Mental Health Expert In Schools: मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने युवाओं और भाई-बहनों के बीच बढ़ती ईर्ष्या व मानसिक असंतुलन के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र बिसेन की युगलपीठ ने कहा कि पारिवारिक उपेक्षा, तुलना और प्रतिस्पर्धा से उपजने वाली हीन भावना कई बार गंभीर मानसिक विकृति का रूप ले लेती है, जो अंततः आपराधिक घटनाओं को जन्म दे सकती है.
खंडपीठ ने आदेश दिया है कि प्रदेश के प्रत्येक स्कूल और कॉलेज में 90 दिनों के भीतर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए. साथ ही कम से कम जिला स्तरीय अस्पतालों में भी मनोचिकित्सक और काउंसलर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि जरूरतमंदों को समय पर उपचार मिल सके.
छात्रों को नियमित परामर्श और सहायता मिल सके
अदालत ने अपने आदेश की प्रति मुख्य सचिव को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि प्रदेश स्तर पर एक समग्र नीति तैयार की जा सके. इस नीति में युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की व्यवस्था हो. न्यायालय ने यह भी कहा कि स्कूलों और महाविद्यालयों में सुव्यवस्थित ढंग से हेल्थ क्लिनिक स्थापित किए जाएं, जिससे छात्रों को नियमित परामर्श और सहायता मिल सके. इन सभी कदमों के लिए 90 दिन की समयसीमा निर्धारित की गई है.
बहन की हत्या से जुड़ा है मामला
यह निर्देश नरसिंहपुर जिले में बहन की हत्या से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसमें पारिवारिक ईर्ष्या को अपराध की प्रमुख वजह बताया गया था. हाई कोर्ट ने दोषियों की सजा के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा.
प्वाइंट्स में समझिए खबर का सार
- मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने 90 दिनों में सभी स्कूल-कॉलेजों में मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट नियुक्त करने के निर्देश दिए.
- जिला स्तरीय अस्पतालों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की उपलब्धता अनिवार्य करने को कहा.
- आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजकर राज्य स्तरीय नीति बनाने के निर्देश दिए.
- नीति में युवाओं और बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष फोकस करने की बात कही.
- विद्यालयों और महाविद्यालयों में व्यवस्थित हेल्थ क्लिनिक स्थापित करने का निर्देश दिया.
- भाई-बहनों में ईर्ष्या से बढ़ते अपराधों पर कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई.
- हत्या प्रकरण में दोषियों की सजा के खिलाफ दायर अपील खारिज की गई.
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