कभी एक-47 हथियार से दहशत फैलाने वाले हाथों में आज कलम है. इस कलम से एक नया इतिहास लिखा जा रहा है. कहानी छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के तीन उन युवाओं की है, जो कभी लाल आतंक के पर्याय माने जाने वाले नक्सली संगठन का हिस्सा थे. नक्सली हिंसा के समाधान के बाद अब इनके पुनर्वास और उत्थान का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है. छत्तीसगढ़ के बस्तर में साल 2025 में पुनर्वास करने वाले 210 नक्सलियों में से 7 ने छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल की एसएससी (कक्षा 10वीं ) परीक्षा में सफलता हासिल की है. इनमें से तीन ने फर्स्ट डिवीजन में परीक्षा पास की है.
पढ़ाई रह गई थी अधूरी
बस्तर पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक हाल ही में घोषित परिणामों में गीता नरोटे (35), अर्जुन ओयाम (32) और संतोष अचला (31) ने प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास की. तत्कालीन परिस्थितियों और नक्सली संगठन में जुड़ने के कारण इनका पढ़ाई का सपना अधूरा ही रह गया था. गीता नरोटे बताती हैं कि वो नक्सल संगठन की डिविजनल कमेटी मेंबर हुआ करती थीं. अब वो नर्स बनकर समाज सेवा करना चाहती हैं. बचपन में पढ़ाई छूट गई थी अब मौका मिल रहा है तो फिर से उसे भुनाने की कोशिश कर रही हैं.
नक्सलियों के स्कूल में पढ़ाते थे
अर्जुन ओयाम और संतोष अचला की कहानी भी गौरतलब हैं. दोनों ही संगठन में रहते हुए नक्सलियों के राजनीतिक स्कूल में पढ़ाते रहे, लेकिन अब पुनर्वास के बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पढ़ने का काम कर रहे हैं. अर्जुन की इच्छा है कि वो अपने गांव लौटे और शिक्षक बनकर गांव के बच्चों को बेहतर भविष्य की ओर प्रोत्साहित करें. संतोष की इच्छा उच्च शिक्षा हासिल कर अपना व्यवसाय और खेती करने की है.
एसएससी की परीक्षा पास करने वाले इन पूर्व नक्सलियों की चर्चा पूरे छत्तीसगढ़ में हो रही है. छत्तीसगढ़ शासन का कहना है कि पुनर्वास योजना के तहत पूर्व नक्सलियों को शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए जरूरी संसाधनों के साथ पढ़ाई का माहौल भी तैयार करवाया जा रहा है. पुनर्वास केंद्रों में उचित व्यवस्थाओं के साथ ही कॉपी, किताब, कलम और अन्य पढ़ाई के संसाधन निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
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