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This Article is From Sep 15, 2025

कैंसर की नई वैक्‍सीन पर नया अपडेट, चमत्‍कारी कहे जाने वाले टीके पर एक्‍सपर्ट ने क्‍या बताया?

जयदेवन ने कैंसर के टीकों के लाभ के बारे में बताया. उन्होंने बताया, 'यह एक प्रकार की 'इम्यूनोथेरेपी' है, जो शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को इस तरह प्रशिक्षित करती है कि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन्हें नष्ट कर सके.'

कैंसर की नई वैक्‍सीन पर नया अपडेट, चमत्‍कारी कहे जाने वाले टीके पर एक्‍सपर्ट ने क्‍या बताया?
  • आईएमएम की वैज्ञानिक समिति के चेयरमैन डॉ राजीव जयदेवन ने कैंसर के टीकों पर नया अपडेट दिया है.
  • जयदेवन ने कहा कि कैंसर के टीके स्वस्थ व्यक्तियों में कैंसर की शुरुआत को रोकने के लिए नहीं बनाए गए हैं.
  • उन्‍होंने कहा, 'ये टीके पहले से कैंसर का इलाज करा चुके लोगों में रोग के दोबारा होने को रोकने के लिए हैं.'
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कैंसर की 'चमत्‍कारी' मानी जा रही वैक्‍सीन पर एक्‍सपर्ट ने बड़ा अपडेट दिया है. आईएमएम की साइंटिस्‍ट कमिटी के चेयरमैन डॉ राजीव जयदेवन का कहना है कि कैंसर के नये टीकों का उद्देश्य स्वस्थ व्यक्तियों में कैंसर की शुरुआत को रोकना नहीं है बल्कि यह पहले से इस बीमारी का इलाज करा चुके लोगों में इसको (कैंसर) दोबारा होने से रोकने के लिए हैं. इस अपडेट के बाद लोगों के बीच उत्‍सुकता बढ़ गई है कि क्‍या ये टीके कैंसर होने से बचाने में कारगर नहीं है. आइए जानते हैं एकसपर्ट ने कैंसर के टीकों पर क्‍या कुछ कहा है.  

कैंसर की वैक्‍सीन पर बड़ा अपडेट 

केरल स्थित 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन' (आईएमए) के रिसर्च सेक्‍शन के संयोजक और कोच्चि स्थित आईएमए की वैज्ञानिक समिति के चैयरमेन डॉ राजीव जयदेवन ने कहा, 'ये चिकित्सीय कैंसर टीके हैं जो पहले से कैंसर से पीड़ित लोगों में रोग को दोबारा होने से रोकने के लिए बनाए गए हैं न कि स्वस्थ लोगों में इसकी शुरुआत को रोकने के लिए.' उन्होंने कोच्चि में आयोजित 'गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजी सोसायटी' (जीआईओएस) के दूसरे वार्षिक सम्मेलन की शुरूआत के मौके पर यह बात कही.

इम्‍यूनोथेरेपी की तरह है कैंसर की वैक्‍सीन 

जयदेवन ने एक बयान में कैंसर के टीकों के निर्माण सहित इससे होने वाले लाभ के बारे में बताया. उन्होंने बताया, 'यह एक प्रकार की 'इम्यूनोथेरेपी' है, जो शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को इस तरह प्रशिक्षित करती है कि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचान कर उन्हें नष्ट कर सके.' आयोजकों ने बताया कि तीन दिवसीय सम्मेलन कोलोरेक्टल कैंसर (सीआरसी) पर केंद्रित है, जो एक ऐसी बीमारी है जिसके मामले वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे हैं. बता दें कि कोलोरेक्टल कैंसर बड़ी आंत (कोलन) या मलाशय में शुरू होता है.

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