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बुलेट ट्रेन: दिल्ली अब दूर नहीं, लखनऊ-वाराणसी जैसे शहरों से डेली अपडाउन, घर से लेकर महानगर तक हालात बदलेंगे

Bullet Train: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का सपना अगले साल तक पूरा होने जा रहा है. सरकार का अब फोकस दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, वाराणसी, चेन्नई जैसे बड़े महानगरों के बीच हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का नेटवर्क बनाने का है, ताकि महानगरों का बोझ घटे और शहरों के बीच आवाजाही आसान हो.

बुलेट ट्रेन: दिल्ली अब दूर नहीं, लखनऊ-वाराणसी जैसे शहरों से डेली अपडाउन, घर से लेकर महानगर तक हालात बदलेंगे
Delhi Varanasi Bullet Train: दिल्ली वाराणसी हाईस्पीड रेल कॉरिडोर
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नई दिल्ली:

देश की पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है. इतना ही नहीं आने वाले समय में देश में 7 और बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बनेंगे. ये जब बन जाएंगे तो बुलेट ट्रेन से लोग लखनऊ से दिल्ली 2 घंटे में, वाराणसी से दिल्ली 3 घंटे में पहुंच जाएंगे. ये बातें एनडीटीवी से बातचीत में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताईं. सोचिए जब लोग इतने कम समय में राजधानी पहुंचेंगे तो क्या होगा? ये सिर्फ तेज सफर का मामला नहीं है, इससे बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव होंगे. 

महानगरों का बोझ घटेगा, जीवन स्तर सुधरेगा

दिल्ली या ऐसे ही किसी महानगर मुंबई, चेन्नई,  हैदराबाद, लखनऊ, वाराणसी में रहने से अवसर तो मिलते हैं लेकिन जीवन स्तर घट जाता है. अगर आपके पास एक लेवल से ज्यादा कमाई नहीं है तो आप महानगर में वो सुविधाएं नहीं जुटा सकते जो आपके आपको अपने गांव अपने कस्बे में सहज उपलब्ध है. और कुछ चीजें तो ऐसी हैं जिनको कितना भी पैसा खर्च करके नहीं जुटाया जा सकता. जैसे कि साफ हवा, साफ पानी. बहुत कम ही लोग ऐसे हैं तो खुली जगह में रहने की कीमत चुका पाते हों जहां धूप-हवा खूब आती हो. लेकिन अपना गांव में, अपने कस्बे में आम तौर पर ये पहले से होता है और काफी कम कीमत में जुटाया जा सकता है. तो पहली बात यही है कि अगर किसी को एक दो घंटे में महानगर तक पहुंचने की सुविधा मिले और बुलेट ट्रेन का किराया भी बहुत ज्यादा न हो तो हो सकता है कि काफी लोग अपने शहर, अपने घर से ही महानगर आ जाकर अपना काम कर लें. 

 ये भी पढ़ें - दिल्ली से सिलीगुड़ी नई बुलेट ट्रेन का ऐलान, 6 घंटे में 1500 किमी, लखनऊ, बनारस-पटना से बंगाल तक 11 स्टेशन
 

जैसे मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की ही बात कर लें. ये ट्रेन सिर्फ दो महानगरों को नहीं जोड़ेगी. बीच में ये वापी, बिलिमोरा, भरूच और आणंद जैसे छोटे शहरों और उनसे लगे गांवों को भी जोड़ देगी.इसका दूसरा फायदा ये होगा कि महानगरों पर दबाव घटेगा. यहीं से प्रदूषण, पानी की दिक्कत, ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं के कम होने का रास्ता खुलेगा. जब छोटी दूरी ट्रेनों से जल्दी तय होगी तो विमान के बजाय ट्रेन का इस्तेमाल करेंगे. इसका आर्थिक पहलू तो है ही इसके साथ ही पर्यावरण के लिहाज भी ट्रेनें बेहतर हैं. इसके साथ ही शहरों में प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमतों पर भी लगाम लगेगा.कुल मिलाकर कस्बों और गांवों ही नहीं शहरों के लोगों की जिंदगी भी बेहतर होगी.

अश्विनी वैष्णव

रेल मंत्री

रोजगार के अवसर

शहरों में रहना इतना महंगा है कि चाहकर भी काफी लोग यहां नहीं बस सकते. ऐसे में कोई योग्य व्यक्ति भी रोजगार के अवसर को नहीं ले पाता. जब एक जगह से दूसरी जगह 6-7 घंटे के बजाय एक दो घंटे में पहुंच जाएंगे तो ये संभव होगा कि एक ही दिन में अपने शहर से महानगर में जा सकेंगे. वहां रुकने की जरूरत नहीं होगी. ऐसी स्थिति में बहुत सारे युवा रोजगार के नए अवसरों को ले पाएंगे. डे ट्रिप संभव होने से न सिर्फ वो अपने घर में रहकर शहर में काम कर पाएंगे बल्कि शहर में रहने का खर्च भी नहीं वहन करना होगा.

