राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी की प्रतिक्रिया सामने आई है. बीजेपी प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि एक न्यूज रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उस न्यूज रिपोर्ट में क्या किसी चुनाव आयुक्त का कोई सीधा बयान है? उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कोट नहीं है, तो फिर किस आधार पर कहा जा रहा है कि चुनाव आयुक्तों ने ऐसा कहा है.
चुनाव आयुक्त वाली मीडिया रिपोर्ट पर क्या बोले?
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि वह समाचार पत्रों की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, लेकिन सामान्य तौर पर किसी भी खबर में संबंधित व्यक्ति से सवाल पूछा जाता है और उसका बयान लिया जाता है. उन्होंने पूछा कि क्या उस रिपोर्ट में किसी का बयान कोट किया गया है? नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि क्या ऐसी कोई रिपोर्ट है जिसमें निर्णय सर्वसम्मति से न हुआ हो? क्या ऐसी कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई है जिसमें तीनों चुनाव आयुक्त मौजूद न रहे हों? उनका कहना था कि ऐसी कोई स्थिति सामने नहीं आई है.
उन्होंने कहा कि जिस रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, उसमें किसी भी चुनाव आयुक्त का कोई कोट नहीं है, कोई प्रतिक्रिया नहीं है और ऑफ द रिकॉर्ड भी कोई प्रतिक्रिया उल्लेखित नहीं है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी से सवाल पूछा कि फिर उस रिपोर्ट का आधार क्या है? उन्होंने कहा कि अगर इसी आधार पर काल्पनिक बातें की जाएं, तो अप्रैल 2012 में उसी अखबार में यह भी लिखा गया था कि कांग्रेस सरकार इतनी डर गई थी कि सेना तक को लेकर आशंकाएं जताई जा रही थीं. उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी सभी खबरों पर भी यकीन किया जाएगा?
उन्होंने कहा कि तकनीकी तौर पर रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 का सेक्शन 21(3) चुनाव आयोग को यह अधिकार देता है कि वह अपनी आवश्यकता और व्यवस्था के अनुसार निर्णय ले सकता है.
राहुल गांधी पर साधा निशाना
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी को भारतीय राजनीति का ज्ञान नहीं है. राहुल गांधी एंटी इनकंबेंसी की बात की. लेकिन वो नहीं जानते कि बंगाल, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में कई दशकों से कांग्रेस की सरकारें वापस नहीं आईं.
एंटी इनकंबेंसी वाले बयान पर क्या बोले?
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के एंटी इनकंबेंसी वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का यह कहना कि एंटी इनकंबेंसी एक स्थापित सच्चाई है और यह बीजेपी के आने के बाद शुरू हुई, राजनीतिक दृष्टि से ज्ञान की कमी को दर्शाता है. भारत की राजनीति के इतिहास को देखने पर पता चलता है कि 1967 के बाद से तमिलनाडु में कांग्रेस कभी सत्ता में नहीं लौटी, जबकि उस समय बीजेपी का अस्तित्व भी नहीं था. पश्चिम बंगाल में 1977 के बाद कांग्रेस सत्ता में वापस नहीं आई और 1977 से 2011 तक 34 वर्षों तक कम्युनिस्ट सरकार रही. इसी तरह बिहार में 1990 के बाद कांग्रेस सत्ता में नहीं रही और लालू यादव के नेतृत्व में लगातार तीन बार सरकार बनी. उत्तर प्रदेश, जिसे गांधी परिवार का गढ़ माना जाता था, वहां भी 1989 के बाद कांग्रेस की सरकार नहीं रही.
उन्होंने कहा कि जिस दौर में कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रही, उस समय वोटर आईडी कार्ड नहीं थे, बूथ कैप्चरिंग होती थी, बैलेट बॉक्स लूटे जाते थे और चुनावों में हिंसा होती थी. उत्तर प्रदेश और बिहार में कई चुनाव ऐसे होते थे जिनमें लोग मारे जाते थे या घायल होते थे. उस समय एंटी इनकंबेंसी कांग्रेस के खिलाफ उसी तरह काम नहीं करती थी. जब चुनाव प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी हुई, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती होने लगी, सीसीटीवी निगरानी शुरू हुई, लाइव फुटेज आने लगी और मीडिया व न्यायपालिका अधिक स्वतंत्र हुई, तब कांग्रेस के लिए सत्ता में लौटना कठिन होता गया.
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