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UGC के नए रेगुलेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर CJI सूर्यकांत की बेंच कल करेगी सुनवाई

UGC के नए रेगुलेशन को देशभर में विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है. यूपी में तो इन नियमों को सवर्ण समाज के खिलाफ बताते हुए एक अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया है.

UGC के नए रेगुलेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर CJI सूर्यकांत की बेंच कल करेगी सुनवाई
UGC मामले में सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
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  • UGC के नए नियमों के खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में सवर्ण वर्ग के लोग जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं
  • उत्तर प्रदेश में एक अधिकारी ने UGC के नियमों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था
  • सवर्ण समाज ने चेतावनी दी है कि यदि नियम वापस नहीं लिए गए तो वे बीजेपी का बहिष्कार कर सकते हैं
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नई दिल्ली:

UGC के नए नियमों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है. UGC के नए नियमों को आम लोग सवर्णों के खिलाफ बता रही रहे हैं. इसे लेकर अब राजनीतिक भी तेज होती दिख रही है. उत्तर प्रदेश में तो यूजीसी के नए नियमों को लेकर एक अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट है. सुप्रीम कोर्ट यूजीसी के नए रेगुलेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करने जा रहा है. CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी.

आपको बता दें कि UGC के इस नए नियम की वजह से देशभर में बवाल मच गया है. सवर्ण सड़कों पर हैं. सवर्णों के बच्चों के भविष्य के खतरे के नाम पर कहीं विरोध प्रदर्शन हुआ तो कहीं पुतले जलाये गए. किसी ने मशाल जुलूस निकाला, तो कोई खून से चिट्ठी लिखकर अपना विरोध दर्ज करा रहा था. नौबत ये आ गई थी कि प्रदर्शनकारी आगजनी और तोड़ फोड़ करने लगे. कुछ-कुछ वैसा ही माहौल 36 साल बाद यूजीसी की गाइडलाइन को बनाए जाने की कोशिश होती दिखाई दे रही है. 

जाति है जो जाती नहीं

सड़कों पर सवर्णों का विरोध प्रदर्शन हो रहा है. 1990 की ही तरह 2026 में भी सवर्ण सड़कों पर आ गए हैं. कोई खून से चिट्ठी लिख रहा, कोई मशाल जला रहा, कोई नारे लगा रहा तो कोई मुंडन करा रहा. ये सब करने वाले सवर्ण यानी सामान्य वर्ग के लोग हवाला यूजीसी की नई गाइडलाइन का दे रहे हैं. निशाने पर केंद्र सरकार ही है. आरोप सवर्णों के भविष्य से खिलवाड़ करने का है. फर्क ये है कि 1990 वाला आंदोलन आरक्षण को लेकर था, ये गाइडलाइन में भेदभाव के दावे को लेकर है. 

यूजीसी की नई गाइडलाइन की तुलना रॉलेट एक्ट 1919 से की जा रही है. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि सवर्ण आँखें मूंदकर बीजेपी का समर्थन करता रहा है लेकिन अब अगर ये गाइडलाइन रोल बैक नहीं की गई तो सवर्ण समाज बीजेपी का बहिष्कार करेगा. सवर्णों में सबसे मुखर ब्राह्मण और क्षत्रिय संगठन हैं. इनका कहना है कि इस नई गाइडलाइन को लाने की कोई ज़रूरत नहीं थी लेकिन बीजेपी ने आरक्षित वर्ग को साधने के लिए सवर्णों के हितों को दरकिनार कर दिया. 

यह भी पढ़ें: सवर्णों का 'जंतर-मंतर' कूच : यूजीसी विवाद में इस्तीफे, प्रदर्शन और चेतावनी, जानें क्या है विवाद की जड़

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