्यसभा में आते हैं, 2008 में उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में मिनिस्टर बनाया जाता है। इससे ज्यादा आपको क्या सबूत चाहिए कि कांग्रेस ने चुनाव आयोग के ऑफिस को कितने निचले स्तर पर गिरा दिया और अधिकारियों का कैसे दुरुपयोग किया.
उन्होंने कहा कि टीकाराम मीणा केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर थे. एक वर्ष बाद उन्हें कांग्रेस की राजस्थान मेनिफेस्टो टीम में ले लिया गया. मई 2026 में रतन यू केलकर केरल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर थे. चुनाव के तुरंत बाद वर्तमान मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने उन्हें अपना चीफ सेक्रेटरी घोषित कर दिया. क्या यह राजनीतिक रोटियां सेंकना नहीं है कि आप चुनाव में मदद कीजिए और हम आपको पद पर नियुक्त कर देंगे.
गोयल ने कहा कि पहले इलेक्शन कमिश्नर कैसे चुना जाता था? सरकार चुनती थी. जिसे चाहा, उसे चीफ बना दिया. यह मोदी जी की सरकार है, जिसने 2023 में कानूनी प्रावधान किया. इसके तहत नेता प्रतिपक्ष को सिलेक्शन कमेटी का सदस्य बनाया गया. अब पीएम के साथ नेता प्रतिपक्ष भी तय करते हैं कि कौन बनेगा चीफ इलेक्शन कमिश्नर.
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