भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने गुरुवार को दुमका में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए. दुबे ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन और ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े हैं, वे दुनिया के कई देशों में चुनी हुई सरकारों को प्रभावित करने और राजनीतिक एजेंडा चलाने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि ये नेटवर्क भारत में रिजीम चेंज की कोशिशों से जुड़े हो सकते हैं और इसके लिए राहुल गांधी कथित तौर पर इस लॉबी के हित में काम कर रहे हैं.
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उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों और विदेशी व्यक्तियों और संगठनों के साथ कथित संबंधों की गहन जांच होनी चाहिए.
अमेरिकी नेताओं और सोरोस फाउंडेशन का नाम
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निशिकांत दुबे ने नेविल रॉय सिंघम, अमेरिकी सांसद इल्हान उमर, सांसद रो खन्ना और सोरोस फाउंडेशन का नाम लेते हुए सवाल उठाया कि इन अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों का भारत में राजनीतिक गतिविधियों से क्या संबंध है.
उन्होंने राहुल गांधी की हालिया विदेश यात्राओं, जिसमें वियतनाम यात्रा भी शामिल है, पर भी सवाल उठाए और अपने दावों के समर्थन में 22 सितंबर के एक अमेरिकी कांग्रेस के दस्तावेज का हवाला दिया.
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'लोकतंत्र और संप्रभुता पर सवाल'
दुबे के मुताबिक, असली चिंता यह है कि क्या शक्तिशाली अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और तकनीक से जुड़े हित घरेलू राजनीतिक आंदोलनों को प्रभावित करने, चुनी हुई सरकारों को कमजोर करने और बिना जवाबदेही के राजनीतिक परिणाम तय करने की कोशिश कर रहे हैं.
BJP सांसद ने कहा कि अगर ऐसे नेटवर्क की गतिविधियां साबित होती हैं, तो यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, राजनीतिक संप्रभुता और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करेगा.
उन्होंने विदेशी फंडिंग, वित्तीय लेनदेन, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और राजनीतिक अभियानों के बीच किसी भी संभावित संबंध में अधिक पारदर्शिता की मांग की.
दुबे ने यह भी कहा कि भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की किसी भी कोशिश को सबूतों के आधार पर गंभीरता से देखा जाना चाहिए.
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