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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: कहां से शुरू हुआ था इसका सफर, कितनी बड़ी है भारत की भूमिका

ब्रिक्स देशों का शिखर सम्मेलन 11-12 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है. भारत चौथी पर बार इस शिखर सम्मेलन का आयोजन कर रहा है. आइए हम आपको बताते हैं कि आज की दुनिया में ब्रिक्स का महत्व क्या है और इसका अब तक का सफर कैसा रहा है.

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: कहां से शुरू हुआ था इसका सफर, कितनी बड़ी है भारत की भूमिका
नई दिल्ली:

ब्रिक्स का 18वां शिखर सम्मेलन में राजधानी दिल्ली में शुक्रवार से शुरू हो रहा है. यह दो दिन तक चलेगा. भारत इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी ऐसे समय कर रहा है, जब दुनिया दो युद्धों के साये में जी रही है. उम्मीद है कि इस सम्मेलन में खाद्य, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपदा न्यूनीकरण और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं में सामूहिक लचीलापन लाने पर जोर दिया जाए. ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य भारत चौथी बार शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. इस सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान,रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के भाग लेने की संभावना है. आइए हम बताते हैं कि ब्रिक्स क्या और इसकी अब तक की यात्रा कैसी रही है.

कैसे अस्तित्व में आया  BRIC

अमेरिकी वित्तीय कंपनी गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ'नील ने 2001 में अपना एक शोध पत्र प्रकाशित किया. इसका शीर्षक था, बिल्डिंग बेटर ग्लोबल इकोनॉमिक ब्रिक्स (Building Better Global Economic BRICs). इसमें उन्होंने कहा कि ब्राजील, रूस, भारत और चीन दुनिया में तेजी से विकास कर रही अर्थव्यवस्थाएं हैं. इसमें कहा गया था कि आने वाले समय में इन चार देशों की अर्थव्यवस्थाएं दुनिया की अमीर G7 अर्थव्यवस्थाओं को चुनौती दे सकती हैं. इन चार देशों के नाम के शुरुआती अक्षरों से BRIC बना. इसमें बी ब्राजील, आर रूस, आई इंडिया और सी चीन के लिए इस्तेमाल किया गया. ब्रिक शब्द इसी शोध पत्र में सबसे पहले आया. इन चार देशों को एक साथ लाने की पहल सबसे पहले रूस ने की. दरअसल रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पश्चिमी देशों के प्रभाव का संतुलन चाहते थे.साल 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान BRIC देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक हुई. इसी बैठक में BRIC को औपचारिक रूप दिया गया. इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में BRIC का पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया.

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BRIC कैसे बन गया BRICS

साल 2010 में अमेरिका के न्यूयॉर्क में BRIC देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई. इसमें दक्षिण अफ्रीका को ब्रिक में शामिल करने का फैसला हुआ. इसके बाद BRIC का नाम BRICS हो गया. दक्षिण अफ्रीका 2011 में चीन के सान्या में हुए BRICS के तीसरे शिखर सम्मेलन में पहली बार शामिल हुआ. 

इसके बाद जनवरी 2024 से ब्रिक्स में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को पूर्णकालीक सदस्य बनाया गया. वहीं जनवरी 2025 में इंडोनेशिया को BRICS का पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया. साल 2025 में ही बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को  BRICS में पार्टनर देश का दर्जा दिया गया. 

आज ब्रिक्स दुनिया के 11 प्रमुख उभरते बाजारों और विकासशील देशों का एक समूह है. इसमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. इसका प्रमुख उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच बातचीत और सहयोग बढ़ाना है. यह समूह अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और शासन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा के लिए एक मंच उपलब्ध कराता है.

