विज्ञापन
This Article is From Apr 21, 2025

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे महाराष्ट्र में क्या खेल करने जा रहे, एकनाथ शिंदे का क्या है इसमें रोल

Uddhav Raj Shinde Alliance: उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बयान बता रहे हैं कि ये तीनों एक-साथ आने की सोच रहे हैं. यहां समझिए इनका साथ आना क्या संभव है...

Shiv Sena MNS Alliance: उद्धव, राज और शिंदे के बयानों ने महाराष्ट्र में हलचल मचा दी है.
'यह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट थी. गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई. सिर्फ भोजन का निमंत्रण था और बालासाहेब ठाकरे की यादें ताजा की. राज ठाकरे लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के साथ थे. राज ठाकरे और हमारे विचार मेल खाते हैं, इसलिए विरोधियों को चिंता करने की जरूरत नहीं, उन्हें अपना काम करना चाहिए. बाला साहब ठाकरे के समय से हम साथ में काम करते थे, कुछ कारण की वजह से बीच में हमारी मुलाकात नहीं होती थी. वो कारण आपको पता हैं, लेकिन अब हम कभी भी मिल सकते हैं और बात कर सकते हैं. वह भी मुझसे मिलते हैं…हर भेंट का राजनीतिक अर्थ निकालना उचित नहीं है.'

एकनाथ शिंदे

15 अप्रैल 2025 को राज ठाकरे से मुलाकात के बाद
'महाराष्ट्र हित के सामने हमारे झगड़े, हमारी बातें छोटी होती हैं. महाराष्ट्र बहुत बड़ा है. ये झगड़े और विवाद महाराष्ट्र और मराठी लोगों के अस्तित्व के लिए बहुत महंगे हैं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि एक साथ आने और एक साथ रहने में कोई कठिनाई है, लेकिन विषय केवल इच्छा का है. यह केवल मेरी इच्छा का मामला नहीं है. यह मेरे स्वार्थ का मामला भी नहीं है. मुझे लगता है कि बड़े चित्र को देखना महत्वपूर्ण है. मेरा मतलब यह है कि महाराष्ट्र के सभी राजनीतिक दलों के मराठी लोगों को एक साथ आकर एक पार्टी बनानी चाहिए.'

राज ठाकरे

महेश मांजरेकर के पॉडकास्ट में
‘मैं साथ आने के लिए तैयार हूं. मैं छोटी-मोटी घटनाओं को अलग रखते हुए महाराष्ट्र के हित में आगे आने के लिए तैयार हूं. मैंने सभी झगड़ों को खत्म कर दिया है. महाराष्ट्र का हित मेरी प्राथमिकता है.' 

उद्धव ठाकरे

भारतीय कामगार सेना की 57वीं वार्षिक आम बैठक में

ये 3 बयान एक के बाद एक आए और महाराष्ट्र डोलने लगा. इसकी धमक दिल्ली तक सुनाई दे रही हैं. आखिर महाराष्ट्र की मुंबई देश का ग्रोथ इंजन है. इन तीनों बयानों से ये लग रहा है कि तीनों साथ आने का मन बना रहे हैं. मगर क्या ये संभव है जानने से पहले जान लीजिए कि तीनों आखिर क्यों साथ आना चाहते हैं.

  1. राज ठाकरे का अपना बेटा भी लोकसभा चुनाव हार चुका है. पार्टी लगातार सिमटती जा रही है. अगर जल्द कुछ न किया तो महाराष्ट्र की राजनीति में दखल बहुत कम रह जाएगा. इसीलिए हिंदू कार्ड से अब मराठी कार्ड पर लौट रहे हैं.
  2. उद्धव ठाकरे से हिंदू वोटर छिटक गए हैं. कांग्रेस से हाथ मिलाने के बाद हिंदू उद्धव ठाकरे पर अब कम से कम आंख मूंदकर भरोसा तो नहीं कर रहे. रही-सही कसर एकनाथ शिंदे ने पार्टी तोड़कर कर दी. शिवसैनिक भी उद्धव का साथ छोड़ गए. अब अगर जल्दी कुछ नहीं किया तो पार्टी कांग्रेस की पिछलग्गू बनकर रह जाएगी.
  3. एकनाथ शिंदे की स्थिति इन दोनों से फिर भी ठीक है. वो अभी महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री हैं. शिवसेना के भी सर्वेसर्वा हैं. हालांकि, उनकी टीस ये है कि उन्हें बीजेपी ने दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनाया. महाराष्ट्र में बीजेपी की बढ़ती ताकत से वो भी थोड़ा असहज हैं और चाहते हैं उनके पास विकल्प खुले रहें.

