शर्मनाक! चोरी के आरोप में पुलिसवाले ने की मासूम की बेरहमी से पिटाई, लात मारी.. घूंसा मारा, वारदात कैमरे में कैद

9 साल के बच्चे पर 6वीं वाहिनी आवासीय कैम्पस से एक छोटी साइकिल चुराकर ले जाने का आरोप था. अशोक थापा ने उसे मस्ताना चौक के पास गली में पकड़ा और बुरी तरह मारपीट की.

शर्मनाक! चोरी के आरोप में पुलिसवाले ने की मासूम की बेरहमी से पिटाई, लात मारी.. घूंसा मारा, वारदात कैमरे में कैद

जबलपुर (एमपी):

जबलपुर के रांझी थाना क्षेत्र में एक मासूम बच्चे के साथ वहशियाना अंदाज में मारपीट का मामला सामने आया है. मासूम बच्चे के साथ मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि स्कूटर पर सवार दो शख्स, एक घर के किनारे खड़े एक बच्चे तक पहुंचते हैं और उसके साथ बुरी तरह मारपीट करते हैं. वहीं पड़ोसी बच्चे को बचाने की कोशिश करते हैं तो उनके साथ भी मारपीट की कोशिश की जाती है. फिर बच्चे को जानवरों की तरह पीटते हुए अगवा कर कहीं ले जाया जाता है.

रांझी थाना क्षेत्र के मस्ताना चौक के पास घटनास्थल के नजदीक लगे सीसीटीवी कैमरे में ये पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है. ये फुटेज 12 अगस्त की दोपहर करीब 1 बजे की है. बताया जा रहा है कि मारपीट करने वाला आरोपी एसएएफ की छठवीं बटालियन में पदस्थ है, जिसने साइकिल चोरी के शक में मासूम बच्चे के साथ मारपीट की इस घटना को अंजाम दिया.

बहरहाल बच्चे के साथ हुई मारपीट की इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पुलिस के आलाधिकारी हरकत में हैं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस वीडियो सहित पूरे मामले की जांच की जा रही है, जिसके बाद मारपीट के आरोपियों पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.

जबलपुर एएसपी प्रदीप शेंडे ने बताया कि सोशल मीडिया में एक बच्चे के साथ मारपीट करने का वीडियो वायरल होने पर पुलिस अधीक्षक जबलपुर ने मामले का संज्ञान लिया और 6वीं वाहिनी वि.स. बल जबलपुर में पदस्थ आरक्षक अशोक थापा के विरूद्ध थाना रांझी में प्रकरण दर्ज किया गया है. 9 साल के बच्चे पर 6वीं वाहिनी आवासीय कैम्पस से एक छोटी साइकिल चुराकर ले जाने का आरोप था. परिजनों ने सूचना दी तो अशोक थापा ने उसे मस्ताना चौक के पास गली में पकड़ा और बुरी तरह मारपीट की.

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6वीं वाहिनी के स्पेशल ऑर्म फोर्स में पदस्थ कॉन्सटेबल अशोक थापा के विरूद्ध थाना रांझी में अपराध क्रमांक 766/2022 धारा 294, 323, भादवि एवं धारा 75 किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है.