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बुलेट ट्रेन से फायदा होगा कि जो एक रात ठहरकर लौट आना चाहते हैं उनके लिए भी होटल का खर्च बचेगा. इस तरह से उनके पास अच्छी बचत होगी और आर्थिक रूप से उनका परिवार मजबूत होगा. इसके अलावा इतने सारे स्टेशन खुलने से उनके आसपास आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी. इससे फिर से रोजगार पैदा होंगे. चीन में खासकर ऐसी तेज ट्रेनों के कारण सुदूर इलाकों में आर्थिक गतिविधि बढ़ी और इसका फायदा पूरे देश और समाज को हुआ है.

बुलेट ट्रेन बचाएगा समय

  • मुंबई-अहमदाबाद : 1.57 घंटा
  • मुंबई-पुणे : 48 मिनट
  • बेंगलुरु-चेन्नई : 73 मिनट
  • बेंगलुरु-हैदराबाद :  2.10 घंटा 
  • पुणे-हैदराबाद : 2. 8 घंटा
  • दिल्ली-लखनऊ : 2 घंटे
  • दिल्ली-वाराणसी : 3.15 घंटे
  • दिल्ली-सिलीगुड़ी : 6 घंटे

बुलेट ट्रेन से बेहतर जीवन  

अमूमन बड़ी आबादी है जिसके काफी घंटे सफर में ही बीत जाते हैं, जब सफर तेज और आरामदायक होगी तो पैसों की बचत के साथ ही थकावट भी कम होगी. इसका फायदा ये होगा कि लोग अपने परिवार को ज्यादा वक्त दे पाएंगे.  एक सामाजिक पहलू ये है कि आज भी हमारे गांवों और शहरों में फर्क है. शहर इंफ्रा के लिहाज से विकसित दिखते हैं तो शहर पिछड़े.

बुलेट ट्रेन परियोजना भारत के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित होगी। तेज कनेक्टिविटी के कारण महानगरों से जुड़े छोटे शहर और कस्बे नए विकास केंद्र के रूप में उभरेंगे। जहां आज लोग नौकरी के लिए बड़े शहरों में बसने को मजबूर हैं, वहीं भविष्य में वे अपने गृह नगर में रहकर भी महानगरों में काम कर सकेंगे। इससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिलेगी. 

यश मिगलानी

मिगसन ग्रुप एमडी

प्रधानमंत्री मोदी का एक मूल वाक्य है सबका साथ-सबका विकास. इस लिहाज से भी ये बुलेट ट्रेन समावेशी विकास को बढ़ावा देगी. जब गांव के लोग शहर ज्यादा आएंगे और शहर के लोग भी सुगमता से गांव जा पाएंगे तो सामाजिक और सांस्कृतिक दूरियां कम होंगी. इसको समझने के लिए आप यूरोप, चीन और जापान के उदाहरण को देख सकते हैं.

दुनिया के कई देशों का अनुभव बताता है कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के आसपास रियल एस्टेट विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है. सामाजिक जीवन स्तर में भी सुधार आता है. हाईस्पीड डिजिटल युग में अब शहरों के सफर के लिए पूरा दिन नहीं खपाया जा सकता.भारत में भी बुलेट ट्रेन स्टेशनों के आसपास नए बिजनेस डिस्ट्रिक्ट, रिटेल हब, ऑफिस स्पेस और आवासीय परियोजनाएं विकसित होंगी. इससे न केवल स्थानीय संपत्तियों के मूल्य में वृद्धि होगी बल्कि निवेशकों को भी दीर्घकालिक और स्थिर रिटर्न के अवसर प्राप्त होंगे.

कुशाग्र अंसल

अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर 

इन देशों में लंबे से समय लंबी दूरी की तेज ट्रेनें चल रही हैं, लिहाजा वहां गांव और शहर के बीच मौकों में उतना गैप नहीं मिलेगा. साथ ही सांस्कृतिक और सामाजिक अंतर उतना नहीं दिखेगा.कुल मिलाकर ये बुलेट ट्रेन की पटरी वो पटरी भी बन सकती है जिसपर 2047 के विकसित भारत तक का सफर अपना देश तय कर सकता है.

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