- यूट्यूबर ध्रुव राठी को CEC के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने पर गुरुग्राम में पुलिस ने हिरासत में लिया है
- दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से CJP के प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था और कड़े इंतजाम किए हैं
- ध्रुव राठी ने निर्वाचन आयोग पर वोटर सूची में नाम जोड़ने और हटाने में पारदर्शिता के अभाव का आरोप लगाया है
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम में पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. ध्रुव राठी को पुलिस ने घर से ही हिरासत में लिया. गुरुग्राम के सेक्टर-67 में ध्रुव राठी का घर है. राठी लगातार सीजेपी (CJP) के प्रोटेस्ट का समर्थन कर रहे हैं.
इस प्रदर्शन को लेकर पूरी राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. इससे पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों और प्रक्रियागत आवश्यकताओं का हवाला देते हुए इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
पुलिस ने एहतियातन हिरासत की कार्रवाई तेज कर दी है और प्रदर्शनकारियों को प्रदर्शनस्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए रणनीतिक स्थानों पर जवानों को तैनात किया है.
अब तक पुलिस नई दिल्ली इलाके में विभिन्न स्थानों से लगभग 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले चुकी है.

इससे पहले ध्रुव राठी ने एसआईआर की कवायद को लेकर निर्वाचन आयोग पर ‘पारदर्शिता और जवाबदेही का पूरी तरह अभाव' होने का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी. उन्होंने कहा कि ‘वोट चोरी' का मुद्दा हर नागरिक से जुड़ा हुआ है, चाहे उनकी राजनीतिक संबद्धता कुछ भी हो.
उन्होंने कहा, “चाहे आप भाजपा को वोट दें, कांग्रेस को वोट दें या किसी और पार्टी का समर्थन करें, यह (‘वोट चोरी') एक ऐसा मुद्दा है, जो देश के हर नागरिक से जुड़ा हुआ है.” यह मुद्दा उन लोगों के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करते हैं. अगर आपको लगता है कि देश के हर नागरिक के पास वोट देने का अधिकार होना चाहिए, तो आपको भी हमारे उद्देश्य का समर्थन करना चाहिए और विरोध-प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए.
उन्होंने पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची से हजारों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए और नतीजों की घोषणा के बाद उन्हें फिर से जोड़ दिया गया. ये लोग असली और पात्र मतदाता थे. चुनाव से पहले और चुनाव के बाद इनके नाम मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन मतदान के समय वे सूची में नहीं थे.

राठी ने कहा कि बिहार में लगभग 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने प्रभावित लोगों के नाम और पते तब तक जाहिर नहीं किए, जब तक कि उच्चतम न्यायालय ने यह जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश नहीं दिया. आयोग के कामकाज में कोई पारदर्शिता नहीं है. बिल्कुल भी पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं है.
उन्होंने आरोप लगाया, “मर्जी से नाम जोड़े जा रहे हैं, मर्जी से नाम हटाए जा रहे हैं. सब कुछ किसी की इच्छा के अनुसार किया जा रहा है.” राठी ने कहा, “इसीलिए हम कहते हैं कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए.”
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