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BMC Election Result 2026: गैंगस्‍टर से नेता बने अरुण गवली की दोनों बेटियां चुनाव हारीं

गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली की बेटी गीता गवली प्रभाग क्रमांक 212 से मैदान में थीं, वहीं उनकी दूसरी बेटी योगिता गवली प्रभाग क्रमांक 207 से चुनाव लड़ रही थीं.

BMC Election Result 2026: गैंगस्‍टर से नेता बने अरुण गवली की दोनों बेटियां चुनाव हारीं

अंडरवर्ल्ड डॉन और मुंबई की राजनीति में 'डैडी' के नाम से मशहूर अरुण गवली को महापालिका चुनाव में एक के बाद एक दो बड़े झटके लगे हैं. अपनी मजबूत पकड़ वाले गढ़ में ही गवली परिवार को करारी हार का सामना करना पड़ा है. उनकी दोनों बेटियां चुनाव हार गई हैं. 

योगिता गवली को बीजेपी उम्मीदवार ने दी मात

योगिता ने भायखला-चिंचपोकली के वार्ड संख्या 207 से 'अखिल भारतीय सेना' (ABS) के टिकट पर चुनाव लड़ा था. वो अपना पहला चुनाव लड़ी थीं और पहले ही चुनाव में उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा है. योगिता को बीजेपी (BJP) के उम्मीदवार रोहिदास लोखंडे ने हराया.

योगिता गवली ने वार्ड के लोगों को साफ पानी, ड्रेनेज और कचरा प्रबंधन जैसी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिक मुद्दा बताया था. साथ ही शिक्षा, सुरक्षा और महिलाओं के रोजगार के मुद्दों पर भी काम करने की इच्‍छा जताई थी. उन्होंने कहा था कि लोगों का भरोसा फिर से लौटता दिख रहा है. हमें ऐसा काम करना है जिससे हम उनकी उम्मीदों पर खरे उतरें. हालांकि वार्ड की जनता ने अपना फैसला सुना दिया. योगिता को आगे और संघर्ष करना होगा. 

गीता गवली को भी देखना पड़ा हार का मुंह

अरुण गवली की दूसरी बेटी गीता गवली को भी हार का सामना करना पड़ा है. वो भायखला (Byculla) के वार्ड संख्या 212 से 'अखिल भारतीय सेना' (ABS) के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं, जहां से वो 3 बार नगरसेवक रह चुकी हैं. लेकिन इस बार उनका पत्ता भी कट गया और समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार अमरीन शेहजान अब्राहानी को हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी.

गीता ने कहा था- पापा तो रॉबिनहुड हैं

चुनावों से पहले गीता गवली ने कहा कि 15-18 सालों से हम काम कर रहे हैं. पिता इस वक्त साथ में हैं, तो हम खुद को ताकतवर महसूस कर रहे हैं. समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उन्‍होंने कहा था कि दो चुनावों के वक्त पिता नहीं थे, लेकिन इस बार पिता साथ में हैं, तो हम खुद को ताकतवर महसूस कर रहे हैं. वह हमारे साथ नामांकन के दौरान मौजूद थे. हम लोग काफी उत्साहित थे.

गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली को लेकर बेटी गीता ने कहा कि पापा तो रॉबिन हुड हैं. उन्होंने काम किया है, पूरे देश में उनका नाम है. अच्छे काम किए हैं, इसलिए नाम है. उन्होंने कहा था कि हमने काम किया है, इसलिए हमारे अंदर काफी आत्मविश्वास है. हम लोगों के साथ परिवार की तरह जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव के मुद्दे बहुत हैं. फंड से लोगों के लिए तरह-तरह के काम होते हैं, लेकिन स्वास्थ्य और शिक्षा पर काम करना है. बेघर लोगों के लिए भी हम काम करने वाले हैं.

'पिता के नाम से ज्‍यादा इज्‍जत मिली' 

गीता गवली ने कहा कि पहले मैं अपने पिता की बेटी हूं. फिर मैंने भी काम करना शुरू किया और मेरी भी पहचान बन गई. जब पापा एमएलए थे, तो 2007 में महिला सीट घोषित हो जाने के बाद मुझे चुनाव लड़ना पड़ा. यहीं से मेरी राजनीति की शुरुआत हुई.

उन्होंने कहा कि पहले मेरा कॉन्फिडेंस डाउन था, मैं शर्मीली थी, लेकिन धीरे-धीरे आत्मविश्वास आ गया. उन्होंने कहा कि पिता के नाम से मुझे ज्यादा इज्जत मिलती है. मुझे कभी नकारात्मक महसूस नहीं हुआ. जब वह जेल में थे, तब उनकी कमी खलती थी. परिवार अधूरा था, लेकिन अब पूरा है.

उन्होंने यह भी कहा कि विरोधी के तौर पर कोई नहीं है. अगर कोई प्रतिद्वंद्वी आएगा तो भी उसका सामना करेंगे. हम लोगों के साथ सालों से जुड़े हुए हैं. मुझे लोगों का समर्थन मिला हुआ है. हम किसी के साथ समझौता नहीं करने वाले हैं. पिता की पार्टी से ही हम चुनाव लड़ने वाले हैं.

पिता के जेल से बाहर आने पर उन्होंने कहा था कि हम उनके बाहर आने की उम्मीद पर ही जी रहे थे. देर से बाहर आए, लेकिन अब हम खुश हैं. उन्होंने अपनी बहन योगिता को लेकर कहा था कि वह पहले से ही राजनीति में हैं. वह वार्ड में सक्रिय रहती थीं. उन्हें अनुभव है. 

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