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ओडिशा: जिस जंगल में 5 ओरंगुटान मिले, वहां से रात 11:25 बजे गुजरी थी काली Thar; CCTV में कैद हुई घटना

बालासोर के जंगल में 5 ओरंगुटान पाए जाने के बाद इसमें किसी अंतरराष्ट्रीय रैकेट के शामिल होने का शक है. इस बीच एक CCTV फुटेज में काली थार गुजरती नजर आ रही है.

ओडिशा के जंगल में 5 ओरंगुटान का रेस्क्यू किया गया है.
PTI
बालासोर:

ओडिशा के बालासोर के एक जंगल में 5 ओरंगुटान मिले हैं. ओरंगुटान बंदरों की एक प्रजाति है, जो भारत में नहीं पाई जाती. ये ओरंगुटान कहां से आए? उनकी तस्करी किसने की? उन्हें क्यों लाया गया? ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं और मामले की जांच शुरू हो गई है. इस बीच जांच के दौरान एक काली महिंद्रा थार की CCTV फुटेज ने शक और बढ़ा दिया है.

रात 11:25 बजे दिखी Thar

स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि सोमवार की रात को जंगल के पास एक काली SUV देखी गई थी. इलाके से मिली CCTV फुटेज में गाड़ी को रात करीब 11:25 बजे वहां से गुजरते और 15 मिनट बाद वापस लौटते हुए देखा जा सकता है. 

अब इस बात की पड़ताल की जा रही है कि ओरंगुटान जंगल तक कैसे पहुंचे? 

हालांकि, किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले इस बात की पुष्टि की जाएगी कि गाड़ी किसकी है और वह वहां से क्यों गुजरी थी?

लाखों में हो सकती है ओरंगुटान की कीमत

ओडिशा के वन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने न्यूज एजेंसी PTI से कहा कि हालात पर वन विभाग के सभी डॉक्टर और मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) भी नजर रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो नेशनल वाइल्डलाइफ अथॉरिटी से भी एक्सपर्ट डॉक्टरों को बुलाया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इन ओरंगुटान को हवाई, समंदर या रेल से ओडिशा लाया गया हो सकता है. उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हर एक ओरंगुटान की कीमत लगभग 20 से 25 लाख रुपये है.

उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों और बंदरगाहों से CCTV कैमरों की जांच करने की अपील की है.

इस देश के मूल निवासी हैं ओरंगुटान

ओरंगुटान भारत में नहीं पाए जाते. ये इंडोनेशिया और मलेशिया के मूल निवासी हैं. एशिया के कुछ हिस्सों में भी इन्हें देखा गया है लेकिन भारत में तो इनकी प्रजाति नहीं पाई जातीं.

ओरंगुटान 'ग्रेट एप' यानी बड़े वानर हैं, जो अपनी चतुराई और लाल-भूरे बालों के लिए जाने जाते हैं. इनकी आबादी लगातार घट रही है. भारत में इनकी कोई मूल आबादी नहीं है. इसलिए ओडिशा के जंग में 5 ओरंगुटान के मिलने से तस्करी रैकेट के शामिल होने का शक है.

मंत्री गणेश राम खुंटिया ने बताया कि यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि ये अनोखी प्रजातियां ओडिशा कैसे पहुंचा और क्या इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय रैकेट शामिल है.

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