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This Article is From Aug 30, 2012

एनडीटीवी कोल-गेट एक्सक्लूसिव : सुबोधकांत के हितों के टकराव के सबूत

नई दिल्ली: एनडीटीवी ने कोल-गेट मामले में खोजा है कि इस मामले में सुबोधकांत सहाय के हितों के टकराव के सबूत मौजूद हैं। नए सबूतों से सहाय की सफ़ाई की कलई खुल रही है।

सहाय के भाई की कंपनी को कोल ब्लॉक मिले थे। इस आवंटन के लिए मंत्री सुबोधकांत सहाय ने प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच का इस्तेमाल किया था।

अपने भाई की कंपनी (एसकेएस इस्पात) को कोल ब्लॉक दिलाने के लिए सुबोधकांत सहाय ने पीएम को चिट्ठी लिखकर निजी तौर पर मामले को देखने की अपील की थी। चिट्ठी के 24 घंटों के भीतर ही पीएमओ ने चिट्ठी कोयला सचिव को भेज दी थी जिसके फलस्वरूप सहाय के भाई को कोल ब्लॉक आवंटित किए गए।

गौरतलब है कि अपना नाम आने के बाद सुबोधकांत सहाय ने अपनी सफाई में झारखंड के हित की बात कही थी जो अब गलत निकल रही है। इसका कारण यह है कि सुबोधकांत ने छत्तीसगढ़ में कोल ब्लॉक आवंटित करवाया था।

इसके अलावा सुबोधकांत सहाय ने फतेहपुर ब्लॉक को लेकर भी सफाई दी थी जो सही पाई गई है। विजय सेंट्रल ब्लॉक पर सहाय की सफ़ाई की कलई खुली।

आपको बता दें कि 5 फरवरी 2008 केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी। प्रधानमंत्री से कोयला आवंटन के लिए निजी तौर पर दखल देने का आग्रह किया।
एसकेएस इस्पात के लिए सहाय ने आग्रह किया। छत्तीसगढ़ और झारखंड में स्टील प्लांट के लिए कोयला ब्लॉक की मांग की थी।

इस चिट्ठी के जवाब में 6 फरवरी 2008 पीएमओ ने सहाय की चिट्ठी कोयला मंत्रालय भेजी। 7 फरवरी 2008 को एसकेएस की अर्ज़ी पर विचार के लिए स्क्रीनिंग कमेटी बैठी और 7 फरवरी 2008 सहाय के भाई सुधीर एसकेएस के निदेशक के तौर पर सरकारी मीटिंग में शामिल भी हुए।

3 जुलाई 2008 को एसकेएस को विजय सेंट्रल ब्लॉक दे दिया गया। इससे यह साफ हो जाता है कि सहाय की सफ़ाई विजय सेंट्रल के दूसरे ब्लॉक पर सही नहीं ठहरती।

एक जानकारी यह भी निकल के सामने आ रही है कि विजय सेंट्रल ब्लॉक का कोयला छत्तीसगढ़ के स्पॉन्ज आयरन प्लांट में प्रयोग में लाया गया वहीं, फ़तेहपुर कोल ब्लॉक का कोयला छत्तीसगढ़ के बिजली कारख़ाने में भेजा गया।

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