
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली:
बिहार की हार पर अंदरूनी तकरार झेल रही मोदी सरकार के लिए एक और नया मोर्चा खुलता दिख रहा है। कई क्षेत्रों को विदेशी निवेश के लिए खोलने पर उसके फ़ैसले के विरोध में भारतीय मजदूर संघ उठ खड़ा हुआ है। भारतीय मजदूर संघ ने पीएम को चिट्ठी लिख कर अपील की है कि 15 सेक्टरों में विदेशी निवेश के फ़ैसले पर वो दोबारा विचार करें। चिट्ठी में कहा गया है कि ये फैसला करने से पहले मोदी सरकार को सभी पक्षों से इस पर राय लेनी चाहिये थी कि इससे लोगों को फायदा होगा भी या नहीं।
भारतीय मजदूर संघ की मांग है कि सरकार तत्काल उन सभी 15 सेक्टरों के स्टेकहोल्डर्स की बैठक बुलाए जिसमें विदेशी निवेश के नियमों को सरल बनाया गया है और उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश करे। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री वरजेश उपाध्याय ने एनडीटीवी से कहा, "अगर सरकार ने FDI पर हमारी चिता को दूर नहीं किया तो हम सड़क पर आंदोलन करेंगे"। भारतीय मजदूर संघ ने सरकार से विदेशी निवेश के मसले पर श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की है।
बिहार में मिली करारी हार के बाद बाज़ार में माहौल बेहतर करने की जद्दोजहद में जुटे प्रधानमंत्री के लिए भारतीय मजदूर संघ का विरोध बड़ा झटका है। उधर सीपीएम के मज़दूर संगठन सीटू ने भारतीय मजदूर संघ के विरोध का समर्थन किया है। सीटू के महासचिव तपन सेन ने एनडीटीवी से कहा, "अगर BMS विदेशी निवेश के विरोध में हमारे साथ आना चाहती है तो उनका वेल्कम है"।
श्रम कानूनों में बदलाव के बाद विदेशी निवेश दूसरा मुद्दा है जिसपर भारतीय मजदूर संघ ने खुलकर एनडीए सरकार का विरोध किया है। एनडीए सरकार के सामने मुश्किल ये है कि इस मुद्दे पर भारतीय मजदूर संघ को दूसरे मज़दूर संगठनों का समर्थन मिल रहा है। ऐसे में अगर सरकार ने उनकी चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया तो आने वाले दिनों में उसकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
भारतीय मजदूर संघ की मांग है कि सरकार तत्काल उन सभी 15 सेक्टरों के स्टेकहोल्डर्स की बैठक बुलाए जिसमें विदेशी निवेश के नियमों को सरल बनाया गया है और उनकी चिंताओं को दूर करने की कोशिश करे। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री वरजेश उपाध्याय ने एनडीटीवी से कहा, "अगर सरकार ने FDI पर हमारी चिता को दूर नहीं किया तो हम सड़क पर आंदोलन करेंगे"। भारतीय मजदूर संघ ने सरकार से विदेशी निवेश के मसले पर श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की है।
बिहार में मिली करारी हार के बाद बाज़ार में माहौल बेहतर करने की जद्दोजहद में जुटे प्रधानमंत्री के लिए भारतीय मजदूर संघ का विरोध बड़ा झटका है। उधर सीपीएम के मज़दूर संगठन सीटू ने भारतीय मजदूर संघ के विरोध का समर्थन किया है। सीटू के महासचिव तपन सेन ने एनडीटीवी से कहा, "अगर BMS विदेशी निवेश के विरोध में हमारे साथ आना चाहती है तो उनका वेल्कम है"।
श्रम कानूनों में बदलाव के बाद विदेशी निवेश दूसरा मुद्दा है जिसपर भारतीय मजदूर संघ ने खुलकर एनडीए सरकार का विरोध किया है। एनडीए सरकार के सामने मुश्किल ये है कि इस मुद्दे पर भारतीय मजदूर संघ को दूसरे मज़दूर संगठनों का समर्थन मिल रहा है। ऐसे में अगर सरकार ने उनकी चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया तो आने वाले दिनों में उसकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं
विदेशी निवेश नीति, एनडीए सरकार, भारतीय मजदूर संघ, मजदूर संगठन, एफडीआई, Foreign Direct Investment, NDA Government, Trade Unions, CITU, BMS, FDI