चारधाम यात्रा, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी... उत्तराखंड के ये पर्यटक स्थल इन दिनों देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और सैलानियों से गुलजार है. हर साल चारधाम यात्रा में भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है. सरकार के साथ-साथ यात्रा मार्ग में कारोबार करने वाले लोग इस बढ़ती भीड़ से खुश हैं. लेकिन लोगों की इस बेशुमार भीड़ के साथ-साथ गंदगी का जो अंबार पहाड़ों पर लग रहा है, वह पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता पैदा कर रहा है. लाखों श्रद्धालुओं, पर्यटकों के द्वारा छोड़े गए कूड़ा-कचरा से प्रकृति का संतुलन बिगड़ सकता है. पहाड़ों पर आए लोगों द्वारा छोड़े गए कचरे में भारी मात्रा में प्लास्टिक की पानी की बोतले हैं. जो सालों बाद भी गलते नहीं.
3000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर भी कचरे के ढ़ेर
मालूम हो कि चारधाम के साथ-साथ हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी उच्च हिमालय क्षेत्र में मौजूद है. 3000 मीटर से ऊपर के क्षेत्र में भी इन जगहों से भी प्लास्टिक के कचरे भारी मात्रा में जमा किए जा रहे हैं. हर साल उत्तराखंड सरकार और पर्यटन विभाग श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उत्तराखंड आने का न्योता देती हैं. साथ ही एक गाइडलाइन भी जारी करती है, जिसमें आने वाले श्रद्धालु और पर्यटकों के लिए उच्च हिमालय क्षेत्र में कूड़ा न फैलाने की अपील की जाती है.
लेकिन इस अपील का असर अभी तक होता नजर नहीं आ रहा है. नतीजा हिमालय के बड़े-बड़े घास के मैदान (बुग्याल) के साथ-साथ उच्च हिमालय क्षेत्र में भी यत्र-तत्र, सर्वत्र कूड़ा कचरा फैला नजर आता है.

आंकड़ों से समझिए- कैसे चारधाम यात्रा में रोज जमा हुए 5 टन से ज्यादा कचरा?
बात आंकड़ों की करें तो चार धाम यात्रा में अब तक 792 टन कूड़ा-कचरा जमा किया गया है. इस साल चार धाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हुई थी. मतलब बीते करीब 150 दिन में 792 टन के करीब कूड़ा-कचरा. रोज के हिसाब से देखें करीब 5 टन. हालांकि शुरुआत के 40 दिन ज्यादा कूड़ा जमा हुआ. क्योंकि उस समय भक्तों की भीड़ ज्यादा थी. बाद में मौसम बिगड़ने के बाद जब तीर्थयात्रियों की संख्या घटी तो कूड़ा जमा होना भी कम हुआ.
- वहीं इस आंकड़े में अगर हेमकुंड साहिब से और फूलों की घाटी से इकट्ठा हुआ कूड़ा कचरा के आंकड़े जोड़े तो यह आंकड़ा 800 टन से भी अधिक हो जाता है.
- केदारनाथ में अबतक 283 टन कूड़ा इकट्ठा हुए, जिसमे 5.5 टन कॉम्पैक्ट प्लास्टिक वेस्ट रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जा चुका है. केदारनाथ धाम से गौरीकुंड तक सफाई के लिए कुल 412 पर्यावरण मित्र एवं 30 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं.
- वहीं बदरीनाथ धाम से अबतक कुल 363.3 टन कूड़ा इकट्ठा हुए है. जिसमें अगस्त तक 335.9 टन कूड़ा कचरा इकट्ठा किया गया है तो वहीं सितंबर में अब तक 30.4 टन कूड़ा कचरा इकट्ठा किया जा चुका है.
- इसी तरह गंगोत्री धाम में अबतक 98 टन कूड़ा इक्कठा हुआ है जिसमे ड्राई ववेस्ट 45.05 टन और ड्राई वेस्ट 53.75 टन इकट्ठा किया गया. यमनोत्री धाम में अबतक 48.2 क्विंटल कूड़ा इकट्ठा हुआ.

इसके अलावा पर्यावरण विकास समिति (EDC) भ्यूंडर, चमोली, उत्तराखंड द्वारा साल 2026 की यात्रा अवधि में लोकपाल, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी यात्रा मार्ग से 10 सितंबर 2026 तक पर्यावरण विकास समिति भ्यूंडर द्वारा यात्रा मार्ग एवं आसपास के क्षेत्रों से अब तक 22,300 बैग प्लास्टिक बोतल एवं अन्य प्लास्टिक सामग्री और 4,000 बैग अन्य प्लास्टिक रैपर, रेनकोट आदि इकट्ठा किया गया है कुल मिलकर 26300 बैग प्लास्टिक बोतल एवं अन्य प्लास्टिक सामग्री,प्लास्टिक रैपर, रेनकोट आदि इकट्ठे किए गए हैं.
इतनी बड़ी तादाद में टनों कूड़ा कचरा इकट्ठा होने से उच्च हिमालय क्षेत्र का पूरा इकोसिस्टम प्रदूषित हो रहा है इतनी बड़ी तादात में अगर कूड़ा कचरा वहां पहुंच रहा है तो आप मान सकते हैं कि किस तरीके से ग्लोबल वार्मिंग जलवायु परिवर्तन के यह मुख्य कारक साबित हो रहे हैं. उच्च हिमालय क्षेत्र में ग्रीन यात्रा का नारा दिया गया है जो सिर्फ एक नारा ही बनकर रह गया है.
पर्यटन विभाग और राज्य सरकार के अलावा उत्तराखंड पॉल्यूशन बोर्ड के सारे दावे फेल साबित होते हुए नजर आ रहे हैं. जिसमें दावा किया जा रहा था कि प्लास्टिक मुक्त चार धाम यात्रा और पर्यटन को किया जाएगा.

एक्सपर्ट बोले- इतनी बड़ी मात्रा में कूड़ा जमा होना गंभीर चिंता का विषय
पर्यावरणविद् और प्रोफेसर एसपी सती ने एनडीटीवी से बताया कि इतनी बड़ी मात्रा में कूड़ा-कचरा जमा होना बहुत चिंता का विषय है. क्योंकि इसमें प्लास्टिक की मात्रा ज्यादा है. प्लास्टिक हजारों साल तक गलता नहीं है. इसके छोटे-छोटे कण पानी को प्रदूषित कर रहे हैं. इसके अलावा जमीन में रहकर यह भूमिगत जल की मात्रा को भी कम कर रहे हैं. क्योंकि पानी जमीन के अंदर जाने के बजाय बह जा रहा है, जिससे उच्च हिमालय क्षेत्र में सॉइल एरोजन तेजी से हो रहा है.
एसपी सती ने आगे बताया कि फूलों की घाटी जैसी हेरिटेज जगह भी खतरे में आ गई है, क्योंकि वहां पर हजारों बैग प्लास्टिक की बोतल प्लास्टिक की रैपर ,पॉलिथीन, मिल रहे हैं. इस कारण फूलों की घाटी वाले क्षेत्र में पॉल्यूशन के चलते कई फूलों की प्रजाति खतरे में आ सकती है.
यह भी पढ़ें - चारधाम यात्रा का दूसरा चरण आज से शुरू, रजिस्ट्रेशन करा रहे श्रद्धालु, केदारनाथ पैदल मार्ग अब भी बंद
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं