- BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए 19 जनवरी को नामांकन पत्र भरे जाएंगे और 20 जनवरी को मतदान होगा
- राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी संभव है जब कम से कम पचास प्रतिशत राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो चुके हों
- अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है और एक व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल तक इस पद पर रह सकता है
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है. 19 जनवरी को नामांकन पत्र भरा जा सकेगा और एक से अधिक नामांकन होने पर 20 जनवरी को चुनाव कराया जाएगा. इस चुनाव के लिए निर्वाचन मंडल की घोषणा कर दी गई. इसमें देश भर से 5708 मतदाता हैं.पार्टी के संविधान के अनुसार यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है. हालांकि बीजेपी के इतिहास में कभी भी अध्यक्ष चुनाव के लिए मतदान की नौबत नहीं आई है. इसके बावजूद चुनाव की प्रक्रिया का पालन होता है.
निर्वाचन मंडल के गठन के लिए बीजेपी संविधान में कुछ आवश्यक शर्तें हैं. इसके मुताबिक बीजेपी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तब तक नहीं हो सकता जब तक कि देश के कम से कम 50% राज्यों (लगभग 19 राज्यों) में संगठनात्मक चुनाव पूरे न हो चुके हों.सबसे पहले बूथ स्तर, फिर मंडल, जिला और अंत में प्रदेश स्तर के अध्यक्षों का चुनाव होता है. इन चुनावों के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए 'इलेक्टोरल कॉलेज' (निर्वाचक मंडल) तैयार होता है.इस निर्वाचन मंडल में राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश परिषदों के सदस्य शामिल होते हैं. प्रदेश संगठन के चुनाव में परिषद के सदस्यों का चुनाव कराया जाता है.
अध्यक्ष के चुनाव के लिए क्या है योग्यता
अध्यक्ष के उम्मीदवार को कम से कम 15 वर्षों तक पार्टी का सदस्य होना अनिवार्य है. नामांकन के लिए निर्वाचक मंडल के कम से कम 20 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है. ये 20 सदस्य कम से कम 5 अलग-अलग राज्यों से होने चाहिए (जहाँ संगठनात्मक चुनाव पूरे हो चुके हों).इच्छुक उम्मीदवार अपना पर्चा दाखिल करते हैं. नितिन नवीन के लिए प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री शाह और अन्य वरिष्ठ नेता प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर करेंगे. यदि केवल एक ही नामांकन आता है, तो चुनाव अधिकारी उसे 'निर्विरोध' निर्वाचित घोषित कर देते हैं.
बीजेपी के इतिहास में अब तक लगभग सभी अध्यक्ष इसी तरह चुने गए हैं.यदि एक से अधिक उम्मीदवार हों, तो गुप्त मतदान कराया जाता है, जिसमें सर्वाधिक मत पाने वाला व्यक्ति विजयी होता है. अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है. पार्टी संविधान के अनुसार, एक व्यक्ति लगातार दो कार्यकाल (कुल 6 वर्ष) के लिए अध्यक्ष रह सकता है.
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