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This Article is From Dec 24, 2025

Veer Bal Diwas 2025: क्यों मनाया जाता है वीर बाल दिवस? जानिए इस दिन का इतिहास

Veer Bal Diwas History: भारत में हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है. आइए जानते हैं इस दिन का इतिहास-

Veer Bal Diwas 2025: क्यों मनाया जाता है वीर बाल दिवस? जानिए इस दिन का इतिहास
वीर बाल दिवस का इतिहास

Veer Bal Diwas History: भारत में हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है. यह दिन सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों- जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के अद्वितीय बलिदान को याद करने के लिए समर्पित है. गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्रों ने बहुत कम उम्र में धर्म, सच्चाई और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. उनका साहस आज भी देश को प्रेरणा देता है. आइए जानते हैं इस दिन का इतिहास-

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वीर बाल दिवस का इतिहास

गुरु गोबिंद सिंह जी सिख धर्म के महान गुरु थे. उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संदेश दिया. उनके चार पुत्र थे- साहिबजादा अजित सिंह, साहिबजादा जुझार सिंह, साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह.

सन् 1705 के आसपास पंजाब में मुगल शासकों का अत्याचार बढ़ गया था. मुगल सेना गुरु गोबिंद सिंह जी को पकड़ना चाहती थी. इस कारण गुरु जी को अपने परिवार से अलग होना पड़ा. उनके दो बड़े पुत्र, साहिबजादा अजित सिंह और साहिबजादा जुझार सिंह, मुगल सेना से युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए. उस समय उनकी उम्र बहुत कम थी, लेकिन उनका साहस अद्भुत था.

गुरु गोबिंद सिंह जी की माता, माता गुजरी अपने दो छोटे पोतों, साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह के साथ छिपकर रह रही थीं. दुर्भाग्य से, वे मुगलों के हाथों पकड़ लिए गए. मुगल शासकों ने दोनों छोटे साहिबजादों पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला, लेकिन उन्होंने सिख धर्म छोड़ने से इनकार कर दिया. इसके बाद उन्हें दीवार में जिंदा चिनवा दिया गया. यह घटना भारतीय इतिहास की सबसे हृदयविदारक घटनाओं में से एक है. अपने पोतों की शहादत का समाचार सुनकर माता गुजरी जी ने भी अपने प्राण त्याग दिए.

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वीर बाल दिवस की शुरुआत

भारत सरकार ने वर्ष 2022 में यह घोषणा की कि हर साल 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाएगा. इसका उद्देश्य देश के बच्चों और युवाओं को साहिबजादों के बलिदान से परिचित कराना है. इस दिन स्कूलों, कॉलेजों और धार्मिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.

वीर बाल दिवस का महत्व

वीर बाल दिवस हमें यह सिखाता है कि साहस उम्र का मोहताज नहीं होता. गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों ने यह दिखा दिया कि सच्चाई और आत्मसम्मान के लिए खड़े होना सबसे बड़ा धर्म है. यह दिन केवल सिख समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का प्रतीक है. यह बच्चों को ईमानदारी, निडरता और बलिदान का महत्व समझाता है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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