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कहां आयोजित किया गया था ब्रिक का पहला शिखर सम्मेलन

साल 2008 में आई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंदी के साये में BRIC का पहला शिखर सम्मेलन 16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित किया गया था. इस सम्मेलन में नेताओं ने एक संयुक्त घोषणा जारी किया था. इसमें कहा गया था कि आर्थिक संकट से निपटने के लिए G20 की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने ऐसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था बनाने की मांग की, जिसमें विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक में सुनी जाए और उनका प्रतिनिधित्व और बेहतर हो. सम्मेलन में BRIC देशों ने बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया और व्यापार में संरक्षणवाद का विरोध किया. उन्होंने विज्ञान, ऊर्जा, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता के क्षेत्र में सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया था.इस सम्मेलन में आतंकवाद की निंदा की गई और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक समझौता बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की गई थी.

भारत ने ब्रिक के पहले शिखर सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में समान और न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व,  खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में पारदर्शी तरीके से निर्णय लेने की जरूरत पर जोर दिया था. इसी सम्मेलन ने आगे चलकर सहयोग के तीन प्रमुख क्षेत्रों राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, आर्थिक और वित्तीय सहयोग और लोगों के बीच संपर्क और सहयोग की नींव रखी.इसी बैठक में हर साल ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन और मंत्रिस्तरीय बैठकों को नियमित करने की व्यवस्था बनी थी. 

ब्रिक्स के शिखर सम्मेनल का आयोजन चौथी बार भारत में किया जा रहा है.

ब्रिक्स के शिखर सम्मेनल का आयोजन चौथी बार भारत में किया जा रहा है.
Photo Credit: PTI

भारत में कितनी बार हुए ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन

इससे पहले भारत को तीन बार ब्रिक्स की अध्यक्षता करने का मौका मिला है. भारत में ब्रिक्स का पहला शिखर सम्मेलन 2012 में आयोजित किया गया था.यह ब्रिक्स का चौथा शिखर सम्मेलन था. इसका आयोजन 29 मार्च 2012 को नई दिल्ली में हुआ था. इस सम्मेलन का थीम था, 'वैश्विक स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए BRICS साझेदारी(BRICS Partnership for Global Stability, Security and Prosperity.)'. इस सम्मेलन में जारी साझा घोषणा पत्र में वैश्विक अर्थव्यवस्था की असमान, धीमी रिकवरी,देशों पर बढ़ते कर्ज के जोखिम और सतत विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी. 
इस घोषणा पत्र में गरीबी खत्म करने, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने पर जोर दिया गया था. भारत ने कृषि, स्वास्थ्य और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग की नई पहल शुरू की. भारत के इन्हीं प्रयासों ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) और कंटिजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (CRA) जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं की नींव तैयार की. इस सम्मेलन से पहले BRICS जहां केवल वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर चर्चा का मंच था, वहीं सम्मेलन के बाद उसने कृषि, स्वास्थ्य, विज्ञान और वित्त जैसे कई क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ना शुरू किया.

भारत ने 8वें BRICS शिखर सम्मेलन की भी मेजबानी की. इसका आयोजन 15-16 अक्टूबर 2016 को गोवा में किया गया था. इस सम्मेलन की थीम थी 'जिम्मेदार, समावेशी और सामूहिक समाधान विकसित करना.(Building Responsive, Inclusive and Collective Solutions)'. इस सम्मेलन में गोवा घोषणा-पत्र जारी किया गया. इसमें नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत पर जोर दिया. खास तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की बात कही गई, ताकि विकासशील देशों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ सके. इसमें BRICS नेताओं ने Agenda 2030 और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई. भारत ने इस सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया. उसने आतंकवाद की फंडिंग रोकने के लिए फाइनेंशिएल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के मानकों को लागू करने पर जोर दिया.

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BRICS का 13वां शिखर सम्मेलन नौ सितंबर 2021 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया. यह साल BRICS की स्थापना का 15वां साल था.इसकी थीम थी BRICS@15: निरंतरता, मजबूती और सहमति के लिए BRICS देशों के बीच सहयोग (BRICS @ 15: Intra-BRICS Cooperation for Continuity, Consolidation and Consensus).' इस सम्मेलन में जारी नई दिल्ली घोषणा-पत्र में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधार, आतंकवाद से निपटने में सहयोग, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के लिए डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया गया था. 

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