- पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बदिन जिले में जमींदार सरफराज निज़ामानी ने मजदूर की गोली मारकर हत्या कर दी
- इस हत्या के विरोध में बदिन में हजारों लोगों ने जय श्री राम के नारे लगाकर प्रदर्शन किया
- मानवाधिकार संगठनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और एंटी-टेररिज्म एक्ट के तहत मुकदमा चलाने की मांग की है
पाकिस्तान के सिंध प्रांत से रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है. बदिन जिले की तहसील तलहार के गांव 'पीरू लाशारी' में एक प्रभावशाली सामंत (वडेरे) ने मामूली विवाद में एक गरीब हिंदू कृषि मजदूर कैलाश कोल्ही की सीने में गोली मारकर हत्या कर दी. इस घटना ने न केवल सिंध के हिंदू समुदाय को झकझोर दिया, बल्कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर वैश्विक स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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विवाद की वजह: सिर छिपाने की एक झोपड़ी
जानकारी के अनुसार, कैलाश कोल्ही स्थानीय जमींदार सरफराज निज़ामानी के खेत में मजदूरी करता था. उसने अपने परिवार के रहने के लिए खेत में एक कच्ची और अस्थायी झोपड़ी (झुग्गी) बना रखी थी. जमींदार निज़ामानी को यह मंजूर नहीं था. इसी बात पर हुए विवाद के दौरान, निज़ामानी ने कथित तौर पर अपनी बंदूक निकाली और बेबस कैलाश पर सीधी फायरिंग कर दी. इस घटना में उसकी मौके पर ही मौत हो गई, जिससे उसका परिवार पूरी तरह बिखर गया है.
सड़कों पर उतरा जन-सैलाब, लगे 'जय श्री राम' के नारे
इस जघन्य हत्याकांड के विरोध में पूरा बदिन शहर सड़कों पर उतर आया. हजारों की संख्या में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने हाथ में पोस्टर और तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया. इस विरोध प्रदर्शन की सबसे खास और गूंजने वाली बात रही 'जय श्री राम' के नारे. प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि अब वे अन्याय को चुपचाप सहन नहीं करेंगे.
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— NDTV India (@ndtvindia) January 9, 2026
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"अल्पसंख्यकों का नरसंहार बंद करो"
पाकिस्तान दारावर इत्तेहाद के अध्यक्ष शिवा कच्छी ने इस कांड की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'सुनियोजित उत्पीड़न' करार दिया. उन्होंने कहा, "सिंध में कोल्ही, भेल और मेघवाड़ समुदायों को कीड़े-मकोड़ों की तरह समझा जा रहा है. कभी अपहरण, कभी जबरन धर्म परिवर्तन और अब सरेआम हत्या. अगर हत्यारे निज़ामानी को सजा नहीं मिली, तो यह जुल्म और बढ़ेगा."
सिंध की 'हारे' प्रथा और शोषण का चक्र
यह घटना सिंध के ग्रामीण इलाकों में प्रचलित सामंती व्यवस्था की भयावह तस्वीर पेश करती है, यहां कृषि मजदूर (जिन्हें 'हारे' कहा जाता है) पूरी तरह से जमींदारों के रहमोकरम पर होते हैं. आर्थिक कमजोरी के कारण ये लोग अक्सर हिंसा और शोषण का शिकार होते हैं, और रसूखदार होने के कारण अपराधी कानून की गिरफ्त से बच निकलते हैं.
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
- स्थानीय मानवाधिकार संगठनों और हिंदू नेताओं ने सरकार के सामने अपनी स्पष्ट मांगें रखी हैं.
- हत्यारे की गिरफ्तारी: मुख्य आरोपी सरफराज निज़ामानी को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए.
- आतंकवाद की धाराएं: मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पर 'एंटी-टेररिज्म एक्ट' (ATA) के तहत मुकदमा चलाया जाए.
- पीड़ित परिवार को सुरक्षा: कैलाश के परिवार को रसूखदार अपराधियों के डर से बचाने के लिए सरकारी सुरक्षा मिले.
- सिंध सरकार की जवाबदेही: मुख्यमंत्री और आईजी सिंध इस मामले में खुद दखल दें और त्वरित न्याय सुनिश्चित करें.
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