- सुप्रीम कोर्ट में CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वीडियो दिखाने से इनकार करते हुए सुनवाई में समय बर्बाद न करने की बात कही
- वकील नरेंद्र मिश्रा ने पुलिस द्वारा छात्रों की कथित पिटाई और इसके वीडियो होने की बात कही थी
कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस के एक्शन का मुद्दा आज सुप्रीम कोर्ट में उठा. हालांकि CJI ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया. वकील के वीडियो देखने की बात पर उन्होंने कहा कि हमारा वक्त बर्बाद मत कीजिए. अदालत में सुनवाई के दौरान वकील नरेंद्र मिश्रा ने CJP प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों के साथ कथित मारपीट का मुद्दा उठाया. वकील ने कहा कि छात्रों को पीटा गया. उनकी तीन एप्लिकेशन्स हैं, उनके पास इसके वीडियो भी हैं.
समय बर्बाद मत कीजिए
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए, हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते. बता दें कि यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से की गई. बता दें कि सोमवार को सीजेपी के ऑनलाइन आंदोलन के आह्वान पर हजारों लोग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली की सड़कों पर उतरे थे.
हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते
प्रदर्शनकारियों ने जब संसद की ओर कूच करने की कोशिश की तो पुलिस ने उनको रोकने की कोशिश की. लेकिन वे नहीं माने तो पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज करना पड़ा. बता दें कि ये विरोध प्रदर्शन नीट पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर हो रहा था. सुप्रीम कोर्ट में जब छात्रों की पिटाई का मुद्दा उठा तो वकील से मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा, "हम कोई वीडियो नहीं देखना चाहते."
'पुलिस के एक्शन में सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल'
बता दें कि सीजेपी का आरोप है कि पुलिस के एक्शन में सैकड़ों प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं. विपक्ष भी कुछ ऐसे ही दावे कर रहा है. CJP के एक प्रवक्ता ने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में शर्मनाक दिन करार दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने उन ईमानदार छात्रों को बेरहमी से पीटा, जो एक जायज मुद्दे के लिए वहां पहुंचे थे.
दिल्ली हाई कोर्ट ने भी तत्काल सुनवाई से किया इनकार
मंगलवार को, दिल्ली हाई कोर्ट ने सीजेपी के संसद मार्च में शामिल छात्रों के खिलाफ पुलिस द्वारा बल के इस्तेमाल से जुड़ी याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया था. हाी कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा था कि अदालत को इन सब मामलों में न घसीटें. अदालत ने मामले को बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था.
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