- संसद का बजट सत्र बुधवार से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के साथ शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगा
- सरकार ने SIR और जीरामजी कानून पर बहस से इनकार किया है जबकि TMC एसआईआर मुद्दा जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है
- निर्मला सीतारामन का बजट नवीकरणीय ऊर्जा, एआई और टैक्स सुधारों पर केंद्रित होने की संभावना जताई जा रही है
संसद का बजट सत्र बुधवार से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अभिभाषण के साथ शुरू हो रहा है. बजट सत्र दो हिस्सों में होता है और पहला हिस्सा 13 फरवरी तक चलेगा. मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने ऐसे कई मुद्दे गिनाए जिन पर बजट सत्र में टकराव की संभावना है.हालांकि, सत्र के पहले हिस्से में विधायी कार्य या फिर विपक्ष के मुद्दों के लिए गुंजाइश नहीं होती. राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण पेश होगा. एक फरवरी को रविवार होने के बावजूद बजट पेश किया जाएगा. इसके बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर दोनों सदनों में चर्चा होगी जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब देंगे. उसके बाद वित्त विधेयक को पारित कराया जाएगा और उसके बाद अवकाश आ जाएगा.
विपक्ष के पास मुद्दों की लंबी फेहरिस्त है जो वह बजट सत्र में उठाना चाहता है. भारत के साथ व्यापार समझौते पर अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दिन-रात बदलते बयान, मनरेगा की जगह जीरामजी कानून, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के लिए विशेष अभियान या फिर विपक्ष के शासन वाले राज्यों में केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप- इन तमाम मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरना चाहता है. सरकार की सहयोगी टीडीपी भी कुछ मुद्दे उठाना चाहती है.
इनमें भारत के मुक्त व्यापार समझौते और ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया का उपयोग करने पर प्रतिबंध लगाने जैसे मुद्दे शामिल हैं. ट्रंप को लेकर विपक्ष की विशेष रुचि है. वेनेजुएला का घटनाक्रम हो या फिर ग्रीनलैंड पर ट्रंप के दावे, विपक्ष चाहता है कि सरकार यह बताए कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के इन मुद्दों पर वह चुप क्यों है.
यूजीसी के नियम भी एक बड़ा मुद्दा हैं लेकिन इस पर प्रमुख राजनीतिक दल चुप्पी साधे हुए हैं. इन्हें अपने – अपने वोट बैंक की चिंता है. केवल शिवसेना यूबीटी की प्रियंका चतुर्वेदी और कुछ अन्य नेता हैं जिन्होंने इस बारे में विरोध कर रहे लोगों की चिंताओं का जिक्र किया है. ऐसे में लगता नहीं है कि यह मुद्दा बजट सत्र के बड़े मुद्दों में से एक बन पाएगा. हालांकि कुछ विपक्षी दल इसके जरिए सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश जरूर करेंगे. इसी तरह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के प्रयागराज के माघ मेले में अपमान का मुद्दा सरकार को शर्मिंदा करने के लिए छेड़ा जा सकता है.
दरअसल, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में मुद्दों को लेकर बाध्यता नहीं होती. विपक्षी दल देश-विदेश से जुड़े किसी भी मुद्दे को इस चर्चा में ला सकते हैं. इसीलिए माना जा रहा है कि विपक्ष अपना गुबार इस चर्चा के दौरान ही निकाल सकता है. लेकिन विपक्ष को इस बात का भी अंदाजा है कि हर बार की तरह प्रधानमंत्री मोदी इस बार भी चर्चा का जवाब देते समय विपक्ष की जबर्दस्त खिंचाई कर सकते हैं. वैसे सबकी नजरें बजट पर होंगी.
माना जा रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन नवीकरणीय ऊर्जा और एआई जैसे क्षेत्रों पर जोर दे सकती हैं. शेयर बाजार की खस्ता हालत और एफआईआई के पलायन को रोकने के लिए वहां टैक्स में कुछ सुधार की बात भी कही जा रही है. साथ ही विकसित भारत के बुलंद इरादों की मजबूत झलक भी उनके बजट में दिख सकती है. यह उनका लगातार नौवां बजट होगा जो एक रिकॉर्ड है.
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