सुप्रीम कोर्ट में SIR के मसले पर चुनाव आयोग ने विस्तार से जवाब देते हुए एफिडेविट दाखिल किया है. चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो अन्य आयुक्तों ने एक साझा हलफनामा दिया है और कहा कि आयोग में सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं. SIR वाले फैसले में भी सभी की राय का ध्यान रखा गया था.
इसके अलावा, आयोग ने SIR की प्रक्रिया का बचाव किया और कहा कि फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है. आयोग ने ECI-NET में अनधिकृत बदलाव के आरोपों का भी विरोध किया. इसके अलावा आयोग ने सारी याचिकाएं खारिज करने की मांग की.
सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने अपने काउंटर एफिडेविट में SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए याचिकाकर्ता के आरोपों को खारिज किया है.
आयोग का तर्क है कि SIR संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों के तहत कराया जा रहा है और वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया में कोई अवैध बदलाव नहीं किया गया है. इलेक्शन कमिशन ने मुख्य रूप से 11 दलीलें दी हैं.
आइए जानते हैं, अदालत में फॉर्म 6 से लेकर SIR तक पर आयोग ने क्या कहा?
1. SIR की वैधता पर आयोग का पक्ष: चुनाव आयोग ने कहा कि SIR के आदेश संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 के प्रावधानों के तहत जारी किए गए हैं. 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के SIR आदेश आयोग के निर्णयों के अनुरूप हैं. आयोग ने याचिका को गलत धारणाओं पर आधारित बताते हुए खारिज करने की मांग की है.
2. फॉर्म 6 में बदलाव परः आयोग ने साफ किया कि SIR के तीनों आदेशों से वोटर रजिस्ट्रेशन के फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है. आयोग के अनुसार, फॉर्म 6 नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए निर्धारित फॉर्म है. इसके साथ इस्तेमाल होने वाला 'डिक्लेरेशन फॉर्म' अलग दस्तावेज है, जिसे SIR प्रक्रिया के तहत लाया गया है.
3. दस्तावेजों को लेकर दलीलः आयोग ने कहा कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म 6 और डिक्लेरेशन फॉर्म की अलग-अलग भूमिकाएं हैं. डिक्लेरेशन फॉर्म का उद्देश्य आवेदक या उसके माता-पिता/दादा-दादी के पुराने SIR रिकॉर्ड से विवरण जोड़ना यानी मैपिंग करना है. पुराने रिकॉर्ड से विवरण जोड़ने के लिए पहले से उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है. यदि पुराने रिकॉर्ड से विवरण नहीं जुड़ता या उसमें विसंगति होती है, तो संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) नोटिस जारी कर पात्रता की जांच कर सकता है.
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4. पुराने मतदाता रिकॉर्ड से लिंकिंग की प्रक्रियाः आयोग के मुताबिक, वोटर अपने या अपने रिश्तेदारों के पुराने SIR रिकॉर्ड के आधार पर मैपिंग कर सकते हैं. 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 के आदेशों में डिक्लेरेशन फॉर्म के प्रारूप को संशोधित किया गया, लेकिन आयोग का दावा है कि इससे मूल पात्रता संबंधी आवश्यकताओं में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ. आयोग ने कहा कि यह व्यवस्था प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए की गई थी.
5. एन्युमरेशन के दौरान दस्तावेज नहीं लिए जाएंगेः आयोग के अनुसार, एन्युमरेशन फेज के दौरान वोटरों से कोई दस्तावेज इकट्ठा नहीं किया जाना है. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद जिन वोटरों की पुराने रिकॉर्ड से लिंकिंग नहीं हो पाती, उन्हें नोटिस दिया जाएगा. आयोग ने कहा कि इससे मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने का अवसर मिलता है.
6. फॉर्म 6 के साथ डिक्लेरेशन फॉर्म भीः आयोग ने कहा कि नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए वैधानिक फॉर्म 6 ही लागू रहेगा. SIR के दौरान फॉर्म 6 के साथ अलग डिक्लेरेशन फॉर्म भी देना होगा. आयोग ने यह भी कहा कि नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को फॉर्म 6 उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.
7. नाम काटे जाने पर नोटिस और सुनवाईः जिन मतदाताओं के एन्युमरेशन फॉर्म वापस नहीं आते, उनके मामले में BLO स्थानीय स्तर पर जानकारी लेकर संभावित कारण दर्ज कर सकते हैं. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए गए ऐसे लोगों की बूथवार लिस्ट संबंधित स्थानीय कार्यालयों में प्रदर्शित करने और मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है. आयोग ने कहा कि संबंधित ERO नोटिस जारी कर पात्रता की जांच कर सकते हैं.
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8. ECI-NET पोर्टल की सुरक्षाः आयोग ने कहा कि ECI-NET पोर्टल की सुरक्षा और कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए समिति गठित की गई है. पोर्टल में सुधार के लिए अधिकारियों से सुझाव लिए गए हैं. आयोग के अनुसार, ERO को वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, सुधारने या हटाने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है और पोर्टल पर बदलाव अधिकृत आदेश के आधार पर ही किए जाते हैं.
9. अपील की व्यवस्थाः आयोग ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने से जुड़े मामलों में अपील की व्यवस्था का उल्लेख किया. एफिडेविट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष नाम हटाए जाने या नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति उठाई जा सकती है. आयोग ने अपीलों की सुनवाई और उनके निपटारे से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी हवाला दिया है.
10. SIR का काम पूरा होने के करीबः आयोग के अनुसार, 24 जून 2025 और 27 अक्टूबर 2025 के आदेशों के तहत संबंधित राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी. 14 मई 2026 के आदेश के तहत आने वाले राज्यों में भी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी या अंतिम चरण में थी. एफिडेविट में कहा गया है कि फाइनल वोटर लिस्ट कई राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में प्रकाशित की जा चुकी थी.
11. याचिका खारिज करने की मांगः आयोग ने याचिकाकर्ता के आरोपों को भ्रामक और गलत बताया है. आयोग के मुताबिक, याचिका मुख्य रूप से एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे खुद याचिकाकर्ता ने भी जांच की जरूरत वाला बताया था. आयोग ने कहा कि समाचार रिपोर्ट को अपने-आप में तथ्यों का प्रमाण नहीं माना जा सकता. आखिर में आयोग ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताते हुए खारिज करने की मांग की है.
सारे फैसले सर्वसम्मिति से लिए जाते हैं
चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में कहा है कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे.
चुनाव आयोग ने कहा कि जवाबी हलफनामे को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों सहित आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी है.
आयोग ने साफ किया कि फाइल पर विचार के दौरान CEC या चुनाव आयुक्तों की ओर से की गई टिप्पणियों, सवालों या सुझावों को आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता.
आयोग ने बताया कि फाइल पहले एक निर्वाचन आयुक्त, फिर दूसरे निर्वाचन आयुक्त और उसके बाद CEC के पास जाती है. जरूरी मामलों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जाती है और उसे बाद में फाइल पर दर्ज किया जाता है.
ECI ने कहा कि यदि कोई अधिकारी उसे सौंपे गए अधिकारों से आगे बढ़कर आदेश जारी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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