बंदर जैसे दिखने वाले मस्तीखोर बच्चे आखिर ये किस जानवर के हैं? भारत में तो ये नहीं पाए जाते हैं फिर ओडिशा के बालासोर में कहां से आए? बता दें कि ये मस्तीखोर बेबी ओरंगुटान हैं, जो बालेश्वर जिले के भोगराई ब्लॉक के एक जंगल से मंगलवार को बरामद किए गए. क्यों कि ये भारत में नहीं पाए जाते हैं, इसीलिए उनकी तस्करी का शक जताया गया है. इसमें किसी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट के शामिल होने का संदेश पैदा हो गया है.
चिड़ियाघर में नन्हें ओरंगुटानों की खातिरदारी
बालासोर के जंगल से बचाए गए पांच छोटे ओरंगुटानों को भुवनेश्वर में नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क ले जाया गया है, जहां उनकी बच्चों की तरह देखभाल हो रही है. चिड़ियाघर पहुंचते ही उनको वन्यजीव अधिकारियों ने अपनी देखरेख में ले लिया. कम उम्र की वजह से इन ओरंगुटान शावकों की देखभाल चिड़ियाघर के ‘सेंटर फॉर रियरिंग एनिमल बेबीज' में की जाएगी.ये विशेष सुविधा अनाथ और बचाए गए शिशु वन्यजीवों की देखभाल और पालन-पोषण के लिए बनाई गई है.
ओडिशा के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने कहा कि जंगल में ओरंगुटान होने की जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और करीब 1 से 2 साल के पांच ओरंगुटान बच्चों को बचाया.
VIDEO | Bhubaneswar, Odisha: Five baby orangutans rescued from the Balasore forest have been brought to the Nandankanan Zoological Park in Bhubaneswar. The young primates arrived at the zoo earlier today and were immediately taken in by wildlife officials. Given their tender age,… pic.twitter.com/e5VtRRaBiS
— Press Trust of India (@PTI_News) September 9, 2026
ये विदेशी बंदर ओडिशा में कैसे पहुंचे?
मंत्री ने बताया कि बंदरों की ये प्रजातियां इंडोनेशिया और मलेशिया के वर्षावनों (रेनफॉरेस्ट) की मूल निवासी हैं. इन्हें एशियाई उपमहाद्वीप के कुछ अन्य हिस्सों में भी देखा गया है. लेकिन ये प्रजातियां भारत में बहुत कम पाई जाती हैं. ओडिशा में तो बिल्कुल भी नहीं पाई जाती हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी अनोखी वन्यजीव प्रजातियों का मिलना हमारे लिए सौभाग्य की बात है. ये भी हो सकता है कि वे भोजन की तलाश में यहां आए हों, या इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट शामिल हो सकता है. जानकारी के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ओरंगुटान की कीमत करीब 20 लाख से 25 लाख रुपए है.
ओरंगुटानों की तस्करी का शक
उन्होंने कहा था कि वन विभाग की टीम इन अनोखे जानवरों को एक तय जगह पर क्वारंटाइन में रखेगी और जरूरी इलाज देगी. बाद में वे भुवनेश्वर के नंदनकानन चिड़ियाघर में रहेंगे. वन विभाग ने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि ये अनोखी प्रजातियां ओडिशा कैसे पहुंचीं और क्या इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट शामिल है.
जंगल में मिले पांच ओरंगुटान
ओरंगुटान इंडोनेशिया और मलेशिया के मूल निवासी 'ग्रेट एप' बंदर हैं, जो बहुत ही इंटेलिजेंट होते हैं. इनके लाल-भूरे बाल होते हैं. ये गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति है. उनके रहने की जगह के नुकसान और अवैध वन्यजीव व्यापार की वजह से उनकी आबादी घट रही है. भारत में ओरंगुटान की कोई मूल आबादी नहीं है. इसलिए, ओडिशा के एक जंगल में पांच ओरंगुटान के मिलने से अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट के शामिल होने का संदेह पैदा हो गया है.
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