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बांबे हाई कोर्ट ने SIR में नाम काटने पर स्टे देने से किया इनकार, कहा- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करें

बांबे हाई कोर्ट ने एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट नाम काटने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा है कि हमें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए.

बांबे हाई कोर्ट ने SIR में नाम काटने पर स्टे देने से किया इनकार, कहा- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करें
मुंबई:

बांबे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र में जारी वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं के नाम काटने पर लगाने से इनकार कर दिया है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह इनकार वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दी. स्टे देने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर चल रही सुनवाई को पूरा होने दीजिए. अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए तीन हफ्ते के लिए टाल दी है.  

किसने दायर की है एसआईआर के खिलाफ याचिका

वंचित बहुजन आघाड़ी की यूथ विंग के प्रमुख सागर रमेश गवाई ने एसआईआर के खिलाफ यह याचिका दायर की थी. उन्होंने अपनी याचिका में घर-घर जाकर वेरिफिकेशन (डोर-टू-डोर एन्युमरेशन) के दौरान नियमों की अनदेखी करने और मनमाने तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप लगाए गए हैं. 

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की तरफ से पेश सीनियर वकील आशुतोष कुंभकोणी ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने अंतरिम निर्देशों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की व्यापक सुनवाई कर रहा है और आठ अक्टूबर को इस पर आगे की सुनवाई होनी है. 

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने क्या कहा

इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में पहले से ही रोक (स्टे) के आदेश दिए जा चुके हैं. अग-अलग अदालतों में एक ही मामले की समानांतर सुनवाई का कोई मतलब नहीं है. पहले सुप्रीम कोर्ट को इस मामले की सुनवाई करने दीजिए.

इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि कम से कम इतना आदेश तो दिया जाए कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने तक महाराष्ट्र की मतदाता सूची से किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने तहा, ''नहीं, नहीं, नहीं. हम ऐसा कोई आदेश जारी नहीं करेंगे.हम न्यायिक प्रक्रिया और मर्यादा का पालन करेंगे.

चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील आशुतोष कुंभकोणी ने कहा कि कई हाई कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार किया है. कुछ अदालतों ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे स्थिति स्पष्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएं

इस पर अदालत ने कहा कि चूंकि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में आदेश दे चुका है, इसलिए अलग-अलग अदालतों में समानांतर सुनवाई का कोई मतलब नहीं है. एसआईआर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई  आठ अक्टूबर को होगी. वहीं बॉम्बे हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई तीन हफ्ते के लिए टाल दी है. 

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