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खेल ही नहीं यहां भी असर, दिल्ली में कॉमनवेल्थ स्पीकर सम्मेलन में नहीं आएंगे ये पड़ोसी मुल्‍क! जानें कारण

NDTV को मिली जानकारी के मुताबिक, अभी तक पाकिस्तान या बांग्लादेश की तरफ से इसमें भाग लेने की पुष्टि नहीं की गई है जबकि बैठक शुरू होने में महज 4 दिन बाकी बचे हैं.

खेल ही नहीं यहां भी असर, दिल्ली में कॉमनवेल्थ स्पीकर सम्मेलन में नहीं आएंगे ये पड़ोसी मुल्‍क! जानें कारण
  • कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकरों के सम्मेलन में PAK और बांग्लादेश के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना कम है.
  • दिल्‍ली में 14 से 16 जनवरी के बीच होने वाले 28वें CSPOC सम्मेलन में कई देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे.
  • भारत और पाकिस्तान के कूटनीतिक संबंध पिछले दशक में खराब हुए, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद तनाव और बढ़ा है.
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नई दिल्‍ली:

भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव और बांग्लादेश में हो रही हिंसा का असर खेलों पर तो पड़ ही रहा है, अब उसका असर बाकी क्षेत्रों में भी दिखने लगा है. सूत्रों के मुताबिक, अगले हफ्ते दिल्ली में आयोजित होने वाले कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकरों के सम्मेलन में पाकिस्तान और बांग्लादेश के प्रतिनिधियों के भाग लेने की सम्भावना बेहद कम है या यों कहें कि न के बराबर है. 14 से 16 जनवरी के बीच दिल्ली में कॉमनवेल्थ देशों की संसद के स्पीकरों और पीठासीन पदाधिकारियों ( Conference of Speakers and Presiding Officers of Commonwealth) यानी CSPOC का 28 वां सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है.

सूत्रों के मुताबिक, सम्मेलन में सदस्य देशों को बुलाने के लिए हर प्रक्रिया और प्रोटोकॉल का पालन किया गया है. सम्मेलन की न सिर्फ औपचारिक सूचना सभी सदस्य देशों को दी गई है, बल्कि उन्हें निमंत्रण भेजने की पूरी प्रक्रिया का पालन भी किया गया है. सम्मेलन के वेबसाइट पर भी सभी देशों के लिए बैठक में औपचारिक निमंत्रण अपलोड किया गया है.

पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश के भाग लेने की पुष्टि नहीं

हालांकि एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक, अभी तक पाकिस्तान या बांग्लादेश की तरफ से इसमें भाग लेने की पुष्टि नहीं की गई है जबकि बैठक शुरू होने में महज 4 दिन बाकी बचे हैं. ऐसे में उनके प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना अब नहीं बची है. उधर, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, श्रीलंका और केन्या जैसे देशों की संसद के स्पीकर या पीठासीन पदाधिकारियों का बैठक में भाग लेना तय है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबसे खराब दौर में रिश्‍ते

जाहिर है कि इन दोनों देशों के प्रतिनिधियों का भाग नहीं लेना दिखाता है कि दक्षिण एशिया में कूटनीतिक हालात कैसे हैं. पाकिस्तान के साथ भारत के कूटनीतिक संबंध पिछले एक दशक से बेहद खराब हो चुके हैं. खासकर पिछले साल पहलगाम में आतंकी हमला और उसके बाद भारत की तरफ से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के रिश्ते बिल्कुल निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं.

बांग्‍लादेश में हिंसा और अस्थिरता के हालात 

बांग्लादेश की परिस्थिति थोड़ी अलग है, वहां लगातार हिंसा और अस्थिरता की हालत बनी हुई है. खासकर अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ लगातार जारी हिंसा को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच काफी तनाव है. वैसे सूत्रों ने एनडीटीवी को ये भी बताया कि पिछले साल शेख हसीना की सरकार के अपदस्थ होने के बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार काम कर रही है और देश की संसद निलंबित अवस्था में है.

कनाडा की पहल पर शुरू हुआ था सम्‍मेलन

इस सम्मेलन में कुल 53 सदस्य देश हैं, जिनमें भारत के अलावा कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं. 1969 में कनाडा की पहल पर शुरू किए गए इस सम्मेलन की बैठक अब हर साल आयोजित की जाने लगी है. इस बार ये बैठक दिल्ली में भारत के पुराने संसद भवन में होगी, जिसे अब संविधान सदन के नाम से जाना जाता है.

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