सरकार न केवल मैदानी इलाकों में एक्सप्रेसवे-हाईवे का जाल बिछा रही है, बल्कि दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लोगों की राह आसान कर रही है. सरकार लद्दाख में दो नए पुल बॉर्डर एरिया में बना रही है. ये पुल नुब्रा घाटी के दूर-दराज के गांवों को जोड़ेंगे.इससे जरूरी सेवाओं की सीमावर्ती इलाकों में पहुंच बेहतर होगी. साथ ही पर्यटन और कारोबार को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे दिल्ली से लद्दाख जाने वाले यात्रियों के लिए भी दूरदराज के गांवों तक घूमना-फिरना आसान हो जाएगा.
लद्दाख की नुब्रा घाटी में एक नया पुल
लद्दाख की नुब्रा घाटी में एक नया मोटर पुल बनने से लगभग 70 किलोमीटर की यात्रा घटकर सिर्फ 500 मीटर रह जाएगी. इससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए बॉर्डर के दूर-दराज के गांवों तक पहुंचना आसान हो जाएगा. ये बर्मा-सुमूर पुल बनने से सुमूर को बर्मा, चारासा, कुरी और मुर्गी से जोड़ेगा. ये पुल पूरा होने पर अस्पताल, स्कूल, बाजार, सरकारी सेवाओं और जिला मुख्यालय तक बेहद छोटा रास्ता मिलेगा.छोटा रास्ता होने से नुब्रा के मौजूदा टूरिस्ट सर्किट से दूर के गांवों में भी ज्यादा पर्यटक आ सकते हैं. जिससे होमस्टे, लोकल ट्रांसपोर्ट, हैंडीक्राफ्ट और एडवेंचर टूरिज्म के मौके बनेंगे.
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Ladakh Bridge VK Saxsena
सियाचिन नदी पर बनने वाला दूसरा पुल
सियाचिन नदी पर बनने वाला दूसरा पुल टोंगस्टेड, यारमा गोंबो, डोंगसा, नुंगस्टेड, हेनाची, चांगलुंग और समोसा तक हर मौसम में पहुंच सुनिश्चित करेगा. लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना ने सोमवार को नुब्रा जिले के अपने पहले दौरे के दौरान बर्मा-सुमूर और टोंगस्टेड को जोड़ने वाले मोटर पुलों की आधारशिला रखी.लद्दाख प्रशासन के स्पेशल डेवलपमेंट पैकेज के तहत इन दो प्रोजेक्ट के लिए 83 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. बॉर्डर इलाके में रहने वाले 1300 से ज्यादा लोगों को फायदा होने की उम्मीद है.
बर्मा-सुमूर प्रोजेक्ट के लिए 64 करोड़
बर्मा-सुमूर पुल 70 किलोमीटर की यात्रा 500 मीटर में बदल जाएगी. बर्मा-सुमूर प्रोजेक्ट के लिए 64 करोड़ रुपये की हरी झंडी दी गई है. इसमें तीन जगहों पर कुल 470 मीटर लंबे पुल, 2.5 किलोमीटर लंबी अप्रोच रोड और छह RCC पुलिया शामिल हैं.इस प्रोजेक्ट से बर्मा, चारासा, कुरी और मुर्गी के लगभग 848 निवासियों को सीधा फ़ायदा होगा.यात्रा का समय कम होने के अलावा, नया रास्ता किसानों के लिए अपनी उपज बाजार तक ले जाना और गांवों तक जरूरी सामान पहुंचाना आसान बना देगा.अफसरों को उम्मीद है कि बेहतर कनेक्टिविटी से खेती, टूरिज्म और स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा मिलेगा.
सियाचिन नदी पर नया पुल
टोंगस्टेड प्रोजेक्ट में सियाचिन नदी पर 160 मीटर लंबा स्टील प्लेट गर्डर ब्रिज 19.29 करोड़ की लागत से बनेगा. इस पुल को ऊंचे पहाड़ी इलाके और वहां के मुश्किल मौसम को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है.इससे सात गांवों को साल भर कनेक्टिविटी मिलेगी और 500 से ज्यादा लोगों को सीधा फायदा होगा. नए लिंक से लोगों, खेती के सामान और जरूरी चीजों को लाने-ले जाने में आसानी होगी, खासकर बाढ़ और खराब मौसम के दौरान. इससे इलाके के एक अहम धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र, यारमा गोंबो तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा. सक्सेना ने कहा कि नुब्रा की नदियां खेती, बागवानी और स्थानीय लोगों की आजीविका का आधार हैं, लेकिन पानी का स्तर बढ़ने या मौसम खराब होने पर ये आवाजाही में रुकावट भी बन सकती हैं.उन्होंने कहा कि हर मौसम में काम आने वाले ये पुल दूरदराज के इलाकों तक साल भर सुरक्षित और भरोसेमंद पहुंच देंगे.

सीमावर्ती गांवों में पर्यटन और रोज़गार
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से सैलानियों को नुब्रा घाटी के कम घूमे-फिरे इलाकों तक जाने में मदद मिल सकती है और स्थानीय लोगों के लिए कमाई के नए जरिये बन सकते हैं.अधिकारियों का मानना है कि ये प्रोजेक्ट होमस्टे, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, हस्तशिल्प बेचने वालों और एडवेंचर-टूरिज़्म के कारोबार को बढ़ावा देंगे, खासकर स्थानीय युवाओं के बीच. सक्सेना ने लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से वहां सड़कों, रणनीतिक पुलों और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के विस्तार का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया.
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