क्या भूल पांएगे तीनों अपने-अपने जख्म

  1. 90 के दशक में राज ठाकरे को बाला साहेब ठाकरे का हर कोई उत्तराधिकारी मानता था. पार्टी में बाला साहेब के बाद उन्हीं की चलती थी, मगर फिर बाला साहेब ने उद्धव को धीरे-धीरे बढ़ाना शुरू किया और अंतत: राज ठाकरे शिवसेना में किनारे कर दिए गए. आखिरकार उन्होंने एमएनएस बन ली.
  2. उद्धव ठाकरे हमेशा से राज ठाकरे से राजनीति में दूरी बनाकर रखते आए हैं. उन्हें राज ठाकरे की लोकप्रियता का भी अंदाजा है. अगर राज ठाकरे वापस लौट गए तो फिर पार्टी उन्हीं के कंट्रोल में रहेगी, इसको लेकर वो सशंकित रहते हैं.
  3. एकनाथ शिंदे को लेकर भी राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के मन में गहरे जख्म हैं. राज ठाकरे ने जब पार्टी छोड़ी तो एकनाथ शिंदे ने उद्धव का साथ दिया. वहीं जब उद्धव मुख्यमंत्री बने तो विधायकों को लेकर अलग पार्टी बना ली. 
  4. एकनाथ शिंदे भी उद्धव ठाकरे से जख्म खाए हुए हैं. एकनाथ शिंदे खुद आरोप लगा चुके हैं कि उद्धव ठाकरे उन्हें नीचा दिखाते थे. उनकी सरकार और पार्टी में पूछ नहीं थी. राज ठाकरे से उनके संबंध ठीक हैं, मगर बात ये है कि कौन किसके नीचे काम करेगा.

तीनों का एक होना क्यों मुश्किल

  • राज ठाकरे कभी उद्धव ठाकरे के नीचे काम नहीं करना चाहेंगे.
  • उद्धव ठाकरे भी राज ठाकरे के नीचे काम करना नहीं चाहेंगे.
  • एकनाथ शिंदे भी अब दोनों के नीचे काम करना नहीं चाहेंगे.
  • तीनों दलों का गठबंधन भी मुश्किल है.
  • कारण है तीनों दलों की सबसे ज्यादा ताकत मुंबई में ही है.
  • मुंबई में भी तीनों दलों के गढ़ भी लगभग एक ही हैं.
  • ऐसे में सीटों के बंटवारे को लेकर भी मुश्किल होगी.

हां, ये जरूर है कि तीनों की सोच और जरूरत जरूर है कि बीजेपी को टक्कर देने के लिए साथ आना जरूरी है, मगर कैसे? इसका जवाब तीनों में से किसी के पास नहीं है. राज ठाकरे ने महेश मांजरेकर के पॉडकास्ट में ही पहली बार साथ आने की बात नहीं कही है. उन्होंने कई बारे ये बातें कहीं हैं. एक पॉडकास्ट में तो उन्होंने बताया था कि एक बार खुद उद्धव ठाकरे ने उन्हें फोन कर कहा कि साथ आते हैं. मगर फिर बात आगे नहीं बढ़ सकी. हालांकि, राजनीति में कुछ भी संभव है. और ये खिड़की इसलिए खोली गई है ताकी भविष्य में अगर मजबूरी आ जाए तो मिला जा सके. हालांकि, इसके बावजूद दिल्ली इसे लेकर सतर्क तो जरूर हो गई होगी. 

फडणवीस का भी आया बयान

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे साथ में आते हैं इससे हमें खुशी होगी. अगर कोई भी बिछड़े लोग साथ में आते हैं या उनका विवाद खत्म होता है तो अच्छी बात है. इसमें हम क्यों बुरा क्यों मानें. साथ आएं, अच्छी बात है लेकिन इससे ज्यादा हम कुछ नहीं कह सकते. उन्होंने ऑफर किया, इन्होंने जवाब दिया, फिर इन्होंने शर्तें रखीं, इस पर वह जवाब देंगे, मैं क्या बोलूं?

ये भी पढ़ें

2014 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन टूटने की अंदरूनी कहानी पहली बार देवेंद्र फडणवीस ने सुनाई

हिंदुत्ववाद और मराठीवाद के बीच झूलती राज ठाकरे की राजनीति

शिंदे पर कॉमेडी करने वाले कुणाल कामरा का क्या हुआ? बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी ये हिदायत

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Uddhav Raj Shinde Alliance, Uddhav Raj Shinde Statements, Uddhav Thackeray, Raj Thackeray, Eknath Shinde
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com